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Meerut News: दादी ओमवती के लिए श्रवण बना नैतिक

Sun, 09 Aug 2026 07:55 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 09 Aug 2026 07:55 PM IST
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Naitik became a Shravan for his grandmother Omvati.
75 वर्ष की दादी को पालकी में बिठाकर हरिद्वार से लाता 14 वर्षीय नैतिक, सहयोग करते पिता व बहन। (म
- हरिद्वार से 75 वर्षीय दादी को पालकी में बैठाकर लाया 14 साल का पौत्र
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- पौत्र ने पेश की अगाध प्रेम और भक्ति की अनूठी मिसाल
संवाद न्यूज एजेंसी
मवाना (मेरठ)। आधुनिकता के इस दौर में जहां पारिवारिक रिश्ते सिमटते जा रहे हैं, वहीं परीक्षितगढ़ क्षेत्र के गांव बहादरपुर में संस्कारों और बुजुर्गों के प्रति अगाध प्रेम की एक अनूठी व प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। 14 वर्षीय बालक नैतिक ने 75 वर्षीय बुजुर्ग दादी ओमवती की अधूरी इच्छा पूरी करने के लिए उन्हें हरिद्वार से पालकी में बैठाकर अपने गांव तक का कठिन पैदल सफर तय किया है। पोते के इस सेवा भाव को देखकर हर कोई उसकी तुलना कलयुग के श्रवण कुमार से कर रहा है।
बहादरपुर निवासी ओमवती लंबे समय से हरिद्वार जाकर गंगा स्नान और प्रभु का दर्शन करने की अभिलाषा व्यक्त कर रही थीं। हालांकि, अत्यधिक उम्र और शारीरिक असमर्थता के कारण उनका पैदल चलना या लंबी यात्रा करना संभव नहीं था। अपनी दादी की इस प्रबल इच्छा को पूरा करने के लिए उनके 14 वर्षीय पौत्र नैतिक ने हार नहीं मानी और उन्हें पालकी में बैठाकर हरिद्वार ले जाने व वापस लाने का दृढ़ संकल्प लिया।
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पावन और कठिन यात्रा में नैतिक का साथ देने के लिए उसके पिता अमरपाल, दादा सुखबीर सिंह भगत, 16 वर्षीय बहन साक्षी और सात वर्षीय छोटा भाई अनिकेत भी साथ चले। भीषण गर्मी और सैकड़ों किलोमीटर की लंबी दूरी की परवाह किए बिना पूरा परिवार एकजुट होकर बारी-बारी से पालकी को अपने कंधों पर उठाकर आगे बढ़ता रहा। मार्ग में जहां-जहां से यह पालकी गुजरी, वहां मौजूद शिवभक्त और स्थानीय लोग इस अद्भुत नजारे को देखकर भावविभोर हो गए। कांवड़ मार्ग पर जगह-जगह श्रद्धालुओं ने इस परिवार और बालक नैतिक का पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया।
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नैतिक का कहना है कि बुजुर्गों की सेवा और उनका आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। नैतिक द्वारा दिखाया गया यह समर्पण आज की युवा पीढ़ी के लिए सनातन संस्कारों और पारिवारिक दायित्वों को निभाने का एक महान संदेश देता है।
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