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मेरी बेटी अभी पढ़ेगी, विवाह की सूली नहीं चढ़ेगी...
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- जनहित फाउंडेशन ने आरजी इंटर कॉलेज में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान कार्यक्रम में दिया नारा
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। मेरी बेटी अभी पढ़ेगी, विवाह की सूली नहीं चढ़ेगी नारे के साथ जनहित फाउंडेशन ने शनिवार को रघुनाथ गर्ल्स इंटर कॉलेज में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान कार्यक्रम आयोजित किया। जिसमें सभी धर्म गुरु शामिल रहे। हिंदू समाज से पंडित विवेक दत शर्मा, मुस्लिम समाज से जैनुर राशिदीन, सिख समाज से हरनाम सिंह, ईसाई समाज से फादर डेनियल यशु, बौद्ध धर्म से एसएस ज्योति, रविदास समाज से राजकुमार आदि धर्मगुरू मौजूद रहे। सभी धर्म गुरुओं ने एक-एक कर अपनी बात रखी। किसी ने बताया कि बाल विवाह कानूनी रूप से अपराध है, तो किसी ने कहा कि हमारे धर्म में भी बालिका की आयु विवाह के लिए 18 वर्ष और लड़के की आयु 21 वर्ष है।
सिख समाज से हरनाम सिंह ने कहा कि बेटी हो या बेटा दोनों बराबर हैं। हम माता-पिता उनको सही रास्ता दिखा दें तो हर बड़े पद पर बेटियां ही नजर आएंगी। बौद्ध धर्म से एसएस ज्योति ने बताया कि अगर पूर्ण विकास होने के बाद विवाह करेंगे तो स्वस्थ बालक का जन्म होगा और शादी होने के समय बालक व बालिका का मानसिक और शारीरिक विकास भी सही होगा। अनीता राणा व सरबजीत कपूर ने कहा कि बालिका को कम उम्र में विवाह में नहीं बांधना चाहिए। उसको खुलकर जीने दें जिससे उनका मानसिक और शारीरिक विकास हो सके। सरबजीत कपूर ने सभी धर्म के लोगों को एक साथ इस अभियान से जुड़ने की अपील की। प्रधानाचार्य रजनी शंखधर ने बताया कि अगर हर बालिका अपने आस-पास की अन्य बालिकाओं को जागरूक करती रहे तो यह बाल विवाह का खात्मा हो जाएगा। मंच संचालन इंदिरा ने किया। कार्यक्रम में जनहित फाउंडेशन कोआर्डिनेटर अजय कुमार, कविता त्यागी, स्कूल की शिक्षिकाएं आदि मौजूद रहीं।
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मेरठ। मेरी बेटी अभी पढ़ेगी, विवाह की सूली नहीं चढ़ेगी नारे के साथ जनहित फाउंडेशन ने शनिवार को रघुनाथ गर्ल्स इंटर कॉलेज में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान कार्यक्रम आयोजित किया। जिसमें सभी धर्म गुरु शामिल रहे। हिंदू समाज से पंडित विवेक दत शर्मा, मुस्लिम समाज से जैनुर राशिदीन, सिख समाज से हरनाम सिंह, ईसाई समाज से फादर डेनियल यशु, बौद्ध धर्म से एसएस ज्योति, रविदास समाज से राजकुमार आदि धर्मगुरू मौजूद रहे। सभी धर्म गुरुओं ने एक-एक कर अपनी बात रखी। किसी ने बताया कि बाल विवाह कानूनी रूप से अपराध है, तो किसी ने कहा कि हमारे धर्म में भी बालिका की आयु विवाह के लिए 18 वर्ष और लड़के की आयु 21 वर्ष है।
सिख समाज से हरनाम सिंह ने कहा कि बेटी हो या बेटा दोनों बराबर हैं। हम माता-पिता उनको सही रास्ता दिखा दें तो हर बड़े पद पर बेटियां ही नजर आएंगी। बौद्ध धर्म से एसएस ज्योति ने बताया कि अगर पूर्ण विकास होने के बाद विवाह करेंगे तो स्वस्थ बालक का जन्म होगा और शादी होने के समय बालक व बालिका का मानसिक और शारीरिक विकास भी सही होगा। अनीता राणा व सरबजीत कपूर ने कहा कि बालिका को कम उम्र में विवाह में नहीं बांधना चाहिए। उसको खुलकर जीने दें जिससे उनका मानसिक और शारीरिक विकास हो सके। सरबजीत कपूर ने सभी धर्म के लोगों को एक साथ इस अभियान से जुड़ने की अपील की। प्रधानाचार्य रजनी शंखधर ने बताया कि अगर हर बालिका अपने आस-पास की अन्य बालिकाओं को जागरूक करती रहे तो यह बाल विवाह का खात्मा हो जाएगा। मंच संचालन इंदिरा ने किया। कार्यक्रम में जनहित फाउंडेशन कोआर्डिनेटर अजय कुमार, कविता त्यागी, स्कूल की शिक्षिकाएं आदि मौजूद रहीं।
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