बेटा दोषी हो तो गोली मार दो, जावेद की गिरफ्तारी पर बोले पिता, खुफिया विभाग ने गांव में डाला डेरा
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छपार क्षेत्र के गांव खामपुर निवासी जावेद अली सऊदी अरब में कारपेंटर की नौकरी करता था। सोमवार देर रात सऊदी अरब से लौटते समय एनआईए की टीम ने दिल्ली एयरपोर्ट से जावेद को गिरफ्तार कर लिया था।
जावेद पर आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा के लिए हवाला कारोबार के जरिये टेरर फंडिंग का आरोप है। जावेद की गिफ्तारी की सूचना पर मंगलवार को खुफिया विभाग व पुलिस टीम ने गांव खामपुर पहुंचकर उसके घर-परिवार की जानकारी लेने के साथ ही परिजनों व ग्रामीणों से जावेद के संबंध में पूछताछ की।
इस पूरे मामले में जावेद के पिता इमरान का कहना है कि उन्हें पूरा यकीन है कि बेटा बेकसूर है, उसे इस मामले में फंसाया गया है। इसके चलते इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि जांच में बेटा दोषी पाया जाए तो उसे गोली मार देनी चाहिए।
पिता इमरान का कहना है कि उन पर बैंक कर्ज है। मार्च-18 में दो बेटियों की शादी थी, जिसके लिए जावेद ने सऊदी अरब से अपने कंपनी के बैंक खाते से करीब तीन लाख रुपये निकालकर मंगलौर निवासी व्यक्ति के माध्यम से घर भिजवाए थे।
बैंक अपनी कर्ज की राशि उक्त रकम में से न काट ले, जिससे बेटियों की शादी रुक जाए। इसीलिए रुपये बैंक खाते के बजाए मंगलौर के गांव भुक्कनपुर निवासी अब्दुल समद के द्वारा मंगाए गए थे। पिता का कहना है कि यदि उक्त व्यक्ति के आतंकियों से जुड़े होने का पता होता तो उसके माध्यम से रुपये नहीं मंगाए जाते।
करीब चार माह भारतीय दूतावास के कब्जे में रहा जावेद
गांव खामपुर निवासी जावेद अली को भारत लौटने से पहले करीब चार माह तक सऊदी अरब में भारतीय दूतावास की हिरासत में रखा गया था।
सूत्रों के अनुसार, इंडियन एंबेसी में जावेद से टेरर फंडिंग के संबंध में जानकारी जुटाने के साथ ही उसके सऊदी अरब स्थित कंपनी व निजी बैंक खातों की भी जानकारी लेते हुए उसकी सभी एंट्रियां चेक की गईं। पूरी तरह जांच करने के बाद ही जावेद को सोमवार रात सऊदी अरब से स्वदेश भेजा गया, जहां एयरपोर्ट पर एनआईए द्वारा उसे गिरफ्तार कर लिया गया।