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मेरठ: हादसे के बाद जागे अफसर, अब मिलेगा योजना का लाभ
Mon, 13 Feb 2023 01:55 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Mon, 13 Feb 2023 01:55 AM IST
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लावड़। शनिवार तड़के दर्दनाक हादसे के बाद अफसरों की नींद टूटी। मुफलिसी में जीवन यापन कर रहे तौफीक व अहजाद के परिवार को अफसरों ने सरकारी योजनाओं को लाभ दिलाने का आश्वासन दिया है। अभी तक परिवार दूसरे की जमीन पर पन्नी डालकर रह रहा था।
ग्रेटर लावड़ कॉलोनी में रहने वाले नवाब के आठ बच्चे हैं। सबसे बड़े बेटे तौफीक व उससे छोटे बेटे अहजाद की शनिवार तड़के हादसे में मौत हो गई। इसी कॉलानी में नवेद पुत्र लियाकत भी किराये के मकान में रहता है। लियाकत रिक्शा चलाता है तो नवेद बरात में घोड़ा बग्गी के साथ जाकर लाइट पकड़ने का काम करता था। उन्हें तीन सौ रुपये की मजदूरी मिलती थी।
शादी का सीजन खत्म होने पर राज मिस्त्री के साथ मजदूरी करता था। सिर पर छत न होने के कारण नवाब ग्रेटर लावड़ कॉलोनी में एक व्यक्ति के खाली प्लॉट में पन्नी डालकर रहता था। इसके बावजूद उन्हें सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा था। रविवार को तहसीलदार नटवर सिंह मृतकों के यहां पहुंचे और जरूरी कागजात जमा करने के लिए कहा। ताकि, उन्हें जल्द से जल्द योजना का लाभ मिल सके।
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परिजनों का कहना है कि उन्हें किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल सका। यहीं, हाल सीताराम के परिवार का भी है। सीताराम भी बड़े बेटे प्रदीप के साथ बरात में घोड़ा बग्गी चलाकर परिवार का भरण पोषण कर रहा था।
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ग्रेटर लावड़ कॉलोनी में रहने वाले नवाब के आठ बच्चे हैं। सबसे बड़े बेटे तौफीक व उससे छोटे बेटे अहजाद की शनिवार तड़के हादसे में मौत हो गई। इसी कॉलानी में नवेद पुत्र लियाकत भी किराये के मकान में रहता है। लियाकत रिक्शा चलाता है तो नवेद बरात में घोड़ा बग्गी के साथ जाकर लाइट पकड़ने का काम करता था। उन्हें तीन सौ रुपये की मजदूरी मिलती थी।
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शादी का सीजन खत्म होने पर राज मिस्त्री के साथ मजदूरी करता था। सिर पर छत न होने के कारण नवाब ग्रेटर लावड़ कॉलोनी में एक व्यक्ति के खाली प्लॉट में पन्नी डालकर रहता था। इसके बावजूद उन्हें सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा था। रविवार को तहसीलदार नटवर सिंह मृतकों के यहां पहुंचे और जरूरी कागजात जमा करने के लिए कहा। ताकि, उन्हें जल्द से जल्द योजना का लाभ मिल सके।
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परिजनों का कहना है कि उन्हें किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल सका। यहीं, हाल सीताराम के परिवार का भी है। सीताराम भी बड़े बेटे प्रदीप के साथ बरात में घोड़ा बग्गी चलाकर परिवार का भरण पोषण कर रहा था।