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Meerut: द्वितीय विश्व युद्ध का टी-55 टैंक बढ़ाएगा मेरठ कॉलेज की शान, विजयंत टैंक पहले से बता रहा सेना का शौर्य

Sun, 30 Apr 2023 12:28 PM IST
Dimple Sirohi सचिन त्यागी, अमर उजाला, मेरठ
सचिन त्यागी, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 30 Apr 2023 12:28 PM IST
सार

प्रधानमंत्री के प्रस्तावित मेरठ दौरे को लेकर छावनी क्षेत्र में तैयारियां शुरू हो गई हैं। मेरठ कॉलेज में पुणे से लाकर द्वितीय विश्व युद्ध का टी-55 टैंक 10 मई से पहले स्थापित किया जाएगा। वहीं विजयंत टैंक यहां पहले ही सेना की शौर्यगाथा कह रहा है।

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Meerut: World War II T-55 tank will increase the glory of Meerut College
मेरठ कॉलेज मेरठ

विस्तार

द्वितीय विश्व युद्ध का टी-55 टैंक अब मेरठ कॉलेज की शान बढ़ाएगा। 10 मई से पहले यह टैंक कॉलेज में स्थापित किया जाएगा। टैंक पुणे से आ रहा है।  कॉलेज के मेन गेट के पास लगाया जाने वाला ये टैंक छात्र-छात्राओं के साथ शहर को भी सेना की वीरता का संदेश देगा। विजयंत टैंक पहले ही कॉलेज में सेना के शौर्य की कहानी बता रहा है।  

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1892 में बने मेरठ कॉलेज में सन 1939 को डिफेंस स्ट्डीज विभाग की शुरुआत हुई। उस वक्त यहां डिप्लोमा कोर्स था। सन 1972 में विषयों की शुरुआत हुई और फिर 1982 से पीएचडी होनी लगी। इसके बाद से विभाग ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सेना के बड़े 25 अधिकारी यहां से रिसर्च कर चुके हैं। सीडीएस लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत ने भी यहीं से पीएचडी की थी।
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डिफेंस स्ट्डीज विभाग का अपना वार म्यूजियम है। इसमें छात्रों को सेना और युद्धों के बारे में जानकारी दी जाती है। विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. हेमंत पांडे के कार्यकाल में कॉलेज को विजयंत टैंक का तोहफा मिला था, उन्हीं के कार्यकाल में अब टी 55 टैंक मिलने जा रहा है, ये अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।

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Meerut: World War II T-55 tank will increase the glory of Meerut College

द्वितीय विश्व युद्ध में सोवियत यूनियन ने बनाया था टैंक
 टी-55 टैंक द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सोवियत यूनियन ने बनाया था। भारतीय सेना में अपने 40 साल की सेवा के दौरान यह टैंक मुख्य बैटल टैंक के तौर पर अहम भूमिका में रहा है। इसके बाद सेना की ओर से लड़े गए तमाम युद्धों में दुश्मन के खिलाफ ये टैंक हमेशा बलशाली रहा। ये टैंक 43 आर्म्ड यूनिट में 28 अगस्त 1978 को कमीशन हुआ था। सर्विस के दौरान कई ऑपरेशनों में इसका योगदान रहा।

कारगिल युद्ध के समय इसे पश्चिमी सेक्टर में तैनात किया गया था। टी-55 वर्ग का यह टैंक 35 साल सेवा में रहने के बाद एक मार्च 2013 को सेवा से बाहर किया गया। भारतीय सेना में टी-55 टैंकों के स्थान पर टी-90 टैंकों को शामिल किया गया। मेरठ में सेना की 510 बेस वर्कशॉप के मुख्य मार्ग पर रखे गए दो टैंक भी टी-55 हैं।

Meerut: World War II T-55 tank will increase the glory of Meerut College
टैंक मेरठ - फोटो : अमर उजाला

2018 में मिला था कॉलेज को विजयंत टैंक 
1965 और 1971 की लड़ाई में विजयंत टैंक ने सेना को पाक सेना को धूल चटा दी थी। इस टैंक ने ही दुश्मन के 7 लड़ाकू विमानों को मार गिराया था, जो भारतीय सीमा के भीतर घुसकर तबाही मचाने का प्रयास कर रहे थे।

सेना के बेड़े से बाहर होने के बाद इन टैंकों को देश के अलग-अलग कैंट में स्थापित किया जाना था। मेरठ कालेज का रक्षा अध्ययन विभाग इस प्रयास में था कि उसके वार रूम म्यूजियम में भी यह टैंक हो। 2018 में प्रो. हेमंत पांडे के प्रस्ताव पर यह टैंक भारतीय सेना ने अपने बेड़े से बाहर होने के बाद मेरठ कॉलेज को दे दिया था।

Meerut: World War II T-55 tank will increase the glory of Meerut College
पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचा है यहां का मेधावी छात्र
पश्चिमी यूपी के सबसे बड़े कॉलेज मेरठ कॉलेज की स्थापना सन 1892 में हुई थी। मेरठ कॉलेज के एल्युमिनाई की लिस्ट में देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह से लेकर तमाम अधिकारी और बिजनेसमैन शामिल हैं। नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल हों या सीडीएस बिपिन रावत।

आईआईटी दिल्ली के पूर्व डायरेक्टर पदमश्री डॉ. आरएस सिरोही हों या फिर टीआईएफटी मुंबई के डायरेक्टर डॉ. वीरेंद्र सिंह। बिट्स गोआ के डायरेक्टर डॉ. टीसी गोयल, रिटायर वाइस एयर मार्शल केके. जैन, रिटायर लेफ्टिनेंट जनरल जेएस भटनागर, डीआरडीओ के डायरेक्टर रहे पीसी मांगलिक हों या इंटेलीजेंस ब्यूरो ऑफ इंडिया के पूर्व डायरेक्टर केपी सिंह ने सभी ने यहां से पढ़कर कामयाबी हासिल की।

Meerut: World War II T-55 tank will increase the glory of Meerut College
बरगद के पेड़ के नीचे बापू को सुनने उमड़ पड़े थे छात्र-छात्राएं - फोटो : अमर उजाला

क्रांति की जो ज्वाला भड़की थी उसमें भी मेरठ कॉलेज का बड़ा योगदान था। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भी दो बार मेरठ कॉलेज में आए थे उनकी सभा हुई थी। मेरठ कॉलेज के छात्रों ने क्रांति की लड़ाई में समय-समय पर आंदोलन किया था।

फौज के अफसरों की पहली पसंद कॉलेज 
मेरठ कॉलेज शोध के लिए फौज के अफसरों की पहली पसंद है। 60 से ज्यादा फौज के अफसर यहां से पीएचडी कर चुके हैं। 

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