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Meerut News: नई नस्ल की गाय-भैंस हो रहीं तैयार, दोगुना देंगी दूध

Thu, 28 Nov 2024 02:32 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 28 Nov 2024 02:32 AM IST
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New breed of cows and buffaloes are being prepared, will give double the milk
मेरठ। केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान नई नस्ल की गाय और भैंस तैयार कर रहा है। जो आज की नस्ल के पशुओं से दोगुना दूध देंगी। बुधवार को केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान में एनिमल फिजियोलॉजिस्ट ऑफ इंडिया सोसायटी के तत्वावधान में शुरू हुए तीन दिवसीय 32वें वार्षिक सम्मेलन और संगोष्ठी में डॉ. एके मोहंती ने यह बात कही। उन्होंने चूहे, छिपकली, मछली, बकरी, भैंस, ऊंट, गोवंश आदि सभी जीव जंतुओं पर किए गए शोध पर मिली उपलब्धियां और भविष्य की उम्मीदें बताईं।
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केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान के निदेशक मोहंती ने कहा कि पशुधन उत्पादकता बढ़ाने और किसानों के कल्याण के लिए ओमिक्स प्रौद्योगिकियों की परिवर्तनकारी भूमिका है। देश के संस्थानों में गाय और भैंस पर शोध किए जा रहे हैं। डॉ. बीएस प्रकाश ने शारीरिक विज्ञान और ओमिक्स के एकीकरण की मौजूदा चुनौतियों के समाधान पर सुझाव रखे। डॉ. सुनील कुमार ने समग्र विकास के लिए पशु विज्ञान को प्राकृतिक खेती प्रथाओं के साथ जोड़ने पर जोर दिया। डॉ. एम एल मदान ने युवा शोधकर्ताओं को प्रेरित करते हुए उन्हें केंद्रित रहने, चुनौतियों को स्वीकार करने और समर्पण के साथ काम करने का आह्वान किया।
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एक गाय, भैंस के अंडों से 10-10 बच्चे हो रहे पैदा
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व उपमहानिदेशक एवं पं. दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विवि मथुरा के पूर्व कुलपति पद्मश्री डॉ. मोतीलाल मदान ने कहा कि पहले गाय 14 माह में केवल एक बच्चा देती थी, लेकिन अब नई तकनीक से एक गाय और भैंस के अंडों से 10-10 बच्चे पैदा हो रहे हैं। वह भी अच्छी नस्ल के अधिक दूध देने वाले बच्चे। हालांकि गाय से पैदा हो रहे बैल यानी सांड की उपयोगिता को लेकर सरकारी स्तर पर काम किए जाने की जरूरत है।
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छावनी क्षेत्र स्थित केन्द्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान में डॉ. मोतीलाल मदान ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहा कि देश के अनुसंधान संस्थानों में नई तकनीक से बड़ा कार्य चल रहा है। इसका लाभ किसानों की आय और उत्पादन पर भी दिखेगा। देश के संस्थानों में गाय और सांड को उन्नत बनाने का काम चल रहा है, ताकि देश में दूध की भी कमी न रहे। उन्होंने कहा कि हमारे देश के नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट में विश्व का पहला ऐसा शोध हुआ, जिसमें परखनली के माध्यम से भैंस के गर्भ में अंडा प्रत्यारोपित करके बच्चा पैदा किया गया। भैंस का दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में बड़ा योगदान है। इस दृष्टि से हमने भैंस की उन्नत किस्म में शोध किया।


जानवरों से अधूरा प्यार मत कीजिए
डा. मदान ने कहा कि गोवंश हो या फिर भैंस। इनको कमरे में बंद करके नहीं रखा जा सकता है। यह न जानवर के लिए ठीक है और न अर्थव्यवस्था के लिए। किसानों को जानवरों से भरपूर प्यार करना चाहिए। कुछ पशुपालक अधूरा प्यार करते हैं। जब तक पशु दूध देता है, उनकी आय का साधन बनता है तो प्यार करते हैं अन्यथा बाद में बेसहारा छोड़ देते हैं।
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