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अब गर्भ में होगी अनुवांशिक बीमारियों की जांच, यह होगा फायदा

Sun, 18 Jun 2017 03:12 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Sun, 18 Jun 2017 03:12 PM IST
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Now will be in the womb to investigate genetic diseases, such pick up advantage
अनुवांशिक बीमारियों की जांच गर्भ में ही संभव

विरासत में हमें सिर्फ नैन-नक्श ही नहीं, कई बीमारियां भी मिल जाती हैं, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रहती हैं। अब मेरठ में भी शिशु में खून से संबंधित होने वाली अनुवांशिक बीमारियों की जांच गर्भ में ही संभव हो जाएगी। दरअसल, मेडिकल कॉलेज में हाई परफार्मेंस लिक्विड क्रोमैटोग्राफी मशीन (एचपीएलसी) आ गई है। इसी महीने के आखिर तक इससे जांच होनी शुरू हो जाएगी। 

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विदेश की है मशीन
यह मशीन यूएसए की बनी हुई है और करीब 45 लाख रुपये कीमत की है। इसके लिए मेडिकल कॉलेज से डिमांड भेजी गई थी।

मेडिकल कॉलेज के नोडल अधिकारी डॉ. नवदीप रत्न कहते हैं कि जीवन शैली में बदलाव के कारण काफी तादाद में बच्चे किसी न किसी तरह की समस्या के साथ पैदा होते हैं। इस तरह की समस्याओं से बचाव के लिए गर्भावस्था में ही जांच की जा सकेगी। गर्भवती महिला को गर्भावस्था के पहले तीन महीने में ही थैलेसीमिया की जांच करा लेनी चाहिए। कैंसर आदि होने के भी अनुवांशिक कारण हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि यह मशीन रखने के लिए सेटअप तैयार कर लिया गया है। इस माह के आखिर तक इससे जांच शुरू कर दी जाएंगी। 

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क्या कहते हैं विशेषज्ञ

Now will be in the womb to investigate genetic diseases, such pick up advantage
मेडिकल कॉलेज

यह होगा फायदा 
अभी तक बच्चे के होने के बाद ही बीमारियों का पता चल पाता था। लेकिन इस मशीन से अनुवांशिक हीमोग्लोबिन बीमारियों का गर्भ के दौरान ही पता लगाया जा सकता है। गर्भावस्था के दौरान ही रोग की पहचान होने से शिशु को सही इलाज मिल सकेगा। मां की सही तरीके से काउंसिलिंग कर सलाह दी जाएगी। उसे खानपान में सुधार और बीमारी से संबंधित सटीक दवाइयां दी जा सकेंगी। अगर समस्या ज्यादा गंभीर है या असामान्य शिशु है तो वक्त रहते गर्भपात भी कराया जा सकता है। इस मशीन के जरिए थैलेसीमिया से ग्रस्त शिशु की जांच भी गर्भ में हो सकेगी। गौरतलब है कि थैलेसीमिया के करीब 25 फीसदी केस नवजात शिशु में पाए जाते हैं।

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