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नमामि गंगे मिशन : फाइलों में कैद 682 करोड़ की योजना, दो साल पहले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया था शिलान्यास 

Mon, 26 Jul 2021 02:48 PM IST
Dimple Sirohi राजकुमार सैनी, अमर उजाला, मेरठ
राजकुमार सैनी, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 26 Jul 2021 02:48 PM IST
सार

मेरठ महानगर में ओडियन, आबूनाला सहित 350 से अधिक नाले हैं। सभी छोटे नालों का पानी ओडियन, आबूनाला प्रथम और आबूनाला द्वितीय से काली नदी तक पहुंचता है। इन तीनों नालों के पानी को स्वच्छ करने की योजना बनाई गई थी। उम्मीद थी कि 2020 तक शहर के नालों में गंदा पानी नहीं बहेगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

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Namami Gange Mission: Plan of approx seven crores imprisoned in files in Meerut
नमामि गंगे - फोटो : Amar Ujala Meerut

विस्तार

नमामि गंगे मिशन के तहत शहर में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाया जाना है। दो साल पहले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इसका शिलान्यास कर शहरवासियों को बड़े-बड़ेे सपने दिखाए थे, लेकिन आज तक 682 करोड़ की यह योजना फाइलों में कैद है। नगर निगम के अधिकारियों का दावा है कि प्रोजेक्ट के लिए जमीन तलाश ली गई है। डीपीआर बनाकर शासन को भेजी जा चुकी है, लेकिन वहां से अभी कोई निर्देश नहीं आया है।

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शहर के नालों की गंदगी काली नदी में पहुंच रही है। इससे गंगा भी प्रभावित हो रही है। गंगा की स्वच्छता के लिए भारत सरकार ने नमामि गंगे मिशन चलाया। नालों से आने वाली गंदगी को एसटीपी में साफ करने और साफ पानी नदियों तक पहुंचाने का निर्णय लिया गया। केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय ने काली नदी के पास कमालपुर के जंगल में 214 एमएलडी क्षमता का प्लांट लगाने की योजना तैयार की है। 
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ओडियन और आबू नाले का साफ होना है पानी 
महानगर में ओडियन, आबूनाला सहित 350 से अधिक नाले हैं। सभी छोटे नालों का पानी ओडियन, आबूनाला प्रथम और आबूनाला द्वितीय से काली नदी तक पहुंचता है। इन तीनों नालों के पानी को स्वच्छ करने की योजना बनाई गई थी। उम्मीद थी कि 2020 तक शहर के नालों में गंदा पानी नहीं बहेगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

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20 फरवरी 2019 को किया था शिलान्यास 
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 20 फरवरी 2019 को नमामि गंगे मिशन के तहत 214 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी का शिलान्यास किया था। शिलान्यास पट आज तक जल निगम कार्यालय में धूल फांक रहा है। कारण है कि सरकार की योजना के मुताबिक एसटीपी धरातल पर नहीं आया है।

बैंक से नहीं आया पैसा 
एसटीपी पर 682 करोड़ से अधिक की लागत आएगी। इसके लिए सरकार ने वर्ल्ड बैंक से बजट मांगा है। पैसा न मिलने के कारण प्रोजेक्ट पर काम नहीं चल पा रहा है। उम्मीद है कि शीघ्र ही धन मिलने पर काम शुरू होगा। -रमेश चंद्रा, परियोजना प्रबंधक जल निगम 

विकास के नाम पर तैयार किए गए प्रस्ताव लटके
मेरठ शहर को कभी फुट ओवरब्रिज का सपना दिखाया जाता है, तो कभी बहुमंजिला वाहन पार्किंग का। कभी शहर को चकाचौंध करने की बात होती है, तो कभी नालों में बोट चलाने का प्रस्ताव तैयार होता है। स्मार्ट सिटी का सपना भी पांच साल पुराना है। विकास प्राधिकरण और नगर निगम की फाइलों में शहर चमक रहा है, लेकिन हकीकत से लोग वाकिफ हैं।

ट्रैफिक व्यवस्था को आधुनिक बनाने की बात चलती है, लेकिन शहर के लोग रोजाना जाम से जूझ रहे हैं। निगम के कई अधिकारी प्रस्ताव तैयार कराते हुए कार्यकाल तक पूरा कर शहर से रवाना हो गए, लेकिन विकास नहीं हुआ। प्रस्ताव और फाइलें बनती रहीं। 

फाइलों में गुम हो गए ये प्रस्ताव
- हापुड़ अड्डा चौराहा, बेगमपुल, तेजगढ़ी, रेलवे रोड चौराहा पर प्रस्तावित हुए थे फुट ओवरब्रिज
- बच्चा पार्क चौराहा से नाले के ऊपर सदर तहसील तक बनाया जाना था एलिवेटेड मार्ग
-नगर निगम कार्यालय परिसर में बनाई जानी थी भूमिगत और बहुमंजिला वाहन पार्किंग
- आबूनाला में छोड़ा जाना था गंगनहर का पानी, चलाई जानी थी बोट, किनारे पर बनाए जाने थे पिकनिक स्पॉट
-हापुड़ अड्डा चौराहा, बच्चा पार्क, आंबेडकर पार्क चौराहा, जलीकोठी, मेट्रो प्लाजा चौराहा का होना था सुंदरीकरण 
- एनएच 58 पर परतापुर के पास क्रांति द्वार एवं सुंदर पार्क बनाने का भी प्रस्ताव निगम बोर्ड में हुआ था पास
- ओडियन, आबूनाला के पानी को साफ करने  के लिए बनाई थी डीपीआर बनाई गई, अब योजना का पता नहीं

जिम्मेदारी के साथ प्रस्ताव और योजना बनाई जानी चाहिए। झूठे प्रस्ताव से शासन, और प्रशासन के प्रति अविश्वास पैदा होता है। अधिकारी प्रस्तावों में जनप्रतिनिधि को शामिल नहीं करते हैं। अधिकारियों से बात करेंगे।    -राजेंद्र अग्रवाल, सांसद

निगम द्वारा बनाए गए पुराने प्रस्तावों पर कई बार बात की है। अधिकारी सभी प्रस्तावों की फाइल शासन में रुकी होने की बात बताते हैं। बोर्ड बैठक में फिर इन मामलों पर चर्चा करेंगे।  -सुनीता वर्मा, महापौर

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