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मंत्री जी का दौरा खत्म... आईसीयू का ताला बंद
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मंत्री जी का दौरा खत्म... आईसीयू का ताला बंद
मेरठ। पिछले दिनों मेरठ दौरे पर आए प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा और चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह को दिखाने के लिए जिला अस्पताल की आईसीयू खोली गई। उसमें एक मरीज भी भर्ती किया गया, लेकिन मंत्रियों के दौरे खत्म होते ही आईसीयू पर ताला जड़ दिया गया। इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
लोगों को उम्मीद जगी थी कि गंभीर मरीजों के लिए पीएल शर्मा जिला चिकित्सालय में 12 बेड की इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) आखिरकार शुरू हो गई। इसकी बिल्डिंग दो साल से बनकर तैयार थी। यह यूनिट बजट और स्टाफ के अभाव में चालू नहीं हो पाई थी। लोग इसके बाहर सोते रहते थे। पिछले साल शासन ने इसका ब्योरा मांगा था और तय किया गया था कि मई माह के अंत तक इसे चालू किया जाएगा। मगर इस साल अक्तूबर तक भी यह शुरू नहीं हो पाई। लेकिन जब अक्तूबर के आखिरी सप्ताह और नवंबर माह में मंत्रियों और प्रभारियों के निरीक्षण का दौर चला तो इसे खोल दिया गया और उसमें मरीज भी भर्ती किया गया। डर था कि कहीं ‘मंत्री जी’ आईसीयू का निरीक्षण करने न पहुंच जाए। लिहाजा 12 वेंटिलेटर न होने के बावजूद इसे चालू कर दिया गया था। उस समय जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक का कहना था कि आईसीयू के लिए स्टाफ और वेंटिलेटर की अभी भी दरकार है। फिलहाल अस्पताल के ही पुराने स्टाफ को इसमें लगाया गया है। मरीजों की परेशानी को देखते हुए इसे चलाया गया है।
स्टाफ नहीं, कैसे चलाएं आईसीयू
अब जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. पीके बंसल का कहना है कि स्टाफ की मांग की गई थी, मगर स्टाफ नहीं मिला है। ऐसे में आईसीयू को संचालित करना मुश्किल है। अस्पताल में पहले ही स्टाफ कम है। इसके लिए शासन से पत्राचार किया जा रहा है। अभी भी इसमें वेंटिलेटर सुविधा नहीं है।
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मेरठ। पिछले दिनों मेरठ दौरे पर आए प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा और चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह को दिखाने के लिए जिला अस्पताल की आईसीयू खोली गई। उसमें एक मरीज भी भर्ती किया गया, लेकिन मंत्रियों के दौरे खत्म होते ही आईसीयू पर ताला जड़ दिया गया। इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
लोगों को उम्मीद जगी थी कि गंभीर मरीजों के लिए पीएल शर्मा जिला चिकित्सालय में 12 बेड की इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) आखिरकार शुरू हो गई। इसकी बिल्डिंग दो साल से बनकर तैयार थी। यह यूनिट बजट और स्टाफ के अभाव में चालू नहीं हो पाई थी। लोग इसके बाहर सोते रहते थे। पिछले साल शासन ने इसका ब्योरा मांगा था और तय किया गया था कि मई माह के अंत तक इसे चालू किया जाएगा। मगर इस साल अक्तूबर तक भी यह शुरू नहीं हो पाई। लेकिन जब अक्तूबर के आखिरी सप्ताह और नवंबर माह में मंत्रियों और प्रभारियों के निरीक्षण का दौर चला तो इसे खोल दिया गया और उसमें मरीज भी भर्ती किया गया। डर था कि कहीं ‘मंत्री जी’ आईसीयू का निरीक्षण करने न पहुंच जाए। लिहाजा 12 वेंटिलेटर न होने के बावजूद इसे चालू कर दिया गया था। उस समय जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक का कहना था कि आईसीयू के लिए स्टाफ और वेंटिलेटर की अभी भी दरकार है। फिलहाल अस्पताल के ही पुराने स्टाफ को इसमें लगाया गया है। मरीजों की परेशानी को देखते हुए इसे चलाया गया है।
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स्टाफ नहीं, कैसे चलाएं आईसीयू
अब जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. पीके बंसल का कहना है कि स्टाफ की मांग की गई थी, मगर स्टाफ नहीं मिला है। ऐसे में आईसीयू को संचालित करना मुश्किल है। अस्पताल में पहले ही स्टाफ कम है। इसके लिए शासन से पत्राचार किया जा रहा है। अभी भी इसमें वेंटिलेटर सुविधा नहीं है।
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