रालोद प्रमुख चौधरी अजित सिंह की हार का कारण बनी ये बड़ी वजह, कांटे का था मुकाबला
सपा-बसपा और रालोद के महागठबंधन को जिले में जाट वोट पूरी तरह ट्रांसफर नहीं हो पाए। मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट पर रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह मात्र 60 प्रतिशत जाटों के वोट ले पाए। 40 प्रतिशत जाट वोट यहां भाजपा के साथ चला गया। जिले की दो विधानसभा सीट मीरापुर और पुरकाजी में भी जाटों का अधिकतम रुझान भाजपा के साथ रहा। बिजनौर लोकसभा सीट पर 75 प्रतिशत से अधिक जाट मतदाता भाजपा के पक्ष में चला गया। महागठबंधन प्रत्याशी बसपा के मलूक नागर केवल 20 से 25 प्रतिशत जाटों के वोट ले पाए। हालांकि जिले की दोनों विधानसभा सीटों पर नागर को बड़ी जीत मिली।
बसपा सुप्रीमो मायावती का यह कहना कि रालोद अध्यक्ष अजित सिंह जाट वोट ट्रांसफर नहीं करा पाए किसी हद तक सच है। मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट पर रालोद प्रमुख अजित सिंह खुद चुनाव लड़ रहे थे और उन्हें उम्मीद थी कि मुस्लिम और दलित के साथ उनका अपना वोट बैंक जाट उन्हें एकतरफा मिलेगा। उनकी इस सोच को भाजपा प्रत्याशी रहे डॉ. संजीव बालियान ने गलत साबित कर दिया। मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट पर जाटों के बड़े गांवों सिसौली, काकड़ा, कुटबा-कुटबी, खरड़, रसूलपुर जाटान, सौरम, गोयला आदि में भाजपा जाट समाज के 80 प्रतिशत तक वोट ले गई। हालांकि पूरी लोकसभा के सभी जाट गांवों का आंकड़ा देखा जाए तो रालोद को 60 और बीजेपी को 40 प्रतिशत वोटों का बंटवारा रहा। बिजनौर लोकसभा की मीरापुर और पुरकाजी विधानसभा के जाट वोटर 75 प्रतिशत से अधिक भाजपा के पक्ष में चले गए। मुस्लिम और दलित की तरह जाट वोट ट्रांसफर नहीं हो पाए।
मुस्लिम ने गठबंधन को एकतरफा, दलित ने 90 प्रतिशत वोट दिए
मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट के बूथों का आंकड़ा देखे तो मुस्लिमों का वोट एकतरफा गठबंधन के प्रत्याशी रालोद नेता चौधरी अजित सिंह को गया। अकेले सूजडू गांव में रालोद को 11863 वोट मिले और भाजपा को यहां केवल 1315 वोट ही मिले। मुस्लिम गांवों में अमूमन यही स्थिति रही। दलितों में बीजेपी ने जरूर यहां सेंधमारी की है। मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट पर दलित लगभग 10 प्रतिशत भाजपा के पक्ष में गया है। चरथावल विधानसभा के दलितों के कई गांवों में भाजपा को वोट मिला है। इनमें इंद्रगढ, अलावलपुर मजरा आदि शामिल हैं। बिजनौर लोकसभा सीट पर हाथी का निशान होने के कारण दलित का वोट एक तरफा बसपा प्रत्याशी को गया। यहां भाजपा दलित में डिवीजन नहीं कर पाई।
जाट वोटों में बंटवारा हुआ: राठी
रालोद जिलाध्यक्ष अजीत राठी का कहना है कि जाट वोट एकतरफा मिलने की जो उम्मीद थी रालोद को उसमें झटका लगा है। जाट मतों का बंटवारा हुआ है। हम जाट वोटों में 60 प्रतिशत के लगभग में रहे हैं। बिजनौर लोकसभा सीट पर लगभग 25 प्रतिशत जाट वोट ही गठबंधन प्रत्याशी मलूक नागर के पक्ष में ट्रांसफर हो पाया। हमारे जिले की दोनों विधानसभा सीटों पर गठबंधन जीता है। गठबंधन में रालोद सपा के कारण था, अखिलेश यादव ने ही महागठबंधन का हिस्सा बनाया था।
90 प्रतिशत जाट भाजपा को मिला: बालियान
केंद्रीय पशुधन राज्य मंत्री डॉ. संजीव बालियान का कहना है कि महागठबंधन का हश्र यही होना था। बालियान का दावा है कि मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट पर 50 प्रतिशत से अधिक जाट वोट उन्हें मिला है। पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बात करें तो 90 प्रतिशत जाट भाजपा को मिला है। जिन तीन सीटों पर रालोद लड़ा है, इन्हीं पर बंटवारा हुआ बाकी सभी पर शत-प्रतिशत भाजपा के पक्ष में ही गया है। रालोद अध्यक्ष अजित सिंह महागठबंधन के पक्ष में वोट ट्रांसफर नहीं करा पाए।
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