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भैसाली अड्डे पर नीचे दौड़ेंगी बसें, ऊपर चलेगी रैपिड, ऐसा होगा मल्टीमॉडल परिवहन मॉडल

Wed, 15 May 2019 11:20 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 15 May 2019 11:20 AM IST
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multimodal transport model at Bhaisali bus stand Meerut for Rapid Metro
रैपिड मेट्रो - फोटो : social media
मेरठ में भैसाली बस अड्डे पर एनसीआरटीसी ने नया प्लान देते हुए 7534 वर्ग मीटर जमीन मांगी है, ताकि इस पर रैपिड ट्रेन के लिए स्टेशन बनाया जा सके। जमीन तो है नहीं। ऐसे में प्लान यह है कि वर्तमान बस अड्डे को मल्टीमॉडल रूप में विकसित किया जाए। 
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यानी नीचे बस अड्डा रहे और ऊपर रैपिड ट्रेन का स्टेशन। यदि यह प्लान लागू हुआ तो जनता पर आफत पड़ेगी। चूंकि बस अड्डा बाहर नहीं होगा तो शहर को जाम से मुक्ति नहीं मिलेगी। बस अड्डा ही जाम का मुख्य कारण है। ट्रैफिक पुलिस तक कई बार इसे बाहर करने को कह चुकी है। 
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नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (एनसीआरटीसी) का प्लान है कि दिल्ली से मेरठ के बीच पड़ने वाले सभी बस अड्डों पर ही रैपिड रेल के स्टेशन बनाए जाएं। एनसीआरटीसी ने मल्टी मॉडल परिवहन के लिए जमीन मांगी है। हाल ही में लखनऊ में हुई बैठक में भैसाली बस अड्डे पर रैपिड रेल प्रोजेक्ट के लिए 7534 वर्ग मीटर जमीन की मांग की गई है। इससे साफ हो गया है कि भैसाली बस अड्डा अब शहर में ही रहेगा। 
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दिल्ली से मेरठ 82 किलोमीटर के रैपिड रेल प्रोजेक्ट का कार्य धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रहा है। 23 मई के बाद प्रोजेक्ट कार्य में तेजी आने की संभावना है। इसके बाद पहले चरण में साहिबाबाद से दुहाई तक कार्य शुरू कर दिया जाएगा। वहीं, मेरठ में भी प्रोजेक्ट पर कार्य जमीन पर दिखाई देने लगेगा। अभी मेरठ में 180 स्थानों पर मिट्टी की जांच का कार्य किया जा रहा है। 80 से अधिक स्थानों पर मिट़्टी की जांच हो चुकी है।  

सरायकाले खां की तर्ज पर भैंसाली अड्डा
रैपिड के दिल्ली की ओर सबसे पहले स्टेशन सरायकाले खां को मल्टीमॉडल परिवहन के लिए तैयार किया गया है। यहां रैपिड से उतरते ही यात्रियों को बस, ट्रेन मिल सकेंगी। इसी मॉडल पर एनसीआरटीसी अन्य कई स्थानों को बनाने पर विचार कर रहा है। इसमें साहिबाबाद, मुरादनगर बस अड्डों को भी इसी तर्ज पर डेवलप करने की योजना है। 

कम पड़ जाएगी जमीन
हालांकि, परिवहन निगम का कहना है कि भैसाली अड्डे को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप पर बनाया जाना है। जिससे जमीन कम पड़ सकती है। लेकिन एनसीआरटीसी की तरफ से दो महीने में जमीन उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है। जिससे यहां रैपिड रेल प्रोजेक्ट को रफ्तार मिल सके। 

हाईकोर्ट और एनजीटी तक पहुंचा था मामला 
भैसाली बस अड्डे को शहर से बाहर करने की कई बार मांग उठ चुकी है। व्यापारी और याचिकाकर्ता इस मामले को लेकर एनजीटी और हाईकोर्ट जा चुके हैं। एक बार परिवहन निगम को एनजीटी और हाईकोर्ट से राहत मिल चुकी है। 

इन लोगों का कहना था कि शहर के बीचों-बीच भैसाली बस अड्डा होने से प्रदूषण और जाम की समस्या बढ़ रही है। एनजीटी ने अपनी सुनवाई में परिवहन निगम के अधिकारियों को बसों से निकलने वाले धुएं और आवाज को कम करने के लिए मानकों पर खरा उतरने के निर्देश दिए थे। 

पर जनता झेलेगी जाम की मुसीबत
यदि बस अड्डा बाहर नहीं हुआ तो यह तय है कि जनता मुसीबत ही झेलेगी। महायोजना 2021 में बस अड्डों को बाहर करने की बात कही गई है। तमाम अन्य संस्थाएं भी इसकी सिफारिश कर चुकी हैं। यहां तक कि ट्रैफिक पुलिस अधिकारी कई बार लिखित में यह पत्र आला अधिकारियोें को भेज चुके हैं कि मेरठ में यदि जाम का काम तमाम करना है तो बस अड्डों को बाहर करना होगा। बावजूद इसके यह नया प्लान आया है जिसमें बस अड्डा और स्टेशन एक साथ रहेंगे तो यह मुसीबत का ही सबब बनेगा। 

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