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Meerut News: विशेषज्ञ तैनात नहीं, मशीन बंद, 30 बेड का अस्पताल खुद बीमार
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खरखोदा कस्बा निवासी विजय वर्मा का फोटो (संवाद)
- सर्जन, फिजिशियन की कमी, 60 तरह की जांच करने वाला हेल्थ एटीएम कमरे में बंद
संवाद न्यूज एजेंसी
खरखौदा। क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के उद्देश्य से बनाए गए 30 बेड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत खुद खराब है। अस्पताल में न तो सर्जन है और न ही फिजिशियन। जबकि केंद्र में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में गंभीर मरीजों को मेरठ और अन्य अस्पतालों के लिए रेफर किया जा रहा है।
स्वास्थ्य केंद्र में स्त्री रोग विशेषज्ञ, जनरल फिजिशियन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ व नेत्र रोग विशेषज्ञ सहित सभी पद खाली हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार स्वास्थ्य सुविधाएं कागजों तक सीमित होकर रह गई हैं। अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती और बंद पड़ी मशीनों को चालू कराने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। इससे क्षेत्र के हजारों मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस स्वास्थ्य केंद्र पर क्षेत्र के 38 गांवों की करीब 1.60 लाख जनता के स्वास्थ्य का जिम्मा है।
एक साल से कमरे में बंद है हेल्थ एटीएम
तीन वर्ष पहले मेरठ जिले के खरखौदा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहला हेल्थ एटीएम स्थापित किया गया था। तीन वर्षों में विभाग द्वारा मशीन को संचालित करने के लिए टेक्नीशियन नहीं मिल सका। एक कर्मचारी को ट्रेनिंग दिलाकर मशीन के संचालन के लिए तैयार किया गया लेकिन एक वर्ष पहले उसे भी विभाग से हटा दिया गया।
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गंभीर मरीजों को नहीं मिलता इलाज
खरखौदा क्षेत्र का अधिकतर हिस्सा हाईवे किनारे बसा है। इसी क्षेत्र में गंगा एक्सप्रेसवे का कुछ हिस्सा व मेरठ-बुलंदशहर राष्ट्रीय राजमार्ग का कुछ हिस्सा भी आता है। आए दिन इन मार्गाें पर दुर्घटना में घायल होने वाले मरीज के इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर कोई सुविधा नहीं है। घायलों को यहां से मेरठ मेडिकल व जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। समय पर इलाज न मिलने के कारण अधिकतर गंभीर घायल मरीज रास्ते में दम तोड़ देते हैं।
अस्पताल में स्वीकृत एवं खाली पदों की स्थिति
पद स्वीकृत वर्तमान
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ 1 0
जरनल फिजिशियन 5 0
महिला रोग विशेषज्ञ 1 1
हड्डी रोग विशेषज्ञ 1 0
बाल रोग विशेषज्ञ 1 0
नेत्र रोग विशेषज्ञ 1 0
रेडियोलॉजिस्ट 1 0
पैथोलॉजिस्ट 1 0
टेक्नीशियन 1 1
फार्मासिस्ट 2 2
वार्ड बॉय 4 0
स्टाफ नर्स 4 4
सफाई कर्मचारी 4 1
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करीब डेढ़ लाख की जनता इस अस्पताल के सहारे है, लेकिन कोई विशेषज्ञ न होने के कारण लोगों को प्राइवेट अस्पतालों का ही सहारा लेना पड़ता है। भौतिक सुविधाओं से अधिक अस्पताल कागजी कार्रवाई पर ही टिका है। -राजीव त्यागी, अध्यक्ष, व्यापार संघ, खरखौदा
गांव देहात के बुजुर्ग लोग मोतियाबिंद होने पर पहले इसी अस्पताल में इलाज कराते थे। बाद में उनका मेरठ मेडिकल में ऑपरेशन किया जाता था, लेकिन पिछले तीन वर्षों से आंखों की जांच के लिए इस अस्पताल में कोई व्यवस्था ही नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को प्राइवेट अस्पतालों का ही सहारा लेना पड़ता है। - विजय वर्मा, खरखौदा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सकों व कई कर्मचारियों की कमी है। समय-समय पर विभाग को लिखित रूप में अवगत कराया गया है। टेक्नीशियन की कमी के कारण हेल्थ एटीएम के संचालन में परेशानी आ रही है। -डॉ. प्रफुल्ल वर्मा, प्रभारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, खरखौदा
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संवाद न्यूज एजेंसी
खरखौदा। क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के उद्देश्य से बनाए गए 30 बेड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत खुद खराब है। अस्पताल में न तो सर्जन है और न ही फिजिशियन। जबकि केंद्र में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में गंभीर मरीजों को मेरठ और अन्य अस्पतालों के लिए रेफर किया जा रहा है।
स्वास्थ्य केंद्र में स्त्री रोग विशेषज्ञ, जनरल फिजिशियन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ व नेत्र रोग विशेषज्ञ सहित सभी पद खाली हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार स्वास्थ्य सुविधाएं कागजों तक सीमित होकर रह गई हैं। अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती और बंद पड़ी मशीनों को चालू कराने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। इससे क्षेत्र के हजारों मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस स्वास्थ्य केंद्र पर क्षेत्र के 38 गांवों की करीब 1.60 लाख जनता के स्वास्थ्य का जिम्मा है।
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एक साल से कमरे में बंद है हेल्थ एटीएम
तीन वर्ष पहले मेरठ जिले के खरखौदा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहला हेल्थ एटीएम स्थापित किया गया था। तीन वर्षों में विभाग द्वारा मशीन को संचालित करने के लिए टेक्नीशियन नहीं मिल सका। एक कर्मचारी को ट्रेनिंग दिलाकर मशीन के संचालन के लिए तैयार किया गया लेकिन एक वर्ष पहले उसे भी विभाग से हटा दिया गया।
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गंभीर मरीजों को नहीं मिलता इलाज
खरखौदा क्षेत्र का अधिकतर हिस्सा हाईवे किनारे बसा है। इसी क्षेत्र में गंगा एक्सप्रेसवे का कुछ हिस्सा व मेरठ-बुलंदशहर राष्ट्रीय राजमार्ग का कुछ हिस्सा भी आता है। आए दिन इन मार्गाें पर दुर्घटना में घायल होने वाले मरीज के इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर कोई सुविधा नहीं है। घायलों को यहां से मेरठ मेडिकल व जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। समय पर इलाज न मिलने के कारण अधिकतर गंभीर घायल मरीज रास्ते में दम तोड़ देते हैं।
अस्पताल में स्वीकृत एवं खाली पदों की स्थिति
पद स्वीकृत वर्तमान
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ 1 0
जरनल फिजिशियन 5 0
महिला रोग विशेषज्ञ 1 1
हड्डी रोग विशेषज्ञ 1 0
बाल रोग विशेषज्ञ 1 0
नेत्र रोग विशेषज्ञ 1 0
रेडियोलॉजिस्ट 1 0
पैथोलॉजिस्ट 1 0
टेक्नीशियन 1 1
फार्मासिस्ट 2 2
वार्ड बॉय 4 0
स्टाफ नर्स 4 4
सफाई कर्मचारी 4 1
करीब डेढ़ लाख की जनता इस अस्पताल के सहारे है, लेकिन कोई विशेषज्ञ न होने के कारण लोगों को प्राइवेट अस्पतालों का ही सहारा लेना पड़ता है। भौतिक सुविधाओं से अधिक अस्पताल कागजी कार्रवाई पर ही टिका है। -राजीव त्यागी, अध्यक्ष, व्यापार संघ, खरखौदा
गांव देहात के बुजुर्ग लोग मोतियाबिंद होने पर पहले इसी अस्पताल में इलाज कराते थे। बाद में उनका मेरठ मेडिकल में ऑपरेशन किया जाता था, लेकिन पिछले तीन वर्षों से आंखों की जांच के लिए इस अस्पताल में कोई व्यवस्था ही नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को प्राइवेट अस्पतालों का ही सहारा लेना पड़ता है। - विजय वर्मा, खरखौदा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सकों व कई कर्मचारियों की कमी है। समय-समय पर विभाग को लिखित रूप में अवगत कराया गया है। टेक्नीशियन की कमी के कारण हेल्थ एटीएम के संचालन में परेशानी आ रही है। -डॉ. प्रफुल्ल वर्मा, प्रभारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, खरखौदा

खरखोदा कस्बा निवासी विजय वर्मा का फोटो (संवाद)

खरखोदा कस्बा निवासी विजय वर्मा का फोटो (संवाद)