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Meerut News: मुस्लिमों ने उम्मीद से ज्यादा पतंग उड़ाई...साइकिल भी चलाई
Fri, 12 May 2023 02:40 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Fri, 12 May 2023 02:40 AM IST
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मेरठ। निगम चुनाव में सपा को साइकिल से फिसलता नजर आ रहा मुस्लिम मतदाता सपा को आगामी लोकसभा चुनाव में भी पसीना ला सकता है। नगर निगम चुनाव में अपनी अहमियत दिखाने के लिए सपा के महापौर प्रत्याशी पद पर साइकिल छोड़ पतंग उड़ाता नजर आया। अधिकांश मुस्लिम इलाकों में साइकिल रेंगती नजर आई। कुछ ही मुस्लिम वार्डों में जहां सपा का मजबूत पार्षद प्रत्याशी रहा, वहीं पर कुछ रुझान नजर आया।
शहर में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या साढ़े चार लाख के आसपास बताई जाती है। मुस्लिम इस तरह साइकिल का साथ छोड़ देंगे, ये सपा नेताओं के लिए आश्चर्य भरा है। निकाय चुनाव में मुस्लिमों की साइकिल से दूरी आगामी लोक सभा चुनाव पर असर डाल सकती है। मुस्लिम बहुल इलाकों जिनमें रशीदनगर, लिसाड़ी रोड, लक्खीपुरा, समर गार्डन, चमड़ा पैठ, ढ़वाई नगर, जाकिर कालोनी, कोतवाली, हापुड़ अड्डा, हापुड़ रोड, घंटाघर, गुदड़ी बाजार, शाहपीर गेट, श्यामनगर और शास्त्रीनगर के मुस्लिम मतदाता सपा की बजाय एआईएमआईएम पार्टी की तरफ लामबंद होता नजर आया। यही स्थिति मुस्लिम मतदाताओं में खैरनगर, जलकोठी, पूर्वा महावीर बागपत गेट, मकबरा अब्बू, मछेरान, केसरगंज, शाहपीर गेट, इम्लियान, करीमनगर, बुनकर नगर, इस्लामाबाद, शाहनत्थन, गुलजार इब्राहिम कोटला और ईदगाह आदि क्षेत्रों में मतदान स्थलों पर सबसे अधिक एआईएमआईएम महापौर प्रत्याशी अनस के पक्ष में ही खड़े दिखे। हालांकि सभी महापौर और पार्षद प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम मशीन में कैद है, लेकिन एआईएमआईएम और सपा वाले अपनी जीत को मानकर चल रहे हैं। दावा कर रहे हैं कि मुस्लिम मतदाता उन्हें बड़ी संख्या में मिले हैं। सभी पार्टियों और प्रत्याशियों की नजर मुस्लिम मतदाताओं पर थी, क्योंकि मुस्लिम मतों के सहारे ही सपा, बसपा या एआईएमआईएम की नैया पार लग सकती है। उनके बंटवारे से भाजपा को ही सीधे लाभ मिलना है। जिस तरह से मुस्लिम मतदान करते नजर आ रहा था, उससे सुबह से ही तस्वीर साफ होने लगी थी कि मुस्लिम मतदाता एआईएमआईएम के पक्ष में लामबंद है। हालांकि कुछ मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में मुस्लिमों का सपा की तरफ भी रुझान नजर आया। इसके अलावा कुछ वार्डों में जहां भाजपा ने मुस्लिम पऱत्याशी लड़ाए हुए थे, वहां मुस्लिमों का कुछ वोट भाजपा को भी गया।
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सपा की तरफ मुस्लिमों के कम रुझान के यह रहे कारण
- मुस्लिमों के कद्दावर नेताओं शाहिद मंजूर, रफीक अंसारी, गुलाम मोहम्मद की पऱचार से दूरी
- सपा मुखिया का मुस्लिमों के लिए पऱमुखता से बात नहीं रखना
- एआईएमआईएम पऱमुख के पऱित मुस्लिमों का बढ़ता रुझान
- पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का आधा रोड शो करना
- हार-जीत के लिए नहीं, अपनी ताकत का एहसास कराना
- विधानसभा चुनाव के मुकाबले नगर निगम को कम अहमियत वाला मानना
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शहर में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या साढ़े चार लाख के आसपास बताई जाती है। मुस्लिम इस तरह साइकिल का साथ छोड़ देंगे, ये सपा नेताओं के लिए आश्चर्य भरा है। निकाय चुनाव में मुस्लिमों की साइकिल से दूरी आगामी लोक सभा चुनाव पर असर डाल सकती है। मुस्लिम बहुल इलाकों जिनमें रशीदनगर, लिसाड़ी रोड, लक्खीपुरा, समर गार्डन, चमड़ा पैठ, ढ़वाई नगर, जाकिर कालोनी, कोतवाली, हापुड़ अड्डा, हापुड़ रोड, घंटाघर, गुदड़ी बाजार, शाहपीर गेट, श्यामनगर और शास्त्रीनगर के मुस्लिम मतदाता सपा की बजाय एआईएमआईएम पार्टी की तरफ लामबंद होता नजर आया। यही स्थिति मुस्लिम मतदाताओं में खैरनगर, जलकोठी, पूर्वा महावीर बागपत गेट, मकबरा अब्बू, मछेरान, केसरगंज, शाहपीर गेट, इम्लियान, करीमनगर, बुनकर नगर, इस्लामाबाद, शाहनत्थन, गुलजार इब्राहिम कोटला और ईदगाह आदि क्षेत्रों में मतदान स्थलों पर सबसे अधिक एआईएमआईएम महापौर प्रत्याशी अनस के पक्ष में ही खड़े दिखे। हालांकि सभी महापौर और पार्षद प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम मशीन में कैद है, लेकिन एआईएमआईएम और सपा वाले अपनी जीत को मानकर चल रहे हैं। दावा कर रहे हैं कि मुस्लिम मतदाता उन्हें बड़ी संख्या में मिले हैं। सभी पार्टियों और प्रत्याशियों की नजर मुस्लिम मतदाताओं पर थी, क्योंकि मुस्लिम मतों के सहारे ही सपा, बसपा या एआईएमआईएम की नैया पार लग सकती है। उनके बंटवारे से भाजपा को ही सीधे लाभ मिलना है। जिस तरह से मुस्लिम मतदान करते नजर आ रहा था, उससे सुबह से ही तस्वीर साफ होने लगी थी कि मुस्लिम मतदाता एआईएमआईएम के पक्ष में लामबंद है। हालांकि कुछ मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में मुस्लिमों का सपा की तरफ भी रुझान नजर आया। इसके अलावा कुछ वार्डों में जहां भाजपा ने मुस्लिम पऱत्याशी लड़ाए हुए थे, वहां मुस्लिमों का कुछ वोट भाजपा को भी गया।
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सपा की तरफ मुस्लिमों के कम रुझान के यह रहे कारण
- मुस्लिमों के कद्दावर नेताओं शाहिद मंजूर, रफीक अंसारी, गुलाम मोहम्मद की पऱचार से दूरी
- सपा मुखिया का मुस्लिमों के लिए पऱमुखता से बात नहीं रखना
- एआईएमआईएम पऱमुख के पऱित मुस्लिमों का बढ़ता रुझान
- पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का आधा रोड शो करना
- हार-जीत के लिए नहीं, अपनी ताकत का एहसास कराना
- विधानसभा चुनाव के मुकाबले नगर निगम को कम अहमियत वाला मानना