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शहर में नया गृहकर लागू नहीं, पुराने बिल पर वसूली करेगा नगर निगम
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मेरठ। महानगर में गृहकर वसूली करने की तस्वीर भी निगम की बैठक में साफ हो गई। भ्रष्टाचार के आरोप से घिरे जीआईएस सर्वे के आधार पर नया गृहकर अभी लागू नहीं होगा। पुराने गृहकर के बिल वितरित करके ही वसूली होगी। वर्ष 2024-25 में बढ़ी दरों को नहीं लिया जाएगा। शहर में छूटे हुए करीब एक लाख भवनों से गृहकर की वसूली और घर-घर स्वकर प्रप्रत्र भवन स्वामियों को बांटे जाएं। इसके बाद ही नए गृहकर पर वसूली के लिए सदन में बात करेंगे। भाजपा पार्षद अनुज वशिष्ठ का यह प्रस्ताव सदन में पास कर दिया गया।
नए गृहकर या फिर पुराने गृहकर के आधार पर वसूली होगी। इसको लेकर निगम के अधिकारी और भवन स्वामियों में असमंजस की स्थिति चार-पांच महीने से बनी हुई थी। निगम की बैठक में बुधवार को इस पर गंभीर चर्चा हुई। भाजपा पार्षदों ने कहा कि नए गृहकर में बड़ा गड़बड़झाला है। पार्षद अनुज वशिष्ठ ने कहा कि सरकार ने भवनों का जीआईएस सर्वे कराया था। इसका पूरा सदन समर्थन करता है। लेकिन पहले जिन भवनों से गृहकर नहीं लिया जाता उनसे वसूली करना निगम सुनिश्चित कर लें। भवनों का सत्यापन कर लें। दो साल का बढ़ा हुआ गृहकर नहीं देंगे। पुराने गृहकर के आधार पर निगम वसूली करे।
स्वकर प्रपत्र प्रणाली लागू करने और सदन में दिए प्रस्ताव पर निगम काम करे। इसके बाद नए गृहकर पर सदन में फिर से चर्चा करेंगे। इस पर महापौर ने भी अपनी स्वीकृति दी है। पार्षद अनिल वर्मा ने भी शासन द्वारा घटाए गए नाम परिवर्तन शुल्क को निगम तुरंत लागू करें। शासन ने जिस दिन नाम परिवर्तन शुल्क 50 हजार से 10 हजार किया है। उसको निगम उसी तारीख से माना सुनिश्चित कर लें। जिन भवन स्वामियों से अतिरिक्त पैसा लिया गया है, उनको तुरंत वापस किया जाए या फिर गृहकर में शामिल करें।
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15 हजार स्ट्रीट लाइट गुम, अनुबंध निरस्त करने का प्रस्ताव
मेरठ। पार्षद अनुज वशिष्ठ ने स्ट्रीट लाइट में घोटाला होने का आरोप लगाकर निगम के अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया। पथ प्रकाश की वरिष्ठ प्रभारी लवी त्रिपाठी से पूछा कि शहर में ईईएसएल कंपनी के साथ निगम ने 72 हजार लाइट का अनुबंध किया था। 72 हजार लाइट की मरम्मत का ही निगम तीन साल से भुगतान कर रहा रहा है। अब 11 महीने पहले निगम ने अवध सोल्यूशन कंपनी से 57 हजार लाइट का अनुबंध किया है। मरम्मत के नाम पर 12 लाख हर महीने निगम पैसा देता है। 15 हजार स्ट्रीट लाइट कहां चली गईं। जबकि दो साल में 5 हजार लाइट निगम, सांसद, विधायक की निधि से अलग लाइट लगी हैं। कुल शहर में 90 हजार लाइट हैं। करीब एक घंटा पथ प्रकाश से संबंधित अधिकारियों को सदन में खड़ा रखा गया। वरिष्ठ प्रभारी, लाइट इंस्पेक्टर सहित कोई भी कर्मचारी उक्त पार्षद का एक भी सवाल का जवाब नहीं दे पाया। पार्षद ने कहा कि यह घोटाला है। निगम ने जो अनुबंध किया, उसको तुरंत निरस्त करें। सदन ने इस प्रस्ताव को पास कर दिया। महापौर ने एक समिति बनाकर जांच कराने की बात कही है। पार्षद सुमित शर्मा, राजीव काले और पंकज गोयल ने कहा कि कई जगह स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी हैं। दिवाली से पहले लाइटों को ठीक कराकर शहर जगमग कराया जाए।
सदन से पहले सफाई कर्मचारियों का हंगामा
मेरठ। बैठक से पहले ही सफाई कर्मचारियों ने हंगामा कर महापौर व नगर आयुक्त का घेराव किया। सफाई कर्मचारी संघ अध्यक्ष विनेश मनोठिया ने कहा कि सरकार द्वारा गठित आउटसोर्सिंग बोर्ड उन्हें मंजूर नहीं है। वे आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। महापौर ने कर्मचारियों को आश्वस्त किया कि ये सरकार का नीतिगत फैसला है। इसे लखनऊ स्तर से तय किया जाएगा। निगम की ओर से शासन को पत्र भेजने की बात कही गई। इसके बाद कर्मचारी शांत हुए और बैठक शुरू हो सकी।
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नए गृहकर या फिर पुराने गृहकर के आधार पर वसूली होगी। इसको लेकर निगम के अधिकारी और भवन स्वामियों में असमंजस की स्थिति चार-पांच महीने से बनी हुई थी। निगम की बैठक में बुधवार को इस पर गंभीर चर्चा हुई। भाजपा पार्षदों ने कहा कि नए गृहकर में बड़ा गड़बड़झाला है। पार्षद अनुज वशिष्ठ ने कहा कि सरकार ने भवनों का जीआईएस सर्वे कराया था। इसका पूरा सदन समर्थन करता है। लेकिन पहले जिन भवनों से गृहकर नहीं लिया जाता उनसे वसूली करना निगम सुनिश्चित कर लें। भवनों का सत्यापन कर लें। दो साल का बढ़ा हुआ गृहकर नहीं देंगे। पुराने गृहकर के आधार पर निगम वसूली करे।
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स्वकर प्रपत्र प्रणाली लागू करने और सदन में दिए प्रस्ताव पर निगम काम करे। इसके बाद नए गृहकर पर सदन में फिर से चर्चा करेंगे। इस पर महापौर ने भी अपनी स्वीकृति दी है। पार्षद अनिल वर्मा ने भी शासन द्वारा घटाए गए नाम परिवर्तन शुल्क को निगम तुरंत लागू करें। शासन ने जिस दिन नाम परिवर्तन शुल्क 50 हजार से 10 हजार किया है। उसको निगम उसी तारीख से माना सुनिश्चित कर लें। जिन भवन स्वामियों से अतिरिक्त पैसा लिया गया है, उनको तुरंत वापस किया जाए या फिर गृहकर में शामिल करें।
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15 हजार स्ट्रीट लाइट गुम, अनुबंध निरस्त करने का प्रस्ताव
मेरठ। पार्षद अनुज वशिष्ठ ने स्ट्रीट लाइट में घोटाला होने का आरोप लगाकर निगम के अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया। पथ प्रकाश की वरिष्ठ प्रभारी लवी त्रिपाठी से पूछा कि शहर में ईईएसएल कंपनी के साथ निगम ने 72 हजार लाइट का अनुबंध किया था। 72 हजार लाइट की मरम्मत का ही निगम तीन साल से भुगतान कर रहा रहा है। अब 11 महीने पहले निगम ने अवध सोल्यूशन कंपनी से 57 हजार लाइट का अनुबंध किया है। मरम्मत के नाम पर 12 लाख हर महीने निगम पैसा देता है। 15 हजार स्ट्रीट लाइट कहां चली गईं। जबकि दो साल में 5 हजार लाइट निगम, सांसद, विधायक की निधि से अलग लाइट लगी हैं। कुल शहर में 90 हजार लाइट हैं। करीब एक घंटा पथ प्रकाश से संबंधित अधिकारियों को सदन में खड़ा रखा गया। वरिष्ठ प्रभारी, लाइट इंस्पेक्टर सहित कोई भी कर्मचारी उक्त पार्षद का एक भी सवाल का जवाब नहीं दे पाया। पार्षद ने कहा कि यह घोटाला है। निगम ने जो अनुबंध किया, उसको तुरंत निरस्त करें। सदन ने इस प्रस्ताव को पास कर दिया। महापौर ने एक समिति बनाकर जांच कराने की बात कही है। पार्षद सुमित शर्मा, राजीव काले और पंकज गोयल ने कहा कि कई जगह स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी हैं। दिवाली से पहले लाइटों को ठीक कराकर शहर जगमग कराया जाए।
सदन से पहले सफाई कर्मचारियों का हंगामा
मेरठ। बैठक से पहले ही सफाई कर्मचारियों ने हंगामा कर महापौर व नगर आयुक्त का घेराव किया। सफाई कर्मचारी संघ अध्यक्ष विनेश मनोठिया ने कहा कि सरकार द्वारा गठित आउटसोर्सिंग बोर्ड उन्हें मंजूर नहीं है। वे आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। महापौर ने कर्मचारियों को आश्वस्त किया कि ये सरकार का नीतिगत फैसला है। इसे लखनऊ स्तर से तय किया जाएगा। निगम की ओर से शासन को पत्र भेजने की बात कही गई। इसके बाद कर्मचारी शांत हुए और बैठक शुरू हो सकी।