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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   No facilities in Meerut city: City buses stop at 8 o'clock, no sewer line in half the city,

शहर बढ़ा सुविधाएं नहीं: 20 साल में नहीं मिले पांच बस अड्डे और रिंग रोड, आधे शहर में सीवर लाइन तक नहीं

Wed, 01 Dec 2021 11:27 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 01 Dec 2021 11:27 AM IST
सार

दो दशक में 305 गांव शहर का हिस्सा बन गए। दिल्ली-दून बाईपास, बिजली बंबा बाईपास, मवाना रोड और गढ़ रोड पर विस्तार लेते नए शहर में करीब 10 लाख लोग बस गए। पल्लवरपुरम, गंगानगर, शताब्दीनगर, वेदव्यासपुरी,जागृति विहार एक्सटेंशन जैसी विशाल आवासीय योजनाएं विस्तार लेती गईं, लेकिन आबादी की तुलना में यहां सुविधाएं नहीं बढ़ीं। रात आठ बजे के बाद सिटी बसें नहीं मिलतीं। बीस वर्ष में कोई नया डाकघर नहीं खुला। अभी 1000 किलोमीटर लंबी सीवर लाइन की जरूरत है। 
 

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No facilities in Meerut city: City buses stop at 8 o'clock, no sewer line in half the city,
Meerut city - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नए मेरठ शहर में 2021 तक पांच नए बस अड्डे बनाए जाने थे। मवाना रोड पर सलारपुर-जलालपुर, हापुड़ रोड पर रैसना, गढ़ रोड पर कमालपुर, बागपत रोड पर मलियाना और रुडकी रोड पर पल्लवपुरम में नए बस अड्डे प्रस्तावित हुए पर बने नहीं। बागपत रोड पर पांचली खुर्द और गढ़ रोड पर हसनपुर कदीम में नए बस अड्डे बनने थे। यह योजना फाइलों में ही दम तोड़ गई। 

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रिंग रोड फाइलों में कैद, मुसीबत झेल रहे लोग 
शहर के विस्तार को देखते हुए महायोजना में इनर रिंग रोड और आउटर रिंग रोड करीब दो दशक पहले ही प्लान हुईं। शहर के चारों तरफ हाईवे और एक्सप्रेसवे का जाल बिछ चुका है। एनएच-58 बाईपास पर ही सुभारती और शोभित विश्वविद्यालय हैं।
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दौराला से परतापुर के बीच एनएच-58 पर ही 20 से ज्यादा इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट एवं बीएड कॉलेज भी हैं। गढ़ रोड, मवाना रोड, रुडकी रोड, दिल्ली रोड को दिल्ली दून-हाईवे से जोड़ने के लिए रिंग रोड बन जाती तो नए शहर की करीब दस लाख आबादी का समय और पैसा दोनों ही बचते। रिंग रोड न होने की वजह से ही शहर के अंदर जाम के हालात रहते हैं। 
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अब 1064 वर्ग किमी की महायोजना-2031
अगले दस वर्षों के लिए एक बार फिर एमडीए महायोजना-2031 को लागू कराने की तैयारी के लिए अंतिम चरणों में पहुंच गया है। इस बार महायोजना का क्षेत्रफल 600 वर्ग किमी अधिक होकर 1064 वर्ग किमी हो गया है। महायोजना-2021 में क्षेत्रफल 550 वर्ग किमी था। इस बार भी नौ अर्बन सेंटर और 305 नए गांवों को शामिल किया गया है। एमडीए और नगर निगम अभी महायोजना 2021 के तहत विस्तारित दौराला महायोजना के गांवों में ही सुविधाएं नहीं दे सके हैं।

नई कॉलोनियों में सड़कों का हाल खराब 
गंगानगर, पल्लवपुरम, शताब्दीनगर, वेदव्यासपुरी, रक्षापुरम, विकास विहार, मेजर ध्यानचंद नगर, सैनिक विहार, पांडवनगर , डिफेंस एंक्लेव, श्रद्धापुरी, लोहियानगर, आलोक विहार जैसी नई कॉलोनियों में सड़कों की हालत भी खराब है। 
20 वर्ष पहले 120 सिटी बसें, अब सिर्फ 80 
 बीस साल पहले शहर में120 प्राइवेट सिटी बसों का संचालन होता था लेकिन अब रोडवेज की मात्र 80 सीएनजी बसें चल रही हैं। बसों के अभाव में इन बीस सालों में सड़कों पर अवैध टैंपों और ई-रिक्शा बढ़े हैं। 

सड़कों पर दबाव: 23 गुना बढ़े वाहन
वर्ष 2001 में जिले में करीब 40 हजार वाहन पंजीकृत थे। अब यह संख्या 9.30 लाख तक पहुंच गई है। यानि वाहनों की संख्या में 23 गुना से भी ज्यादा वृद्धि हुई है। 
  
2001 में शहर की आबादी:11 लाख 70 हजार 985
2011 में शहर की आबादी: 17 लाख 59 हजार 182 
2021 तक शहर की अनुमानित आबादी: 20 लाख

जनगणना के अनुसार घरों का आंकड़ा
वर्ष 2001 - दो लाख 28 हजार 67
वर्ष 2011 - तीन लाख नौ हजार 467
 
साक्षरता दर प्रतिशत में
वर्ष 2001 - 67.50 प्रतिशत
वर्ष 2011 - 75.66 प्रतिशत
 
नहीं बढ़ी डाकघरों की संख्या
बीते  20  वर्ष में डाकघरों की संख्या में इजाफा नहीं हुआ है। मेरठ-बागपत में वर्ष 2001 में 399 डाकघर थे। आज भी यह संख्या 399 ही है। 
जिले में डाक घर             वर्ष 2001                     वर्ष 2021
हेड पोस्ट ऑफिस              3                                3
उप डाकघर                    79                              79
ब्रांच ऑफिस                  317                            317 

शहर में 1000 किलोमीटर सीवर लाइन की जरूरत 
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 310 एमएलडी सीवर निकलता है। इसके लिए जल निगम ने 72 एमएलडी का प्लांट जागृति विहार में  है। इसके अलावा 220 एमएलडी क्षमता का प्लांट काली नदी किनारे लगना है। शहर में 1800 किमी की सीवर लाइन होनी चाहिए, लेकिन अब तक सिर्फ 800 किमी लाइन ही डाली गई है। 

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