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Meerut News: रुकना नहीं, थकना नहीं... सबसे कठिन है डाक कांवड़ की राह
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- परिस्थिति कैसी भी हो, निर्धारित समय में गंगाजल लेकर शिवालय पहुंचते हैं शिवभक्त
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। श्रावण मास की कांवड़ यात्रा अब अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रही है। जलाभिषेक के लिए दो दिन शेष हैं और इसके साथ ही अब हाईवे पर डाक कांवड़ की रफ्तार बढ़ने लगेगी। हरिद्वार से गंगाजल लेकर शिवभक्त बिना रुके अपने गंतव्य की ओर दौड़ते नजर आएंगे। सड़कों पर कहीं बाइक के साथ तो कहीं वाहनों के साथ कदमताल करते शिवभक्तों का उत्साह देखते देखने को मिलेगा।
डाक कांवड़ को कांवड़ यात्रा का सबसे कठिन स्वरूप माना जाता है।
हस्तिनापुर निवासी आकाश ने बताया कि उनकी टीम यात्रा से करीब एक महीने पहले अभ्यास शुरू कर देती है। एक बार में पांच से सात किलोमीटर तक दौड़ने का अभ्यास किया जाता है। यात्रा के दौरान कुछ समय के लिए भी रुकना नहीं होता, इसलिए शरीर को लगातार दौड़ने के लिए तैयार किया जाता है। डाक कांवड़ में हरिद्वार से अपने शिवालय तक की दूरी निर्धारित समय में पूरी करनी होती है। हरिद्वार से हस्तिनापुर की दूरी करीब 135 किलोमीटर है।
चामरौध निवासी विपिन चौधरी ने बताया कि उनकी डाक कांवड़ के लिए करीब पांच घंटे का समय निर्धारित किया जाता है। टीम में करीब 20 युवा रहते हैं और इसी व्यवस्था से वे फिरोजपुर महादेव मंदिर तक पहुंचते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। श्रावण मास की कांवड़ यात्रा अब अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रही है। जलाभिषेक के लिए दो दिन शेष हैं और इसके साथ ही अब हाईवे पर डाक कांवड़ की रफ्तार बढ़ने लगेगी। हरिद्वार से गंगाजल लेकर शिवभक्त बिना रुके अपने गंतव्य की ओर दौड़ते नजर आएंगे। सड़कों पर कहीं बाइक के साथ तो कहीं वाहनों के साथ कदमताल करते शिवभक्तों का उत्साह देखते देखने को मिलेगा।
डाक कांवड़ को कांवड़ यात्रा का सबसे कठिन स्वरूप माना जाता है।
हस्तिनापुर निवासी आकाश ने बताया कि उनकी टीम यात्रा से करीब एक महीने पहले अभ्यास शुरू कर देती है। एक बार में पांच से सात किलोमीटर तक दौड़ने का अभ्यास किया जाता है। यात्रा के दौरान कुछ समय के लिए भी रुकना नहीं होता, इसलिए शरीर को लगातार दौड़ने के लिए तैयार किया जाता है। डाक कांवड़ में हरिद्वार से अपने शिवालय तक की दूरी निर्धारित समय में पूरी करनी होती है। हरिद्वार से हस्तिनापुर की दूरी करीब 135 किलोमीटर है।
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चामरौध निवासी विपिन चौधरी ने बताया कि उनकी डाक कांवड़ के लिए करीब पांच घंटे का समय निर्धारित किया जाता है। टीम में करीब 20 युवा रहते हैं और इसी व्यवस्था से वे फिरोजपुर महादेव मंदिर तक पहुंचते हैं।
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