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जनता पर बोझ बढ़ाकर झोली भर रहा नगर निगम

Fri, 07 Aug 2020 01:24 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 07 Aug 2020 01:24 AM IST
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municipal corporation filling the burden on the public
मेरठ। नगर निगम ने कोरोना काल में खाली हुआ खजाना भरने के लिए बढ़े संपत्ति नामांतरण शुल्क की वसूली शुरू कर दी है। इसे 500 रुपये से बढ़ाकर पांच हजार से लेकर 50 हजार रुपये कर दिया है। पिछले साल 4,377 संपत्तियों के नामांतरण से निगम को 21 लाख 88 हजार 500 रुपये की आय हुई थी। वहीं, इस साल महज 75 संपत्तियों के नामांतरण से ही तीन लाख 15 हजार रुपये प्राप्त हुए हैं। उधर, अधिकारियों का तर्क है कि निगम की आय बढ़ेगी तो शहर का ज्यादा विकास होगा।
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500 रुपये शुल्क था संपत्ति नामांतरण
पहले नगर निगम में संपत्ति नामांतरण शुल्क महज 500 रुपये ली जाती थी। निगम के कर अनुभाग ने इसे बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था। इससे निगम को सालाना 20 से 25 लाख रुपये ही मिल पाते हैं। पिछले साल बोर्ड बैठक में बढ़ीं दरों के प्रस्ताव को कुछ संशोधन के साथ पास कर दिया था जिसे निगम ने बिना संशोधन किए वास्तविक रूप में लागू कर दिया। किरकिरी के बाद अब पार्षद इसके विरोध में खड़े हो रहे हैं।
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10 से 100 गुना बढ़ा नामांतरण शुल्क
नगर निगम ने नामांतरण शुल्क 10 से 100 गुना तक बढ़ा दिया है। अब संपत्ति के बाजार मूल्य के आधार पर नामांतरण शुल्क लिया जा रहा है। एक से 10 लाख मूल्य की संपत्ति के लिए 5000 रुपये, 10 से 20 लाख मूल्य की संपत्ति पर 10 हजार रुपये, 20 से 50 लाख की संपत्ति के लिए 25 हजार और 50 लाख से अधिक मूल्य की संपत्ति के लिए 50,000 रुपये लिए जा रहे हैं। हालांकि वसीयत, मृत्यु और उत्तराधिकार के मामलों में नामांतरण शुल्क एक हजार रुपये रखा है।
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संपत्ति नामांतरण शुल्क बढ़ाने पर आपत्ति जताई
संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष अजय गुप्ता (नटराज) ने नगर निगम द्वारा बढ़ाए संपत्ति नामांतरण शुल्क के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने इस संबंध में नगर आयुक्त को पत्र देकर आपत्ति दर्ज कराई है। अजय गुप्ता का कहना है कि कोरोना काल में लोग आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। वहीं, नगर निगम शुल्क बढ़ाकर उनकी कमर तोड़ रहा है। उन्होंने नगर निगम से आपत्ति आमंत्रित करने एवं शासन की अनुमति प्राप्त कर गजट नोटिफिकेशन कराने की मांग की है।
क्या बोले अधिकारी
नामांतरण शुल्क वृद्धि का प्रस्ताव पिछले साल बोर्ड बैठक में पास हुआ था। उसे लागू किया है। इस तरह का शुल्क सभी निगमों में है। केवल यहीं पर लंबे समय से 500 रुपये लिए जा रहे थे।-डॉ. अरविंद चौरसिया, नगर आयुक्त
क्या बोले पार्षद
निगम ने आय बढ़ाने के लिए जनता की जेब पर अनावश्यक बोझ डाला है। उन्होंने बोर्ड बैठक में इसका विरोध किया था। संशोधन की सहमति पर यह प्रस्ताव पास किया गया था। 5 से 50 हजार रुपये तक के नामांतरण शुल्क को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।-ललित नागदेव, पार्षद भाजपा

बोर्ड बैठक में नामांतरण शुल्क वृद्धि का प्रस्ताव संशोधन के बाद पास किया गया था। निगम ने इसे बिना संशोधन ही लागू कर दिया है जो पूरी तरह गलत है। इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।-धर्मवीर, बसपा पार्षद दल नेता
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