लखनऊ में पकड़े गए खून के गोरखधंधे पर बोले योगी के मंत्री, कही ये बड़ी बातें
लखनऊ में हुई खून के गोरखधंधे की घटना पर प्रदेश के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह बोले। उन्होंने कहा कि लखनऊ में एसटीएफ के माध्यम से खून के गोरखधंधे का भंडाफोड़ किया गया है। यह बड़ा नेटवर्क है, जिसे टूटने में समय लग रहा है। उन्होंने कहा कि गोरखधंधा करने वाले गरीब लोगों को पैसे का लालच देकर ब्लड ले लेते हैं। फिर खून में पानी मिलाकर ब्लड बैंकों को सप्लाई कर रहे थे। इसमें अस्पतालों के ब्लड बैंक में लंबे समय से कार्यरत लोगों की भी भूमिका है। इसलिए इसको तोड़ने में समय लग रहा है। ऐसे बाबुओं या कर्मचारियों का स्थानांतरण करते हैं तो सिफारिशें आनी शुरू हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि आईएमए ने जिस तरह इस ब्लड बैंक की शुरुआत की है, इससे गोरखधंधों पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।
मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि प्रदेश में 150 सीएचसी पर निजी अस्पताल संचालकों द्वारा 100-100 बेड के अस्पताल खोले जाने की योजना तैयार की गई है। इसके लिए प्रदेश के हर जिले में दो-दो सीएचसी चिहिन्त किए जा रहे हैं। इन अस्पतालों को सीएचसी की जमीन 30 साल के लिए लीज पर दी जाएगी। इसमें मैक्स और अपोलो जैसे बड़े संस्थान दिलचस्पी दिखा रहे हैं। छोटे अस्पताल और नर्सिंग होम संचालक भी इसकी शुरुआत कर सकते हैं। योजना पीपीपी मॉडल (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) पर आधारित होगी। इसमें ओपीडी का खर्चा सरकार देगी और भर्ती मरीजों का इलाज आयुष्मान योजना से होगा। कुछ चार्ज फिक्स किए जाएंगे।
स्वास्थ्य मंत्री ने निजी चिकित्सकों से सरकारी अस्पतालों में सेवाएं देने का आह्वान किया। कहा कि जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं हैं। इनकी भरपाई तभी हो सकती है, जब निजी चिकित्सक सहयोग करें। वह उनके लिए अस्पताल में तमाम व्यवस्था कराने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि उप्र में 970 रेडियोलॉजिस्ट की जगह है। लेकिन हैं सिर्फ 117 रेडियोलॉजिस्ट। निजी चिकित्सा में पैसा है, लेकिन डॉक्टरों को सामाजिकता के हिसाब से सोचना होगा। पहले भी आग्रह किया था और अब फिर दिल से कह रहे हैं।
आईएमए का रहा अहम योगदान
मस्तिष्क ज्वर या इंसेफेलाइटिस की चपेट में आकर पिछले साल अगस्त में गोरखपुर के अस्पताल में बच्चों की मौत के मामले आईएमए की मदद के बाद काफी कम हो गए हैं। पिछले साल 500 मरीज आए थे, जिनमें 100 की मौत हो गई थी। जबकि इस बार सिर्फ 80 मरीज आए और महज छह की मौत हुई। आईएमए का इसे रोकने में अहम योगदान रहा। 400 डॉक्टरों ने मिलकर इस बीमारी को रोकने की ट्रेनिंग ली। आशा और एएनएम ने भी योगदान किया। जागरूक करने के लिए 66 लाख घरों में प्रचार किया गया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से टीवी पर यह घटना दिखाई गई थी, वास्तव में ऐसा नहीं हुआ था।
आयुष्मान में शामिल होंगे दो हजार अस्पताल
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत के तहत प्रदेश में 1200 अस्पताल शामिल हो गए हैं। इनमें 400 से 500 सरकारी अस्पताल हैं और बाकी निजी अस्पताल। उन्होंने कहा कि इसमें इलाज के रेट भी बढ़ाए जाएंगे। प्रदेश में 1500 अस्पतालों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन उम्मीद है कि दो हजार अस्पताल शामिल कर लिए जाएंगे। पिछले एक माह में ही प्रदेश में एक हजार से ज्यादा पात्रों का इलाज हुआ है। 600 से ज्यादा का पेमेंट भी हो चुका है। जीका के संबंध में उन्होंने कहा कि इसकी जांच दिल्ली में कराई जा सकती है। प्रदेश में अलर्ट नहीं गाइडलाइंस जारी की गई थीं।
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