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मेरठ: महिलाओं ने नगर निगम से निकाला मशाल जुलूस, बोलीं- आठ मौतों पर भी नहीं जागे अधिकारी; दे डाली ये चेतावनी

Fri, 09 Oct 2026 12:25 AM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: Mohd Mustakim Updated Fri, 09 Oct 2026 12:25 AM IST
सार

शंकरनगर की महिलाओं ने मूलभूत सुविधाओं के लिए नगर निगम में आठ घंटे तक धरना दिया। अधिकारी नहीं आए तो महिलाओं ने कमिश्नरी की ओर मशाल लेकर कूच कर दिया। इसके बाद अधिकारी दौड़े और 15 दिन में समाधान का आश्वासन दिया। 

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Meerut: Women took out a torchlight procession from the Municipal Corporation
नगर निगम के बाहर प्रदर्शन करतीं महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शंकरनगर में सड़क, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और सफाई जैसी समस्याओं को लेकर नगर निगम में दिनभर धरने पर बैठीं महिलाओं का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा। करीब आठ घंटे तक नारेबाजी और प्रदर्शन के बावजूद जब निगम के जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे तो महिलाओं ने हाथों में मशाल थाम ली और निगम परिसर से कमिश्नरी की ओर कूच कर दिया। 
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महिलाओं को आगे बढ़ता देख पुलिस फोर्स ने घंटाघर पर उन्हें रोक लिया। इसके बाद निगम के अधिकारी मौके पर पहुंचे और समस्याओं को सुना। 15 दिन में समस्या का निस्तारण कराने के आश्वासन के बाद महिलाएं शांत हुईं और वापस लौट गईं।
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वार्ड-6 के पार्षद प्रशांत कसाना के नेतृत्व में बृहस्पतिवार सुबह करीब 10 बजे आठ ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार होकर 100 से अधिक लोग नगर निगम परिसर पहुंचे। वहां कोई अधिकारी नहीं मिला तो लोगों ने धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शन में महिलाओं की संख्या अधिक रही। महिलाओं ने कहा कि शंकरनगर में करीब 35 साल से सड़क और पेयजल की समस्या बनी हुई है। स्ट्रीट लाइट नहीं होने के कारण आए दिन हादसे होते हैं। 
 
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प्रदर्शनकारियों के मुताबिक तीन साल के भीतर एक मासूम बच्चे सहित आठ लोगों की हादसों में मौत हो चुकी है। महिलाओं ने आरोप लगाया कि मलिन बस्ती में नगर निगम ने विकास कार्य कराना बंद कर दिया है। सफाई व्यवस्था से लेकर सड़क निर्माण तक की कई समस्याएं हैं। उमस भरी गर्मी में महिलाएं घंटों सड़क पर बैठी रहीं, लेकिन जिम्मेदार अफसरों के मौके पर नहीं पहुंचने से उनका आक्रोश बढ़ता गया।
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आश्वासन से नहीं मानीं महिलाएं, मुख्य अभियंता को बुलाने पर अड़ीं
दोपहर करीब 1:30 बजे अपर नगर आयुक्त पंकज सिंह प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे। उन्होंने लोगों से बातचीत कर समस्या के समाधान का आश्वासन दिया, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इसे मानने से इंकार कर दिया। लोगों ने कहा कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर आएं। निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता या नगर आयुक्त खुद पहुंचकर बताएं कि समस्याओं का समाधान कब तक होगा। इस दौरान नगर आयुक्त के पीआरओ पंकज शर्मा संबंधित अधिकारियों को फोन करते रहे, लेकिन कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। शाम करीब छह बजे अंधेरा होने लगा तो महिलाओं ने मशाल जुलूस निकालने का फैसला कर लिया।
 

महिलाएं और धरने पर बैठे लोग हाथों में मशाल लेकर नगर निगम से कमिश्नरी की ओर बढ़ने लगे। इसकी सूचना मिलते ही सीओ कोतवाली संग्राम सिंह, इंस्पेक्टर देहलीगेट अतुल कुमार और पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची। पुलिस ने घंटाघर पर प्रदर्शनकारियों को रोक लिया और महिलाओं को समझाया। साथ ही नगर निगम के अधिकारियों को स्थिति की जानकारी दी गई।
इसके बाद मुख्य अभियंता निर्माण प्रमोद कुमार सिसोदिया, अधिशासी अभियंता देशराज सिंह और अपर नगर आयुक्त पंकज कुमार मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। मुख्य अभियंता ने जल्द सड़क निर्माण का कार्य कराने का आश्वासन दिया। अधिकारियों ने 15 दिन में समस्याओं के निस्तारण का भरोसा दिया। करीब 6:30 बजे तक मौके पर गहमा-गहमी बनी रही। इसके बाद महिलाएं और स्थानीय लोग ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार होकर वापस लौट गए।
 

मलिन बस्ती में विकास कार्य नहीं कराने का आरोप
धरने में वार्ड-31 की पार्षद कीर्ति घोपला, वार्ड-36 के पार्षद आशीष चौधरी, पूर्व पार्षद गजेंद्र सिंह, कर्मवीर सिंह, ईशु पुट्ठा, प्रवीण एडवोकेट, रितिक कसाना, निखिल छोक्कर, राम सिंह नेताजी, महकार मास्टर और शोभाराम समेत अन्य लोग मौजूद रहे। पार्षद प्रशांत कसाना ने आरोप लगाया कि नगर निगम में अधिकारियों ने बैठना ही बंद कर दिया है। आम जनता का पैसा लूटा जा रहा है और कुछ चुनिंदा जगह चिह्नित करके ही विकास कार्य कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मलिन बस्ती में कोई विकास कार्य नहीं कराया जा रहा है। चेतावनी दी कि यदि नगर निगम ने अपनी कार्यशैली में बदलाव नहीं किया तो जल्द बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

 
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