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न घरों में शौचालय बने, न सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालय
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 27 Jan 2017 04:46 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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मेरठ नगर निगम में स्वच्छ भारत मिशन फेल हो गया है। न तो घरों में शौचालय बन पाए हैं और न सामुदायिक व सार्वजनिक शौचालय। निगम स्वास्थ्य विभाग ने केंद्र सरकार की योजना को पलीता लगा दिया है। 35,549 में से केवल 74 मकानों में ही शौचालय बनाए जा सके। केंद्र सरकार द्वारा जारी 1.70 करोड़ रुपये में से महज 30 लाख ही खर्च हो सके। ऐसे में केंद्र सरकार मेरठ नगर निगम को स्वच्छ भारत मिशन के तहत मिलने वाली दूसरी किश्त देने से इंकार कर सकती है।
कैसे बन पाएंगे 35,549 घरों में शौचालय
महानगर में 35,549 भवन ऐसे हैं, जिनमें शौचालय नहीं हैं। ये परिवार खुले में शौच क्रिया करते हैं या फिर नालों में मल बहाया जाता है। केंद्र सरकार ने पांच साल में इन सभी भवनों में शौचालय बनवाने की जिम्मेदारी नगर निगम को दी थी। इसका नोडल अधिकारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी को बनाया गया था।
निगम स्वास्थ्य विभाग की 26 माह की रिपोर्ट
गांधी जयंती पर दो अक्तूबर 2014 को प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत की थी। दो साल दो माह बीत चुके हैं। इन 26 महीनों में शहर के 15,404 घरों में शौचालय बनवाए जाने थे, लेकिन बने मात्र 74 ही। 700 शौचालयों पर काम चलने की बात कही जा रही है। उधर शहर में अब तक 152 सामुदायिक शौचालय बनकर तैयार होने चाहिए थे, लेकिन अभी तक केवल 28 स्थानों का चयन ही हुआ है। 442 सार्वजनिक शौचालय बनने थे, लेकिन अभी तक केवल 22 ही निर्माणाधीन बताए जा रहे हैं।
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पांच साल का लक्ष्य
35549 घरों में शौचालय बनाना
352 सामुदायिक शौचालय बनाना
1020 सार्वजनिक स्थानों पर शौचालय
ये थी योजना
स्वच्छ भारत मिशन के तहत एक परिवार को आठ हजार रुपये दिए जाने थे। चार हजार रुपये शौचालय का गड्ढा खोदने व निर्माण करने और चार हजार रुपये की दूसरी किश्त शौचालय चालू होने पर दिए जाने की योजना है। योजना के प्रचार-प्रसार के लिए सरकार ने अलग से धनराशि जारी की थी। इसके बावजूद प्रचार नहीं किया गया। यही कारण है कि महानगर के मात्र 8696 लोगों ने ही आवेदन किया है। लेकिन नगर स्वास्थ्य अधिकारी और सफाई निरीक्षकों ने अपनी जिम्मेदारी का सही निर्वहन नहीं किया।
सफाई निरीक्षकों का वेतन रोका
योजना की गति बेहद चिंताजनक है। इस कारण निगम स्वास्थ्य विभाग के सभी सफाई निरीक्षकों का दो माह से वेतन रोका हुआ है। एक सफाई निरीक्षक को प्रतिकूल प्रविष्टि दी हुई है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी से जवाब तलब किया गया है। लापरवाह अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- देवेंद्र कुमार कुशवाहा, नगरायुक्त
यूपी सरकार ने लगाया अड़ंगा
यूपी सरकार समय से अपने हिस्से का धन निगम को जारी नहीं कर पाई। 2014 में योजना शुरू हुई, लेकिन राज्य सरकार ने केंद्र सरकार की योजना को पलीता लगाने की नियत से 2016 में नगर निगम को धन जारी किया। इस कारण प्रगति रिपोर्ट अच्छी नहीं है। तीन माह के भीतर स्वच्छ भारत मिशन में प्रगति दिखाई देगी। - हरिकांत अहलुवालिया, महापौर
2017 तक पूरा कर लेंगे लक्ष्य
- हम भी मानते हैं कि प्रगति रिपोर्ट अच्छी नहीं है। सभी सफाई निरीक्षकों को निर्देश दिए हुए हैं कि वे डोर-टू-डोर जाकर प्रत्येक मकान में शौचालय की जांच करें। जिन मकानों में शौचालय नहीं हैं, उनसे मौके पर ही आवेदन लें। शहर में जगह-जगह बैनर लगवाकर योजना का प्रचार प्रसार करने के निर्देश दिए हैं। 2017 में लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। - डा. कुंवरसेन, नगर स्वास्थ्य अधिकारी
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कैसे बन पाएंगे 35,549 घरों में शौचालय
महानगर में 35,549 भवन ऐसे हैं, जिनमें शौचालय नहीं हैं। ये परिवार खुले में शौच क्रिया करते हैं या फिर नालों में मल बहाया जाता है। केंद्र सरकार ने पांच साल में इन सभी भवनों में शौचालय बनवाने की जिम्मेदारी नगर निगम को दी थी। इसका नोडल अधिकारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी को बनाया गया था।
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निगम स्वास्थ्य विभाग की 26 माह की रिपोर्ट
गांधी जयंती पर दो अक्तूबर 2014 को प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत की थी। दो साल दो माह बीत चुके हैं। इन 26 महीनों में शहर के 15,404 घरों में शौचालय बनवाए जाने थे, लेकिन बने मात्र 74 ही। 700 शौचालयों पर काम चलने की बात कही जा रही है। उधर शहर में अब तक 152 सामुदायिक शौचालय बनकर तैयार होने चाहिए थे, लेकिन अभी तक केवल 28 स्थानों का चयन ही हुआ है। 442 सार्वजनिक शौचालय बनने थे, लेकिन अभी तक केवल 22 ही निर्माणाधीन बताए जा रहे हैं।
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पांच साल का लक्ष्य
35549 घरों में शौचालय बनाना
352 सामुदायिक शौचालय बनाना
1020 सार्वजनिक स्थानों पर शौचालय
ये थी योजना
स्वच्छ भारत मिशन के तहत एक परिवार को आठ हजार रुपये दिए जाने थे। चार हजार रुपये शौचालय का गड्ढा खोदने व निर्माण करने और चार हजार रुपये की दूसरी किश्त शौचालय चालू होने पर दिए जाने की योजना है। योजना के प्रचार-प्रसार के लिए सरकार ने अलग से धनराशि जारी की थी। इसके बावजूद प्रचार नहीं किया गया। यही कारण है कि महानगर के मात्र 8696 लोगों ने ही आवेदन किया है। लेकिन नगर स्वास्थ्य अधिकारी और सफाई निरीक्षकों ने अपनी जिम्मेदारी का सही निर्वहन नहीं किया।
सफाई निरीक्षकों का वेतन रोका
योजना की गति बेहद चिंताजनक है। इस कारण निगम स्वास्थ्य विभाग के सभी सफाई निरीक्षकों का दो माह से वेतन रोका हुआ है। एक सफाई निरीक्षक को प्रतिकूल प्रविष्टि दी हुई है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी से जवाब तलब किया गया है। लापरवाह अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- देवेंद्र कुमार कुशवाहा, नगरायुक्त
यूपी सरकार ने लगाया अड़ंगा
यूपी सरकार समय से अपने हिस्से का धन निगम को जारी नहीं कर पाई। 2014 में योजना शुरू हुई, लेकिन राज्य सरकार ने केंद्र सरकार की योजना को पलीता लगाने की नियत से 2016 में नगर निगम को धन जारी किया। इस कारण प्रगति रिपोर्ट अच्छी नहीं है। तीन माह के भीतर स्वच्छ भारत मिशन में प्रगति दिखाई देगी। - हरिकांत अहलुवालिया, महापौर
2017 तक पूरा कर लेंगे लक्ष्य
- हम भी मानते हैं कि प्रगति रिपोर्ट अच्छी नहीं है। सभी सफाई निरीक्षकों को निर्देश दिए हुए हैं कि वे डोर-टू-डोर जाकर प्रत्येक मकान में शौचालय की जांच करें। जिन मकानों में शौचालय नहीं हैं, उनसे मौके पर ही आवेदन लें। शहर में जगह-जगह बैनर लगवाकर योजना का प्रचार प्रसार करने के निर्देश दिए हैं। 2017 में लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। - डा. कुंवरसेन, नगर स्वास्थ्य अधिकारी