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कूड़े का निस्तारण नहीं, हो रहा पृथक्करण

Wed, 20 Jan 2021 01:35 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 20 Jan 2021 01:35 AM IST
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No waste disposal, segregation happening
मेरठ। स्वच्छता सर्वेक्षण लीग 2021 में शहर की रैंक सुधारने का दावा कर रहे नगर निगम अधिकारी शहर से निकलने वाले कूड़े का निस्तारण नहीं करा पा रहे हैं। एनजीटी की फटकार के बाद गांवड़ी में भी कूड़ा निस्तारण न करके उसका पृथक्करण (कचरे से मिट्टी, प्लास्टिक, कांच, पत्थर आदि की छटाई करना) किया जा रहा है।
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यहां पड़े कूड़े का जितना पृथक्करण हो रहा है उससे कई गुणा कूड़ा लोहियानगर में डंप होता जा रहा है। आलम ये है कि सीएम और पर्यावरण संबंधी एजेंसियों की नजर से कूड़े को छिपाने के लिए व्यू कटर लगावाए जा रहे है।
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शहर से हर रोज करीब 900 टन कूड़ा निकलता है। निकलने वाले कूड़े के निस्तारण का सही इंतजाम नहीं होने के चलते शहर के चारों तरफ कूड़े के पहाड़ खड़े होते जा रहे हैं। दिल्ली रोड स्थित मंगतपुरम में कूड़े का पहाड़ खड़ा है। लोगों के विरोध के बाद निगम ने इस पर कूड़ा डालना बंद करके गांवड़ी में कूड़ा डालना शुरू किया था, लेकिन वहां भी लोगों के विरोध और काली नदी की वजह से कूड़ा डालना बंद कर लोहियानगर में कूड़ा डालना शुरू किया गया था जो अब तक जारी है। इसके अलावा कंकरखेड़ा क्षेत्र में कासमपुर पहाड़ी और नंगलाताशी में कूड़ा डंप किया जा रहा है। एनजीटी के आदेश पर केवल गांवड़ी के कूड़े को बैलेस्टिक सैपरेटर मशीन से रोजाना करीब 150 टन कूड़े को ही पृथक किया जा रहा है।
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कूड़ा हो रहा निस्तारण को मिला पैसा
14वें वित्त आयोग से गांवड़ी और लोहियानगर में लगने वाले बैलेस्टिक सैपरेटर प्लांट के लिए 16 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे। इन दोनों प्लांटों पर 8-8 करोड़ रुपये खर्च कर बैलेस्टिक सैपरेटर मशीन लगाई जानी थी। दिसंबर 2019 में गांवड़ी में तो मशीन लगा दी थी, लेकिन लोहियानगर में आज तक मशीन नहीं लग सकी है। उधर शासन ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए 15वें वित्त आयोग में 36 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। 14वे वित्त आयोग की रकम से केवल 2 करोड़ रुपये ही खर्च हुए हैं। 15वें और 14वें वित्त आयोग को मिलाकर निगम के पास कूड़ा निस्तारण के लिए 50 करोड़ रुपये हो गए हैं।
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