किसानों के लिए वरदान बनेगी पूसा 31 सरसों, कोलेस्ट्रॉल से मिलेगी निजात, आमदनी भी होगी दोगुनी
भारतीय समाज चटपटे खाने का शौकिन माना जाता है। लेकिन अब अनियमित रहन सहन व व्यायाम से दूरी बीमारी का कारण बन रही है। अनेक प्रकार के तेल से बनने वाला खाना भी बीमारियों को जन्म दे रहा है। यह केलस्ट्रोल बढ़ाने का मुख्य कारण बन रहा है। बढ़ा कोलेस्ट्रॉल चटपटे खाने से दूरी बनाने को मजबूर कर रहा है।
सभी लजीज खाने का स्वाद भी ले सकें और उनका कोलेस्ट्रॉल भी न बढ़े इस सोच के साथ वैज् ञानिकों ने पूसा सरसो 31 तैयार की। जिले में इस प्रजाति का बीज किसानों को बोने के लिए दिया गया है। इस प्रजाति में हानिकारक तत्व बहुत कम हैं। इसके अधिक प्रयोग से भी मानव स्वास्थ्य को नुकसान नहीं होगा। इसकी खेती पर जिले में निगरानी रखी जा रही है। इस साल खेतों से पैदा होने वाला बीज जिले के किसानों को बड़े पैमाने पर वितरित किया जाएगा।
सरसो में दो तत्व इरूसिक एसिड व ग्लूकोसिनोलेट्स पाए जाते हैं। सामान्य सरसों में इरूसिक एसिड की मात्रा 40 प्रतिशत तक तथा ग्लूकोसिनोलेट्स की मात्रा 120 पीपीएम(पार्टस पर मिलियन) होता है। यह तत्व इतनी संख्या में केलस्ट्रोल बढ़ाते हैं। पूसा सरसो 31 में इरूसिक एसिड की मात्रा दो प्रतिशत से भी कम है। ग्लूकोसिनोलेट्स की संख्या 30 पीपीएम है।
पैदावार ज्यादा
सामान्य सरसो एक बीघा में सवा क्विंटल तक निकलती है। लेकिन पूसा सरसो 31 की पैदावार दो क्विंटल प्रति बीघा से भी अधिक है। यह किसानों के लिए बंपर पैदावार वाली प्रजाति है।
जा सकती है जान
केलस्ट्रोल बढ़ने से ब्लड प्रेशन बढ़ने लगता है। इससे हार्ट अटैक होने का भी खतरा रहता है। इसमे जरा सी लापरवाही घातक साबित हो सकती है।
कृषि वैज्ञानिक डा.केके सिंह के अनुसार पूसा सरसो 31 प्रजाति की पैदावार अधिक है। अपने गुणों के कारण यह आम सरसो से महंगी भी बिकेगी।
संतुलित खाना लें
वरिष्ठ फिजिशियन डा.शिरीष कुमार के अनुसार केलस्ट्रोल न बढ़ाने वाला खाना आज के समय की जरूरत है। शारीरिक श्रम न करने वालों का केलस्ट्रोल न बढ़ाने वाला खाना लेना चाहिए।
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