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ओमिक्रॉन का खौफ : विदेश से 82 लोग और आए मेरठ, 616 की जांच होनी बाकी, रिकॉर्ड में दो बार लिखे गए 192 लोगों के नंबर 

न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 25 Dec 2021 11:47 AM IST

सार

मेरठ में विदेश से आए 41 लोगों समेत 5284 लोगों की शुक्रवार को जांच की गई, जिनमें कोरोना का कोई मरीज नहीं मिला है। हालांकि अभी 616 की जांच होनी बाकी है। वहीं कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों पर हमला हुआ तो मेरठ में बाल रोग विशेषज्ञ ढूंढने पड़ेंगे।
तीसरी लहर के लिए मेरठ में तैयारी
तीसरी लहर के लिए मेरठ में तैयारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मेरठ में विदेश से आए 41 लोगों समेत 5284 लोगों की शुक्रवार को जांच की गई, जिनमें कोरोना का कोई मरीज नहीं मिला। इनमें बुधवार को पॉजिटिव आए डॉक्टर दंपती और उनकी बेटी के सम्पर्क वाले लोगों की रिपोर्ट भी नेगेटिव है। पांच केस सक्रिय है, जो होम आइसोलेशन में हैं। जिले में अब रक 66050 मरीज मिल चुके हैं। 

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वहीं, विदेश से 82 लोग और आए हैं। इस तरह अब तक 1992 लोग आ चुके हैं, जिनमें से 1175 की जांच हो चुकी है, 9 लोग बिना जांच वापस चले गए, 808 की जांच होनी थी। इनमें 192 के मोबाइल नम्बर दो बार लिखे गए थे। इस तरह 616 की जांच बाकी है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर जीनोम सीक्वेंसिंग कराई जाएगी। अभी छह लोगों की जीनोम सीक्वेंसिंग की रिपोर्ट आनी बाकी है। 


इसके अलावा फोकस सैंपलिंग के तहत 36 स्थानों से 1344 लोगों के सैंपल लिए गए। सर्विलांस अधिकारी डॉ. अशोक तलियान ने बताया कि दुबई साबुन गोदाम आई युवती का होम आइसोलेशन खत्म हो चुका है। उसकी जीनोम सीक्वेंसिंग की रिपोर्ट आनी है।

दोनों डोज लगवाने वालों की संख्या 13 लाख के पार 
शुक्रवार को 17973 लोगों ने कोरोना से बचाव का टीका लगवाया। हालांकि 75 हजार लोगों टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया था। जिले में अब तक 21 लाख 55 हजार 443 लोग कोरोना से बचाव की पहली डोज लगवा चुके हैं जबकि इनमें से 13 लाख 5240 लोगों को दोनों डोज लग चुकी हैं। दोनों डोज लगने के बाद ही टीकाकरण पूर्ण माना जाता है।

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कोरोना की तीसरी लहर अगर आई तो जिले में बाल रोग विशेषज्ञों की कमी बच्चों के लिए मुसीबत बन सकती है। जिले में 14 वर्ष तक के बच्चों की करीब 9 लाख 91 हजार 800 आबादी पर सिर्फ 147 बाल रोग विशेषज्ञ हैं। यानी 6746 बच्चों पर एक बालरोग विशेषज्ञ है। 

तीसरी लहर से निपटने के लिए एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में 100 बेड और जिला अस्पताल में 40 बेड के पीडियाट्रिक इंटेसिंव केयर यूनिट (पीआईसीयू) तैयार किए गए हैं। इनके अलावा 12 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर  भी 120 बेड के पीआईसीयू तैयार किए गए हैं। मेडिकल में 50 बेड आइसोलेशन वार्ड, 25-25 बेड का आईसीयू और जनरल वार्ड है। यहां 25 वेंटिलेंटर हैं। लेकिन बच्चों की आबादी के मुकाबले यह संसाधन पर्याप्त नहीं हैं। 

कर रहे हैं तैयारी 
तीसरी लहर में बच्चों पर ज्यादा खतरे की आशंका जताई गई थी। मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और सीएचसी पर बच्चों के लिए वार्ड तैयार करा दिए गए हैं। जरूरत के हिसाब से और भी बदलाव किए जाएंगे। - डॉ. अशोक तालियान, सर्विलांस अधिकारी

अस्थायी चिकित्सकों से की जा रही भरपाई
मेडिकल के प्राचार्य डॉ आरसी गुप्ता ने बताया कि चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए कुछ अस्थायी चिकित्सक रखे गए हैं। हृदय रोग विशेषज्ञ, न्यूरो सर्जरी और यूरोलॉजिस्ट ने सुपर स्पेश्यलिटी विंग में ज्वाइन किया है। चिकित्सकों की कमी के संबंध में शासन को अवगत कराया जा चुका है। 

जिले में संख्या 
स्वास्थ्य विभाग (सीएमओ के अंतर्गत)- 11
मेडिकल कॉलेज 35 (सीनियर व जूनियर रेजिडेंट समेत)
जिला अस्पताल : 04
महिला अस्पताल :  05
निजी चिकित्सक :  92
योग :           147

कैसे हो इलाज और पढ़ाई, मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों के 44 पद खाली
एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में 44 चिकित्सा-शिक्षकों की कमी है। इस कारण एमबीबीएस की 50 सीटें भी गंवानी पड़ी हैं। मरीजों को इलाज के लिए परेशानी झेलनी पड़ रही है। रेडियो डायग्नोसिस प्रोफेसर डॉ. यासमीन उस्मानी की ड्यूटी सहारनपुर और मेरठ मेडिकल कॉलेज में लगाई गई तो उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सकों के पद भरने के निर्देश दिए हैं। मेरठ मेडिकल कॉलेज में करीब 1300 स्टूडेंट्स पढ़ाई कर रहे हैं। कॉलेज में सीनियर चिकित्सकों के 184 पदों के मुकाबले 140 चिकित्सक हैं।

मेडिकल से चिकित्सकों का हो रहा मोहभंग
एक तरफ विशेषज्ञ चिकित्सकों का टोटा तो दूसरी तरफ  मेडिकल कॉलेज से चिकित्सकों के मोहभंग हो रहा है। यहां से पिछले 10 सालों में ही कई विशेषज्ञ चिकित्सक इस्तीफा दे चुके हैं। इनमें हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. परवेज अहमद,  मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि राणा, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित उपाध्याय, यूरो सर्जन अभिषेक जैन, प्लास्टिक सर्जन भानू प्रताप फिजिशियन अमित माहेश्वरी शामिल हैं।

10 मिनट से कम में मिलेगा इलाज 
स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का दावा है कि अस्पताल पहुंचने के बाद बच्चों और किशोरों का इलाज शुरू कराने के लिए 10 मिनट का समय रखा गया है। इसके लिए मेडिकल, जिला अस्पताल, सुभारती, एनसीआर मेडिकल कॉलेज, दौराला, मवाना, हस्तिनापुर और किठौर सीएचसी पर तीन बार मॉक ड्रिल करके व्यवस्थाएं चेक भी की गई हैं।
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