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चिंताजनक : मेरठ में मेडिकल स्टोर चार हजार, ड्रग इंस्पेक्टर एक, दवा विक्रेता उठा रहे फायदा 

Mon, 09 Aug 2021 11:09 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 09 Aug 2021 11:09 AM IST
सार

ड्रग इंस्पेक्टर का महत्वपूर्ण काम होता है। दवाओं की जानकारी रखने के साथ ही उनकी चेकिंग, ड्रग लाइसेंस बनाने, पुराने लाइसेंस को रिन्यू करने व सत्यापन आदि का काम ड्रग इंस्पेक्टर के कंधों पर रहता है।

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one drug inspector on four thousand Medical store in Meerut, drug dealers are taking advantage
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala

विस्तार

आप मानकों के अनुरूप तैयार की गई दवाइयां खा रहे हैं या नहीं, यह समय से पता नहीं चल पा रहा है। दरअसल, मेरठ में औषधि विभाग का जैसे-तैसे कार्य चल रहा है, क्योंकि शहर में करीब चार हजार मेडिकल स्टोर हैं और इनकी निगरानी का जिम्मा महज एक ड्रग इंस्पेक्टर पर है। जबकि मानकों के अनुसार 200 मेडिकल स्टोर्स पर एक ड्रग इंस्पेक्टर होना चाहिए। लिहाजा 19 ड्रग इंस्पेक्टर कम हैं। 

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मेरठ में दो ड्रग इंस्पेक्टरों की तैनाती है, लेकिन इनमें से भी एक पद खाली चल रहा है। ड्रग इंस्पेक्टरों की कमी होने की वजह से सभी दवा दुकानों की जांच नियमित रूप से संभव नहीं हो पाती है। दवा की दुकानों से सैंपल लेने के बाद आने वाली रिपोर्ट की जानकारी भी किसी को नहीं दी जाती है, ऐसे में फायदा दवा विक्रेता उठा रहे हैं। 

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इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। ड्रग इंस्पेक्टर का महत्वपूर्ण काम होता है। दवाओं की जानकारी रखने के साथ ही उनकी चेकिंग, ड्रग लाइसेंस बनाने, पुराने लाइसेंस को रिन्यू करने व सत्यापन आदि का काम ड्रग इंस्पेक्टर के कंधों पर रहता है। दवा विक्रेता अपने लाइसेंस नवीनीकरण, सत्यापन आदि को लेकर भी परेशान रहते हैं। 

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मानक सही है या नहीं 
बुखार, खांसी, जुकाम, स्किन, कफ सीरप, पेट दर्द और एंटीबायोटिक आदि दवाओं में यह जांच की जाती है कि दवा के बारे में रैपर पर जो लिखा है, वह मानकों के अनुरूप है या नहीं। फिर दवा में संबंधित साल्ट की मात्रा ज्यादा या कम तो नहीं है।

मसलन, बुखार में इस्तेमाल की जाने वाली दवा में पैरासिटामॉल की मात्रा 500 एमजी लिखी है, वास्तव में मात्रा कम या ज्यादा तो नहीं है आदि। इसके अलावा यह भी जांचा जाता है कि ऐसा तो नहीं है कि जिस कंपनी की दवा है उसके पास इस दवा बनाने का लाइसेंस है या नहीं।

लखनऊ की लैब पर है दबाव
मेरठ की लैब अभी शुरू नहीं हो पाई है। वेस्ट यूपी से जाने वाले दवाओं के सैंपलों की जांच लखनऊ की प्रयोगशाला में होती है। सैंपलों के दबाव के कारण रिपोर्ट आने में देरी होती है। यही वजह है कि करीब 100 दवाओं के सैंपल की रिपोर्ट नहीं आई है। -पवन शाक्य, ड्रग इंस्पेक्टर

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