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Meerut News: ओडीएल फीस का विरोध, प्राइवेट को लेकर असमंजस में छात्र

Tue, 30 Dec 2025 07:26 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 30 Dec 2025 07:26 PM IST
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ODL fee protest, students confused about private
सीसीएसयू: छात्रों ने कहा-ओडीएल मोड आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए शिक्षा के दरवाजे बंद कर देगा
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आंदोलन के मूड में छात्र संगठन
पिछले साल की तरह प्राइवेट मोड को जारी रखने की मांग
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) द्वारा प्राइवेट मोड को धीरे-धीरे बंद कर ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ओडीएल) मोड में शिफ्ट करने की प्रक्रिया अब विवादों में घिर गई है। छात्रों का आरोप है कि ओडीएल की फीस ग्रामीण और गरीब वर्ग के छात्रों के लिए शिक्षा के दरवाजे बंद कर रही है। यह फैसला लाखों छात्र-छात्राओं के भविष्य पर सीधा असर डाल रहा है, जिससे विरोध तेज हो गया है। इस साल प्राइवेट मोड में कोर्स होगा या नही इसे लेकर भी छात्र असमंजस में हैं।
बता दें कि विश्वविद्यालय ने यूजीसी की अनुमति से कुछ विषयों में ओडीएल शुरू किया है, लेकिन जिन कोर्सेज में अभी मंजूरी नहीं मिली, उनमें प्राइवेट व्यवस्था जारी रखने की बात कही गई है। छात्रों का मुख्य आक्रोश ओडीएल की अधिक फीस पर है। पूर्व महामंत्री अंकित अधाना ने कहा कि प्राइवेट मोड वर्षों से ग्रामीण निर्धन छात्रों, नौकरीपेशा युवाओं और मध्यम वर्ग के लिए सस्ती उच्च शिक्षा का एकमात्र सहारा रहा है। हर साल लाखों छात्र इसी माध्यम से डिग्री पूरी करते हैं। प्राइवेट फॉर्म की फीस उनकी आर्थिक स्थिति के अनुरूप थी, लेकिन ओडीएल में फीस कई गुना तक बढ़ा दी गई है, जो ग्रामीण परिवेश और कमजोर आर्थिक स्थिति वाले विद्यार्थियों की पहुंच से पूरी तरह बाहर है।
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छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय ने ओडीएल मोड को अभी पूरी तरह स्थापित भी नहीं किया है। ऑनलाइन संसाधन, मूल्यांकन व्यवस्था और अन्य सुविधाएं अपर्याप्त हैं, फिर भी पुरानी प्राइवेट व्यवस्था को जल्दबाजी में समाप्त करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने अन्य राज्यों के विश्वविद्यालयों से तुलना करते हुए आरोप लगाया कि सीसीएसयू ने ओडीएल फीस काफी अधिक तय की है, जबकि सस्ती शिक्षा प्रदान करना ग्रामीण युवाओं के लिए राज्य की जिम्मेदारी है। अंतिम समय में लिया गया यह निर्णय पूरी तरह तर्कहीन और छात्र-विरोधी है। छात्रों की प्रमुख मांग है कि ओडीएल में चलाए जा रहे सभी पाठ्यक्रमों की फीस पुरानी प्राइवेट व्यवस्था के बराबर ही रखी जाए, ताकि शिक्षा का अधिकार अमीरों तक सीमित न हो। यदि प्राइवेट मोड को पूरी तरह बंद किया गया तो बड़े स्तर पर प्रदर्शन और आंदोलन होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि ओडीएल यूजीसी दिशा निर्देशों के अनुरूप है, जिसमें बेहतर ऑनलाइन संसाधन, नियमित मूल्यांकन और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा रही है, लेकिन छात्रों का मानना है कि फीस वृद्धि से गरीब और मध्यम वर्ग के छात्र उच्च शिक्षा से वंचित हो जाएंगे।यह विवाद अब और गहरा रहा है। छात्र संगठन जल्द ही बड़े आंदोलन की योजना बना रहे हैं।
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