मुजफ्फरनगर दंगा: सपा सरकार ने जांच के लिए किया था SIT का गठन, 418 लोग हुए थे बरी
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मुजफ्फरनगर में सितंबर 2013 के सांप्रदायिक दंगे के मामलों में जांच एजेंसी एसआईटी ने जांच के बाद कुल 175 मुकदमों में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। इनमें से 50 मुकदमे चर्चित कवाल कांड और 125 पुलिस की ओर से दर्ज किए गए थे। शासन ने जिन 18 मुकदमों को वापस लेने का निर्णय लिया है, वे पुलिस की ओर से ही दर्ज किए गए थे।
27 अगस्त 2013 को छेड़छाड़ को लेकर जानसठ के गांव कवाल में हुई सचिन, गौरव व शाहनवाज की हत्या के बाद जिले में दोनों समुदायों की महापंचायतों का दौर शुरू हुआ था। इसी क्रम में सात सितंबर 2013 को सिखेड़ा के नंगला मंदौड़ कॉलेज के मैदान में हुई बहू-बेटी सम्मान बचाओ रैली की समाप्ति के बाद जनपद में हिंसा भड़क उठी थी। दंगे में 65 लोगों की मौत हुई थी, वहीं अथाह संपत्ति के नुकसान के बाद हजारों लोगों को पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा था। दंगे के बाद हत्या, हमला, आगजनी, तोड़फोड़, हिंसा, बलात्कार आदि के पांच सौ से अधिक मुकदमे दर्ज हुए थे, जिनमें साढ़े छह हजार से अधिक लोगों को नामजद किया गया था। इनमें 1,480 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था।
वहीं तत्कालीन सपा सरकार ने दंगों की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था, जिसने सुबूतों के अभाव में 54 मुकदमों में 418 लोगों को बरी कर दिया था। एसआईटी ने शेष मुकदमों में से 175 में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। इनमें से 50 मुकदमे कवाल कांड से संबंधित थे, जबकि 125 मुकदमे दंगे के दौरान हिंसा, तोड़फोड़, आगजनी, पथराव व अन्य मामलों के थे, जो पुलिस की ओर से दर्ज किए गए थे। दंगे के मुकदमों में सांसद व विधायक समेत अन्य जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भी मामले दर्ज हुए थे, जिनकी सुनवाई वर्तमान में प्रयागराज हाईकोर्ट में चल रही है।
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