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पेराई सत्र नजदीक, सिस्टम में फीड नहीं हो सका गन्ना सर्वे डाटा

Fri, 11 Oct 2019 02:18 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 11 Oct 2019 02:18 AM IST
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no data feed in computer
शुगर मिल।
पेराई सत्र नजदीक, सिस्टम में फीड नहीं हो सका गन्ना सर्वे डाटा
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मेरठ। प्रदेश का गन्ना पेराई सत्र 2019-20 नजदीक आ गया है, लेकिन अभी तक शत प्रतिशत गन्ना सर्वे सिस्टम में अपलोड नहीं हो सका है। गन्ना समितियों को समय से कंप्यूटर सिस्टम और आउटसोर्सिंग मैन पावर नहीं मिलने का खामियाजा विभाग के साथ किसानों को भी भुगतना पड़ेगा। वहीं मोदीनगर शुगर मिल ने गन्ना सुरक्षण आदेश जारी होने से पहले ही 15 अक्तूबर से पेराई शुरू करने का एलान कर विभाग के होश उड़ा दिए हैं। इस मिल ने अभी तक पिछले सत्र का भी गन्ना बकाया भुगतान नहीं किया है। इससे जुड़े किसानों समय से भुगतान करने वाली मिल को गन्ना डायवर्ट करने की मांग विभाग से की है।
गन्ना खरीद एवं आपूर्ति के लिए गन्ना विभाग और उसकी समितियां किसान और शुगर इंडस्ट्री के बीच सेतु का काम करती हैं। छह महीने के गन्ना सीजन के लिए किसानों को उसके गन्ने के सापेक्ष पर्ची का वितरण किया जाता है। इसके लिए गन्ना सर्वे कर किसान को एक पर्ची कैलेंडर दिया जाता है। इसके हिसाब से ही पर्ची का वितरण होता है, लेकिन व्यवस्था में पारदर्शिता न होने के चलते सबसे ज्यादा आरोप पर्ची वितरण में ही लगाए जाते हैं। गन्ना माफिया और तेज तर्रार किसान जहां सेटिंग के जरिये गन्ना रकबा बढ़वाकर पर्ची बढ़वा लेते हैं, वहीं कैलेंडर में भी पर्चियों को ऊपर लगवा लेते हैं। इन शिकायतों और आरोपों को खत्म करने के लिए विभाग ने इस बार इंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ईआरपी) का सहारा लिया है। इसका ठेका एमिटी सॉफ्टवेयर कंपनी को दिया गया है।
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क्या है ईआरपी
इंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ईआरपी) यानि उद्यम संसाधन योजना। ईआरपी एक ऐसा बिजनेस मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर है जिसका उपयोग किसी भी इंडस्ट्री या संस्थान में होने वाले लगभग सभी छोटे बड़े कामों को पूरा करने के लिए किया जाता है। जिसका उपयोग कोई भी कंपनी अपने बिजनेस को मैनेज करने के लिए करती है। इससे कोई भी काम बहुत जल्द पूरा हो जाता है।
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शत प्रतिशत डेटा नहीं हो सका फीड
गन्ने की उत्पादन योजना, विकास, तौल, बिक्री और विपणन से जुडे़ तमाम पहलुओं का एक डेटाबेस एप्लीकेशन तैयार करने के लिए सभी गन्ना समितियों को गन्ना सर्वे का पूरा डेटा ईआरपी में अपलोड करना था। इसके लिए विभाग को समितियों को जरूरत अनुसार कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और आउटसोर्स के जरिये कंप्यूटर आपरेटर मुहैया कराने थे, लेकिन इस काम में ढील बरते जाने और साइट के बार-बार हैंग होने और एरर आने से यह कार्य शत प्रतिशत पूरा नहीं हो सका है। विभाग की डेडलाइन अनुसार पेराई सत्र शुरू होने में केवल 20 दिन बाकी बचे हैं। अपनी कमियों को छिपाने के लिए विभाग ने मिलों के सिस्टम और मैन पावर का भी सहारा लिया है।
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जल्द होगा अपलोड
हमारे यहां लगभग पूरा डेटा सिस्टम पर अपलोड कर दिया गया है। जो कुछ बचा है वह भी जल्द पूरा हो जाएगा। सुरक्षण आदेश से पहले सब कुछ दुरुस्त हो जाएगा।
-राजेश मिश्र, उप गन्ना आयुक्त मेरठ परिक्षेत्र
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