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करोड़पति बंदी, एक माह में खर्च करता था तीन लाख

Sun, 18 Aug 2019 01:36 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 18 Aug 2019 01:36 AM IST
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Millionaire captive, used to spend three lakhs in a month
मेरठ। नोएडा में पान मसाला कंपनी के निदेशक रहे और 263 करोड़ की टैक्स चोरी में गिरफ्तार मनोज अरोड़ा ने पूछताछ में कई खुलासे किए हैं। यह कारोबारी करीब ढाई साल से टैक्स चोरी में मेरठ जेल में बंद था। बीती 10 अगस्त को उसे मेरठ पुलिस की कस्टडी में एम्स दिल्ली ले जाया गया था, जहां से वह फरार हो गया था। अब पकड़े जाने के बाद उसने यह खुलासा कर सनसनी फैला दी कि जेल में रहने के दौरान उसका एक माह का खर्चा करीब तीन लाख रुपये होता था।
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मनोज अरोड़ा को भले ही दिल्ली से पकड़कर पुलिस ने जेल भेज दिया हो। लेकिन पूछताछ में उसने जो कहा, उसने पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों को हैरान कर दिया है। मनोज की नोएडा में एक शराब पार्टी की वीडियो वायरल होने के बाद मेरठ जेल के एक अधिकारी पर भी पूर्व में गाज गिर चुकी है। अब फिर से जेल के डॉक्टर और कर्मचारी संदेह के घेरे में हैं। पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार कारोबारी मनोज को स्टेंट पड़ने थे, जिसके चलते मेरठ पुलिस लाइन से हेड कांस्टेबल ज्वाला सिंह, कांस्टेबल अरुण कुमार और संदीप कुमार उसे 10 अगस्त को मेरठ जेल से एम्स हॉस्पिटल दिल्ली लेकर गए थे। लेकिन मनोज तीनों पुलिसकर्मियों को झांसा देकर इनोवा गाड़ी से फरार हो गया था। फरारी के अगले दिन पुलिस ने इनोवा को सिरसा से बरामद किया था। एसएसपी अजय साहनी ने लापरवाही पर तीनों पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया था। बीते बुधवार को मनोज दिल्ली में पकड़ा गया। मेरठ पुलिस ने उसे रिमांड पर लाकर शुक्रवार को पूछताछ के बाद जिला जेल भेज दिया था।
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पुलिस के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बंदी मनोज ने पूछताछ में बताया कि उसका जेल में एक माह में करीब तीन लाख रुपये खर्चा आता था। उसे पेशी या अस्पताल लाने व ले जाने वाले प्रत्येक सिपाही को एक बार में दस हजार रुपये खर्च किए जाते थे। दिल्ली के लिए इलाज के नाम पर भेजने वाले डॉक्टर को आठ हजार रुपये प्रति सप्ताह, कचहरी स्थित हवालात के हेड पुलिसकर्मी को दस हजार रुपये दिए जाते थे। पुलिस लाइन से लाने-ले जाने वाले सिपाहियों को 10-10 हजार रुपये दिए जाते थे। जेल से अस्पताल आने-जाने में सुविधा के नाम पर वह मोटा पैसा खर्च करता था।
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पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह जांच का विषय है कि मनोज अरोड़ा को आखिर ऐसी कौन सी बीमारी है जिसका दो साल से दिल्ली में इलाज चल रहा है। दिल्ली में भी मनोज अरोड़ा ने मोटी रकम देने की बात कही है। मनोज से मिलाई के नाम पर भी साठगांठ के आरोप की बात पुलिस अधिकारियों के सामने आई है। पुलिस अफसरों का कहना है कि पेशी पर लाने ले जाने वाले सिपाही, कचहरी स्थित लॉकअप के हेड मोहर्रिर, डॉक्टर, जेल के कुछ कर्मचारी संदेह के घेरे में हैं। मनोज जब जेल गया तो तो उसका वजन करीब 180 किलो था। जिसका मौजूद समय में वजन 130 किग्रा बताया गया है।
खाना खाने गए थे पुलिसकर्मी
बंदी मनोज ने पुलिस अफसरों को बताया कि दिल्ली में एम्स के बाहर वह इनोवा में था। इस बीच तीनों पुलिसकर्मी खाना खाने चले गये। जिसके बाद वह खुद ही इनोवा कार लेकर फरार हुआ था। उसके मोबाइल में दिल्ली की एक कंपनी का सिम चल रहा था, उसी से उसे ट्रेस कर पुलिस ने उसे पकड़ा था।

साजिशन आरोप लगा रहा है
मनोज अरोड़ा टैक्स चोरी के मामले में जेल में बंद है। वह छवि खराब करने के लिए साजिशन आरोप लगा रहा है, इसमें कोई भी सच्चाई नहीं है। पुलिसकर्मियों को चकमा देकर फरार भी हो चुका है, जिसका इलाज भी दिल्ली में चल रहा है। पूरी प्रक्रिया के तहत मिलाई कराई जाती है। जेल में इसको कोई सुविधा नहीं दी जा रही। जमानत नहीं हो रही पा रही है तो छवि खराब कर रहा है। -बीडी पांडेय, वरिष्ठ जेल अधीक्षक मेरठ
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