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सूरजकुंड पार्क में लगा तिरंगा फटने से आक्रोश
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Wed, 22 Mar 2017 01:56 AM IST
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सूरजकुंड में लहराता किनारे से फटा हुआ तिरंगा।
- फोटो : अमर उजाला
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सूरजकुंड पार्क में लगे राष्ट्रध्वज का एमडीए बार-बार अपमान कर रहा है। लगातार एक माह पोल से गायब होने के बाद लगाया गया तिरंगा एक सप्ताह बाद ही फट गया है। इससे लोगों में आक्रोश है। पोल पर फटा हुआ तिरंगा ही फहर रहा है।
सूरजकुंड पार्क में एमडीए ने विशाल तिरंगा लगवाया था। जो क्रांतिधरा की पहचान बन गया। 24 घंटे फहरने वाले तिरंगे की सुरक्षा की जिम्मेदारी से एमडीए प्रशासन हाथ खींच रहा है। एक सप्ताह पहले ‘अमर उजाला’ ने तिरंगे के सम्मान का मामला उठाया था। समाचार प्रकाशित होने के बाद एमडीए अधिकारियों की नींद टूटी और तिरंगा लगवा दिया। यह तिरंगा ज्यादा दिन नहीं चला और एक सप्ताह में ही फट गया। पार्क में रोजाना घूमने आने वाले लोगों ने इसकी शिकायत एमडीए अधिकारियों से की, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है। पिछले सप्ताह एमडीए ने नगर निगम को पत्र लिखकर कहा था कि हमारे पास इसके रखरखाव के लिए बजट नहीं है इसलिए नगर निगम इसे अपने हाथ में ले ले। जिस पर नगर निगम प्रशासन ने तकनीकी स्टाफ की कमी दर्शाते हुए इससे इनकार कर दिया था। वहीं महापौर ने इस संबंध में फिर कमिश्नर को पत्र लिखकर जहां तिरंगा बदलवाने की मांग की है वहीं तिरंगे का अपमान करने वाले अधिकारियों की जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है।
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तिरंगा एमडीए ने लगाया है। बजट न होने की बात कहना अनुचित है। यदि एमडीए के पास राष्ट्र ध्वज के लिए ही बजट नहीं है तो फिर विभाग क्या कर रहा है।कमिश्नर को पत्र लिखकर तिरंगे को बदलवाने और तिरंगे के रखरखाव और बार-बार अपमान करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। -हरिकांत अहलूवालिया, महापौर
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सूरजकुंड पार्क में एमडीए ने विशाल तिरंगा लगवाया था। जो क्रांतिधरा की पहचान बन गया। 24 घंटे फहरने वाले तिरंगे की सुरक्षा की जिम्मेदारी से एमडीए प्रशासन हाथ खींच रहा है। एक सप्ताह पहले ‘अमर उजाला’ ने तिरंगे के सम्मान का मामला उठाया था। समाचार प्रकाशित होने के बाद एमडीए अधिकारियों की नींद टूटी और तिरंगा लगवा दिया। यह तिरंगा ज्यादा दिन नहीं चला और एक सप्ताह में ही फट गया। पार्क में रोजाना घूमने आने वाले लोगों ने इसकी शिकायत एमडीए अधिकारियों से की, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है। पिछले सप्ताह एमडीए ने नगर निगम को पत्र लिखकर कहा था कि हमारे पास इसके रखरखाव के लिए बजट नहीं है इसलिए नगर निगम इसे अपने हाथ में ले ले। जिस पर नगर निगम प्रशासन ने तकनीकी स्टाफ की कमी दर्शाते हुए इससे इनकार कर दिया था। वहीं महापौर ने इस संबंध में फिर कमिश्नर को पत्र लिखकर जहां तिरंगा बदलवाने की मांग की है वहीं तिरंगे का अपमान करने वाले अधिकारियों की जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है।
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तिरंगा एमडीए ने लगाया है। बजट न होने की बात कहना अनुचित है। यदि एमडीए के पास राष्ट्र ध्वज के लिए ही बजट नहीं है तो फिर विभाग क्या कर रहा है।कमिश्नर को पत्र लिखकर तिरंगे को बदलवाने और तिरंगे के रखरखाव और बार-बार अपमान करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। -हरिकांत अहलूवालिया, महापौर
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