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रोबोट, ऑप्टिकल डिवाइस में सूक्ष्म उपकरण बेहद उपयोगी : प्रो. रमेश चंद्रा
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मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के अटल सभागार में चल रही फोटॉनिक्स एंड इमर्जिंग मैटेरियल्स फ़ॉर फ्यूचरिस्टिक टेक्नोलॉजी (पीईएमएफटी-2025) के दूसरे दिन शुक्रवार को वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने व्याख्यान दिए। इसमें आईआईटी रुड़की के प्रो. रमेश चंद्रा सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि रोबोट और ऑप्टिकल डिवाइस में सुक्ष्म उपकरण बेहद उपयोगी हैं। भविष्य में हल्के उपकरणों का प्रयोग और बढ़ेगा।
कार्यक्रम में प्रो. रमेश चंद्रा, डॉ. अंजनी तिवारी सीएसआईआर-एनपीएल दिल्ली के डॉ. अशोक कुमार, जेएनयू दिल्ली के प्रो. पवन कुमार ने लेजर तकनीक क्षेत्र में सूक्ष्म और तीक्ष्ण प्रकाश बिंदु तैयार करने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चिकित्सा, मशीन निर्माण और और डाटा संग्रह जैसे क्षेत्रों में भी यह तकनीक उपयोगी हो सकती है।
टेराहर्ट्ज़ तकनीक से जुड़े व्याख्यानों में उन आधुनिक तरीकों पर भी मंथन किया गया, जिससे संचार, सुरक्षा, जांच और संवेदनशील डिटेक्शन सिस्टम के विकास में मदद मिल सके।ऊर्जा आधारित तकनीकों पर भी चर्चा की गई। शोधकर्ताओं ने कम लागत में हाइड्रोजन उत्पादन, बेहतर सौर ऊर्जा उपकरण और उन्नत बैटरियों को विकसित करने के बारे में बताया।
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उन्होंने कहा कि ग्राफीन, एमएक्सीन सहित अन्य आधुनिक पदार्थों पर हुए अध्ययनों से यह संकेत मिला कि भविष्य में अधिक टिकाऊ और तेज चार्ज होने वाली ऊर्जा प्रणालियां तैयार की जा सकती हैं। फेरोफ्लुइड जैसे तरल पदार्थों में सूक्ष्म चुंबकीय कण होते हैं। ये मशीनों में घर्षण कम करने और ऊर्जा उत्पादन में उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं।
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कार्यक्रम में प्रो. रमेश चंद्रा, डॉ. अंजनी तिवारी सीएसआईआर-एनपीएल दिल्ली के डॉ. अशोक कुमार, जेएनयू दिल्ली के प्रो. पवन कुमार ने लेजर तकनीक क्षेत्र में सूक्ष्म और तीक्ष्ण प्रकाश बिंदु तैयार करने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चिकित्सा, मशीन निर्माण और और डाटा संग्रह जैसे क्षेत्रों में भी यह तकनीक उपयोगी हो सकती है।
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टेराहर्ट्ज़ तकनीक से जुड़े व्याख्यानों में उन आधुनिक तरीकों पर भी मंथन किया गया, जिससे संचार, सुरक्षा, जांच और संवेदनशील डिटेक्शन सिस्टम के विकास में मदद मिल सके।ऊर्जा आधारित तकनीकों पर भी चर्चा की गई। शोधकर्ताओं ने कम लागत में हाइड्रोजन उत्पादन, बेहतर सौर ऊर्जा उपकरण और उन्नत बैटरियों को विकसित करने के बारे में बताया।
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उन्होंने कहा कि ग्राफीन, एमएक्सीन सहित अन्य आधुनिक पदार्थों पर हुए अध्ययनों से यह संकेत मिला कि भविष्य में अधिक टिकाऊ और तेज चार्ज होने वाली ऊर्जा प्रणालियां तैयार की जा सकती हैं। फेरोफ्लुइड जैसे तरल पदार्थों में सूक्ष्म चुंबकीय कण होते हैं। ये मशीनों में घर्षण कम करने और ऊर्जा उत्पादन में उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं।