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Meerut News: बूढ़ी गंगा मामले में एनजीटी सख्त, सिंचाई विभाग की रिपोर्ट पर उठाए सवाल
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- एनएमसीजी महानिदेशक करेंगे स्वतंत्र जांच, 16 अक्तूबर तक देनी होगी रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर (मेरठ)। बूढ़ी गंगा नदी के उद्गम और उसके वास्तविक प्रवाह मार्ग को लेकर चल रहे मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सुनवाई के दौरान अहम आदेश जारी किए हैं। न्यायाधिकरण ने सिंचाई विभाग की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए उसे पर्याप्त नहीं माना और मामले की स्वतंत्र जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता प्रियंक भारती ने न्यायाधिकरण को बताया कि सिंचाई विभाग ने बूढ़ी गंगा नदी का उद्गम गलत दर्शाया है। उन्होंने दावा किया कि उनके पास करीब 200 वर्ष पुराने प्रामाणिक नक्शे तथा अन्य ऐतिहासिक अभिलेख उपलब्ध हैं। जिनसे नदी के वास्तविक स्वरूप और प्रवाह मार्ग की पुष्टि होती है।
एनजीटी ने प्रियंक भारती को निर्देश दिया कि वह एक सप्ताह के भीतर सभी पुराने नक्शे एवं संबंधित दस्तावेज राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के महानिदेशक के समक्ष प्रस्तुत करें। न्यायाधिकरण ने एनएमसीजी के महानिदेशक को निर्देशित किया है कि वह उपलब्ध ऐतिहासिक अभिलेखों, पुराने मानचित्रों और अन्य साक्ष्यों का वैज्ञानिक परीक्षण कर बूढ़ी गंगा के वास्तविक उद्गम से लेकर गंगा अथवा उसकी सहायक नदी में विलय तक के संपूर्ण प्रवाह मार्ग का निर्धारण करें। एनजीटी ने कहा कि जांच पूरी कर शपथपत्र के साथ विस्तृत रिपोर्ट 16 अक्तूबर तक न्यायाधिकरण के समक्ष प्रस्तुत की जाए।
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हस्तिनापुर (मेरठ)। बूढ़ी गंगा नदी के उद्गम और उसके वास्तविक प्रवाह मार्ग को लेकर चल रहे मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सुनवाई के दौरान अहम आदेश जारी किए हैं। न्यायाधिकरण ने सिंचाई विभाग की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए उसे पर्याप्त नहीं माना और मामले की स्वतंत्र जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता प्रियंक भारती ने न्यायाधिकरण को बताया कि सिंचाई विभाग ने बूढ़ी गंगा नदी का उद्गम गलत दर्शाया है। उन्होंने दावा किया कि उनके पास करीब 200 वर्ष पुराने प्रामाणिक नक्शे तथा अन्य ऐतिहासिक अभिलेख उपलब्ध हैं। जिनसे नदी के वास्तविक स्वरूप और प्रवाह मार्ग की पुष्टि होती है।
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एनजीटी ने प्रियंक भारती को निर्देश दिया कि वह एक सप्ताह के भीतर सभी पुराने नक्शे एवं संबंधित दस्तावेज राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के महानिदेशक के समक्ष प्रस्तुत करें। न्यायाधिकरण ने एनएमसीजी के महानिदेशक को निर्देशित किया है कि वह उपलब्ध ऐतिहासिक अभिलेखों, पुराने मानचित्रों और अन्य साक्ष्यों का वैज्ञानिक परीक्षण कर बूढ़ी गंगा के वास्तविक उद्गम से लेकर गंगा अथवा उसकी सहायक नदी में विलय तक के संपूर्ण प्रवाह मार्ग का निर्धारण करें। एनजीटी ने कहा कि जांच पूरी कर शपथपत्र के साथ विस्तृत रिपोर्ट 16 अक्तूबर तक न्यायाधिकरण के समक्ष प्रस्तुत की जाए।
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