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माध्यमिक शिक्षक संघों के लिए आसान नहीं होगा एमएलसी चुनाव
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कुलदीप त्यागी
मेरठ। एमएलसी शिक्षक व स्नातक सीटों पर चुनाव की तैयारी तेज हो गई है। 2026 में होने वाले एमएलसी चुनाव माध्यमिक शिक्षक संघों के लिए अस्तित्व की लड़ाई साबित होंगे। पिछले चुनाव में भाजपा ने शिक्षक दलों का वर्चस्व समाप्त कर दिया था। भाजपा की कसरत इस बढ़त को अगले चुनाव में भी बरकरार रखने की है तो शिक्षक संघों के सामने अपना सियासी अस्तित्व बचाने की जंग है।
मेरठ-सहारनपुर शिक्षक व स्नातक एमएलसी की सीटों पर 2020 में हुए चुनाव में भाजपा ने माध्यमिक शिक्षक संघ शर्मा गुट को करारी शिकस्त दी थी। शिक्षक सीट पर भाजपा के श्रीचंद शर्मा ने दिग्गज शिक्षक नेता स्वर्गीय ओमप्रकाश शर्मा को (आठ बार के एमएलसी) को करारी शिकस्त दी थी। इसी तरह से स्नातक सीट पर भाजपा के दिनेश गोयल ने माध्यमिक शिक्षक संघ के हेम सिंह पुंडीर (चार बार के एमएलसी) को हराकर जीत हासिल की। इसी तरह के चुनाव परिणाम दूसरी सीटों पर आए।
शिक्षक संघों से सामने आएंगे नए चेहरे
शिक्षक सीट पर माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई गुट के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. उमेश चंद्र त्यागी को भी लगातार चौथी बार हार झेलनी पड़ी थी। ऐसे में इस बार उनका चुनाव लड़ने का मन नहीं बन रहा। शर्मा गुट ने भी मेरठ के जिलाध्यक्ष गजेंद्र वर्मा को शिक्षक सीट से अपना उम्मीदवार घोषित किया है। ऐसी ही स्थिति स्नातक सीट पर भी है। ऐसे में साफ है कि शिक्षक संघों से नए प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरेंगे।
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शिक्षक संघों के सामने अस्तित्व की लड़ाई
शिक्षक संघों से अधिकतर सरकारी सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों के शिक्षक ही चुनाव लड़ते हैं। मेरठ-सहारनपुर मंडल के नौ जिलों में इनकी लगभग 50 हजार वोट ही है, जबकि वित्तविहीन शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों के वोट इनसे कई गुणा है। वित्तविहीन शिक्षकों का झुकाव राजनीतिक दलों की ओर अधिक होता है। ऐसे में 2026 का चुनाव शिक्षक संघों के लिए अस्तित्व की जंग है।
निर्दलीय भी ठोंकने की तैयारी में जुटे
स्नातक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में जुटे हैं। मुजफ्फरनगर के उद्यमी कुश पुरी ने 2020 में भी भाजपा से स्नातक सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी की थी, लेकिन पार्टी ने उनकी बजाय दिनेश गोयल को टिकट दे दिया। जिस पर उन्होंने बगावत कर दी थी, लेकिन बाद में पार्टी नेताओं के समझाने पर नामांकन वापस ले लिया। वे इस बार भी चुनावी तैयारी में जुटे हैं। इसी तरह से मेरठ के विक्रांत त्यागी वशिष्ठ भी कई वर्ष से स्नातक एमएलसी सीट पर चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे हैं। वे सोशल मीडिया पर पूरी तरह से सक्रिय है।
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मेरठ। एमएलसी शिक्षक व स्नातक सीटों पर चुनाव की तैयारी तेज हो गई है। 2026 में होने वाले एमएलसी चुनाव माध्यमिक शिक्षक संघों के लिए अस्तित्व की लड़ाई साबित होंगे। पिछले चुनाव में भाजपा ने शिक्षक दलों का वर्चस्व समाप्त कर दिया था। भाजपा की कसरत इस बढ़त को अगले चुनाव में भी बरकरार रखने की है तो शिक्षक संघों के सामने अपना सियासी अस्तित्व बचाने की जंग है।
मेरठ-सहारनपुर शिक्षक व स्नातक एमएलसी की सीटों पर 2020 में हुए चुनाव में भाजपा ने माध्यमिक शिक्षक संघ शर्मा गुट को करारी शिकस्त दी थी। शिक्षक सीट पर भाजपा के श्रीचंद शर्मा ने दिग्गज शिक्षक नेता स्वर्गीय ओमप्रकाश शर्मा को (आठ बार के एमएलसी) को करारी शिकस्त दी थी। इसी तरह से स्नातक सीट पर भाजपा के दिनेश गोयल ने माध्यमिक शिक्षक संघ के हेम सिंह पुंडीर (चार बार के एमएलसी) को हराकर जीत हासिल की। इसी तरह के चुनाव परिणाम दूसरी सीटों पर आए।
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शिक्षक संघों से सामने आएंगे नए चेहरे
शिक्षक सीट पर माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई गुट के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. उमेश चंद्र त्यागी को भी लगातार चौथी बार हार झेलनी पड़ी थी। ऐसे में इस बार उनका चुनाव लड़ने का मन नहीं बन रहा। शर्मा गुट ने भी मेरठ के जिलाध्यक्ष गजेंद्र वर्मा को शिक्षक सीट से अपना उम्मीदवार घोषित किया है। ऐसी ही स्थिति स्नातक सीट पर भी है। ऐसे में साफ है कि शिक्षक संघों से नए प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरेंगे।
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शिक्षक संघों के सामने अस्तित्व की लड़ाई
शिक्षक संघों से अधिकतर सरकारी सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों के शिक्षक ही चुनाव लड़ते हैं। मेरठ-सहारनपुर मंडल के नौ जिलों में इनकी लगभग 50 हजार वोट ही है, जबकि वित्तविहीन शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों के वोट इनसे कई गुणा है। वित्तविहीन शिक्षकों का झुकाव राजनीतिक दलों की ओर अधिक होता है। ऐसे में 2026 का चुनाव शिक्षक संघों के लिए अस्तित्व की जंग है।
निर्दलीय भी ठोंकने की तैयारी में जुटे
स्नातक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में जुटे हैं। मुजफ्फरनगर के उद्यमी कुश पुरी ने 2020 में भी भाजपा से स्नातक सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी की थी, लेकिन पार्टी ने उनकी बजाय दिनेश गोयल को टिकट दे दिया। जिस पर उन्होंने बगावत कर दी थी, लेकिन बाद में पार्टी नेताओं के समझाने पर नामांकन वापस ले लिया। वे इस बार भी चुनावी तैयारी में जुटे हैं। इसी तरह से मेरठ के विक्रांत त्यागी वशिष्ठ भी कई वर्ष से स्नातक एमएलसी सीट पर चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे हैं। वे सोशल मीडिया पर पूरी तरह से सक्रिय है।