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शौचालयों की सफाई कराना कराना भूल गए अफसर
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मेरठ। स्वच्छ भारत मिशन अंतर्गत लाखों रुपये खर्च कर शहर में करीब 500 स्थानों पर सामुदायिक सार्वजनिक शौचालयों और मूत्रालयों का निर्माण कराया गया। इसके पीछे सरकार की मंशा है कि कोई भी खुले में शौच न करें। नगर निगम के अधिकारियों की कार्यप्रणाली ने सरकार की मंशा पर पानी फेर दिया है। शहर में बनवाए गए शौचालयों एवं मूत्रालयों में गंदगी का आलम है। इनमें से अधिकतर में पानी के कनेक्शन भी नहीं हैं। जिससे गंदगी के चलते लोग इनका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। इतना ही नहीं लोगों को बीमारी का भय बना रहता है।
नगर निगम ने शहर में ढाई सौ से अधिक स्थानों पर मूत्रालयों का निर्माण कराया है। इन सभी में पानी के कनेक्शन होने चाहिए। वहीं, क्षेत्रीय सफाई कर्मचारी की ड्यूटी लगानी चाहिए। इसी प्रकार सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालयों में पानी और स्वच्छता की व्यवस्था होनी चाहिए। इनके उलट सच्चाई यह है कि शहर में अधिकतर मूत्रालय ऐसे हैं जिनमें नगर निगम पानी का कनेक्शन नहीं करा पाया है। स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान नगर निगम ने सभी शौचालयों और मूत्रालयों की नियमित सफाई के लिए सफाईकर्मियों की तैनाती की थी। उन्होंने कुछ समय तक काम किया परंतु इसके बाद उनका कोई पता नहीं है। नगर निगम के अधिकारी भी मूत्रालयों की सफाई व्यवस्था कराना भूल गए। अमर उजाला ने बुधवार को शहर के कुछ शौचालयों और मूत्रालयों में सुविधाओं का जायजा लिया। शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में बने शौचालय की स्थिति बेहद खराब मिली। यहां के व्यापारियों का कहना है कि इस शौचालय का इस्तेमाल प्रतिदिन 500 से 1000 लोग करते हैं। इसके बावजूद नगर निगम द्वारा इसकी सफाई नहीं कराई जाती है। यह शौचालय बीमारी बांट रहा है। इसके अतिरिक्त बच्चा पार्क चौराहा, जिला अस्पताल के बाहर, दिल्ली गेट पुलिस चौकी के बाहर, शारदा रोड शास्त्रीनगर, गंगानगर, पल्लवपुरम, कंकरखेड़ा शिव चौक आदि स्थानों पर बने मूत्रालयों में गंदगी की भरमार मिली।
वर्जन
सभी सफाई इंस्पेक्टरों को शौचालय और मूत्रालयों की सफाई के निर्देश दिए हैं। हो सकता है लॉकडाउन के चलते कुछ मूत्रालयों की सफाई नहीं हो पाई हो। वहां व्यवस्था सुदृढ़ की जाएगी। जिन मूत्रालयों में पानी के कनेक्शन नहीं हुए हैं उनके लिए ठेकेदारों को निर्देश दिए हैं।-डॉ. गजेंद्र कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम
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नगर निगम ने शहर में ढाई सौ से अधिक स्थानों पर मूत्रालयों का निर्माण कराया है। इन सभी में पानी के कनेक्शन होने चाहिए। वहीं, क्षेत्रीय सफाई कर्मचारी की ड्यूटी लगानी चाहिए। इसी प्रकार सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालयों में पानी और स्वच्छता की व्यवस्था होनी चाहिए। इनके उलट सच्चाई यह है कि शहर में अधिकतर मूत्रालय ऐसे हैं जिनमें नगर निगम पानी का कनेक्शन नहीं करा पाया है। स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान नगर निगम ने सभी शौचालयों और मूत्रालयों की नियमित सफाई के लिए सफाईकर्मियों की तैनाती की थी। उन्होंने कुछ समय तक काम किया परंतु इसके बाद उनका कोई पता नहीं है। नगर निगम के अधिकारी भी मूत्रालयों की सफाई व्यवस्था कराना भूल गए। अमर उजाला ने बुधवार को शहर के कुछ शौचालयों और मूत्रालयों में सुविधाओं का जायजा लिया। शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में बने शौचालय की स्थिति बेहद खराब मिली। यहां के व्यापारियों का कहना है कि इस शौचालय का इस्तेमाल प्रतिदिन 500 से 1000 लोग करते हैं। इसके बावजूद नगर निगम द्वारा इसकी सफाई नहीं कराई जाती है। यह शौचालय बीमारी बांट रहा है। इसके अतिरिक्त बच्चा पार्क चौराहा, जिला अस्पताल के बाहर, दिल्ली गेट पुलिस चौकी के बाहर, शारदा रोड शास्त्रीनगर, गंगानगर, पल्लवपुरम, कंकरखेड़ा शिव चौक आदि स्थानों पर बने मूत्रालयों में गंदगी की भरमार मिली।
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सभी सफाई इंस्पेक्टरों को शौचालय और मूत्रालयों की सफाई के निर्देश दिए हैं। हो सकता है लॉकडाउन के चलते कुछ मूत्रालयों की सफाई नहीं हो पाई हो। वहां व्यवस्था सुदृढ़ की जाएगी। जिन मूत्रालयों में पानी के कनेक्शन नहीं हुए हैं उनके लिए ठेकेदारों को निर्देश दिए हैं।-डॉ. गजेंद्र कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम
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