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Meerut News: शिव की भक्ति के लिए दूर करना होगा अहंकार
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हस्तिनापुर। कस्बे के श्रीकृष्ण मंदिर में चल रही शिव महापुराण कथा के छठे दिन कथा में शामिल होकर लोगों ने धर्म लाभ अर्जित किया। कथावाचक ने कहा कि शिव की प्राप्ति के लिए अहंकार त्यागना होगा।
ऐतिहासिक नगरी में चल रही शिव महापुराण में मथुरा वृंदावन से आई कथावाचक वर्षा गॉड ने कहा कि शिव महापुराण कथा श्रवण व शिव भक्ति के लिए पहले अहंकार दूर करना होगा, क्योंकि जब तक अहंकार होता है, तब तक भोलेनाथ प्रसन्न नहीं होते हैं। जिस प्रकार आदि देव महादेव को भोलेनाथ कहा जाता है, उसी तरह उनको अपने भक्त भी भोले ही पसंद हैं। जब तक अहंकार दूर नहीं होगा, तब तक शिव की भक्ति प्राप्त होना कठिन है।
शिव कथा सुनाते हुए आगे कहा कि शिव और पार्वती के दो पुत्र कार्तिकेय और गणेश हैं। कार्तिकेय को पुरुषार्थ का प्रतीक माना गया है। पुराणों में श्री गणेश की अनेक कथाएं प्राप्त होती हैं। एक कल्प में शनि की दृष्टि से सिर कटता है और दूसरे में स्वयं शिव सिर काटते हैं। माता के कोप से बचने के लिए हाथी का सिर जोड़ा जाता है। हाथी का सिर बड़ा होता है, लेकिन आंखें छोटी होती हैं। यह सूक्ष्म दृष्टि का प्रतीक हैं। हमारी दृष्टि सूक्ष्म होनी चाहिए। कान सूप के जैसे मानो फालतू बात गणेश नहीं सुनते। एक दांत अर्थात जो बात कह दी, उस पर अटल रहते हैं और लंबी नाक होना प्रतिष्ठा का प्रतीक है। जहां पर सूक्ष्म दृष्टि होती है, वहां विघ्न नहीं होता है और जहां विघ्न बाधा न हों तो वहीं ऋद्धि-सिद्धि और शुभ लाभ का सदैव आगमन होता है। कार्यक्रम को सफल बनाने में पंडित दिनेश शर्मा, ज्योति शर्मा व गोपाल शर्मा आदि का सहयोग रहा।
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ऐतिहासिक नगरी में चल रही शिव महापुराण में मथुरा वृंदावन से आई कथावाचक वर्षा गॉड ने कहा कि शिव महापुराण कथा श्रवण व शिव भक्ति के लिए पहले अहंकार दूर करना होगा, क्योंकि जब तक अहंकार होता है, तब तक भोलेनाथ प्रसन्न नहीं होते हैं। जिस प्रकार आदि देव महादेव को भोलेनाथ कहा जाता है, उसी तरह उनको अपने भक्त भी भोले ही पसंद हैं। जब तक अहंकार दूर नहीं होगा, तब तक शिव की भक्ति प्राप्त होना कठिन है।
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शिव कथा सुनाते हुए आगे कहा कि शिव और पार्वती के दो पुत्र कार्तिकेय और गणेश हैं। कार्तिकेय को पुरुषार्थ का प्रतीक माना गया है। पुराणों में श्री गणेश की अनेक कथाएं प्राप्त होती हैं। एक कल्प में शनि की दृष्टि से सिर कटता है और दूसरे में स्वयं शिव सिर काटते हैं। माता के कोप से बचने के लिए हाथी का सिर जोड़ा जाता है। हाथी का सिर बड़ा होता है, लेकिन आंखें छोटी होती हैं। यह सूक्ष्म दृष्टि का प्रतीक हैं। हमारी दृष्टि सूक्ष्म होनी चाहिए। कान सूप के जैसे मानो फालतू बात गणेश नहीं सुनते। एक दांत अर्थात जो बात कह दी, उस पर अटल रहते हैं और लंबी नाक होना प्रतिष्ठा का प्रतीक है। जहां पर सूक्ष्म दृष्टि होती है, वहां विघ्न नहीं होता है और जहां विघ्न बाधा न हों तो वहीं ऋद्धि-सिद्धि और शुभ लाभ का सदैव आगमन होता है। कार्यक्रम को सफल बनाने में पंडित दिनेश शर्मा, ज्योति शर्मा व गोपाल शर्मा आदि का सहयोग रहा।
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