नरक चतुर्दशी आज: शाम को होगा यम दीपदान; अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति के लिए विशेष विधान
मेरठ में सात नवंबर को नरक चतुर्दशी मनाई जाएगी। छोटी दिवाली पर यमराज की पूजा, तर्पण और शाम को दीपदान का विशेष महत्व है।
विस्तार
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर शनिवार, सात नवंबर को नरक चतुर्दशी का पर्व मनाया जाएगा। इसे छोटी दिवाली, रूप चौदस और नरक चौदस के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजा करने से पापों से मुक्ति मिलती है और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। शाम को यमराज के निमित्त दीपदान करने का विशेष विधान है।
भगवान श्रीकृष्ण ने किया था नरकासुर का वध
इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारी नरकासुर और मुरासुर का वध किया था। इसी कारण उन्हें मुरारी कहा जाता है। नरकासुर के वध की खुशी में नरक चतुर्दशी मनाने की परंपरा शुरू हुई।
यह भी पढ़ें: मेरठ में कोहरे का कहर: हाईवे पर खड़े ट्रक में घुसी रोडवेज बस, 22 वर्षीय महिला परिचालक की मौत
सूर्योदय से पहले स्नान का विधान
ज्योतिषाचार्य विनोद त्यागी के अनुसार, इस दिन सूर्योदय से पहले शरीर पर तेल और उबटन लगाकर स्नान करने की परंपरा है। स्नान के पानी में अपामार्ग की पत्तियां डालने का भी विधान बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से पापों का नाश होता है।
यमराज की पूजा और तर्पण का विशेष महत्व
आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि नरक चतुर्दशी पर यमराज की पूजा और यम तर्पण का विशेष महत्व है। इस दिन दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तिल मिश्रित जल से यमराज के नामों का स्मरण करते हुए तिलांजलि दी जाती है। मान्यता है कि इससे वर्षभर के पापों का नाश होता है और अकाल मृत्यु का संकट टलता है।
शाम को घर के बाहर जलाएं दीपक
नरक चतुर्दशी की शाम को घर के बाहर और चारों दिशाओं में दीपक जलाकर यमराज के निमित्त दीपदान किया जाता है। इसे यम दीपदान कहते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से परिवार पर यमराज की कृपा बनी रहती है और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।