रमजान में मोबाइल एप से आसान हुई अकीदतमंदों की इबादत, जकात के लिए खास कैलकुलेटर
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रमजान सहित सामान्य दिनों में मुस्लिम समुदाय के लोग एक दिन में पांच समय की नमाज अदा करते हैं।मस्जिदों में नमाज से पहले मोबाइल बंद करने के नोटिस लगे रहते हैं। ऐसे में मस्जिदों में लोगों की नमाज में खलल से बचने के लिये गूगल प्ले स्टोर पर ‘प्रेयर टाइम साइलेंसर’ ऐप आ गई है।
जिससे पांच समय की नमाज और शुक्रवार को जुमे की नमाज के समय मोबाईल रिंगटोन बंद करने के विकल्प मौजूद हैं। वहीं ‘रमजान 2019’ ऐप में नमाज के समय अलार्म से लेकर किबला कम्पास, इस्लामिक कैलेंडर, मस्जिद फाइंडर से लेकर अन्य सुविधाएं दी गई हैं। किबला कम्पास से आप किसी भी अंजान शहर में नमाज के सही रुख का आसानी से पता लगा सकते हैं।
ऐप में अल्लाह के 99 नाम, क्षेत्रवार रमजान की टाइमिंग के अलावा छह कलमे दिए गए हैं। इस्लामिक वॉल पर देश और विदेश की मस्जिदों के फोटो व मैसेंजर पर बातचीत कर सकते हैं। ऐप में तसबीह पढ़ने जैसी खूबियों से लेकर कुल 13 तरह के फीचर्स मुस्लिम समाज के लिए काफी सहूलियत भरे हैं।
मझले रोजे की होती है अधिक अहमियत
रमजान के पाक महीने में मझले रोजे की अहमियत अधिक होती है। नायब शहरकाजी जैनुर राशिद्दीन ने बताया कि दूसरे अशरे में 14वां रोजा मझला कहलाता है। इसमें लोगों को अपने बुजुर्गों, नौजवानों जो अब इस दुनिया में नहीं है, उनके लिये मगफिरत की दुआ मागनी चाहिए। उन्होंने बताया कि मझले रोजे के बाद से मुस्लिम लोग ईद की तैयारी में जुट जाते हैं।
नायब शहरकाजी ने ईद की तैयारियों में इबादत न भूलने की अपील की। लोग ईद की तैयारियों के दौरान इबादत से दूरी बना लेते हैं। ऐसा कर लोग गुनाह में शामिल न हों। इसके अलावा उन्होंने कहा कि 20 मई को उनके पिता शहरकाजी जैनुल आबिद्दीन का इंतकाल हुआ था। उनके पिता देवबंद दारूल उलूम के मजलिस ए शूरा के सदस्य, लखनऊ नदवातुल उलूम व अलीगढ़ मुस्लिम विवि के शूरा के सदस्य रहे हैं। लोगों से उनके पिता की मगफिरत के लिए दुआ करने की अपील की।
एप में ये हैं फीचर
1. प्रेयर टाइमिंग
2. मंथली प्रेयर टाइमिंग
3. किबला कम्पास
4. रमजान टाइमिंग
5. इस्लामिक कैलेंडर
6. 99 नेम्स ऑफ अल्लाह
7. मोस्कोज फाइंडर
8. हलाल पैलेस फाइंडर
9. दुआज
10. कलिमाज
11. कुरआन
12. तसबीह
13. जकात कैलकुलेटर
14. इस्लामिक वॉल
स्मार्ट फोन आज सभी की जरूरत
समय के लिहाज से स्मार्ट फोन आज सभी की जरूरत बन चुका है। ऐसे में इन ऐप से लोगों को इबादत के साथ फर्ज अदा करने में आसानी होती है तो यह अच्छी बात है। लेकिन कुरआन ए पाक और छह कलमा ऐप में हैं तो फोन में फिल्मी गीत और गलत वीडियों न हों, लोगों को इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए। - शहरकाजी जैनुस साजिद्दीन सिद्दीकी
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