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फुटबॉल 'फीफा' में जाने लायक है या नहीं, अब मेरठ करेगा तय, मिली ये बड़ी जिम्मेदारी

Thu, 20 Dec 2018 11:40 AM IST
Vikas Kumar शालू अग्रवाल, अमर उजाला, मेरठ
शालू अग्रवाल, अमर उजाला, मेरठ Published by: Vikas Kumar Updated Thu, 20 Dec 2018 11:40 AM IST
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Meerut will take charge country first Football Quality Checking Lab  will check football for fifa
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भारत में बनने वाली फुटबॉल दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल मुकाबले फीफा (फेडरेशन इंटरनेशनल द फुटबॉल एसोसिएशन) में जाने के काबिल है या नहीं इसकी जांच अब मेरठ में होगी। केंद्र सरकार ने मेरठ प्रोसेस एंड प्रोडक्ट डवलपमेंट सेंटर (पीपीडीसी) को देश के पहले फुटबॉल एंड हेलमेट क्वालिटी चेकिंग सेंटर संभालने का जिम्मा सौंपा है। 
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वर्ल्ड बैंक के सहयोग से यह प्रोजेक्ट शुरू हो रहा है। इसके तहत फीफा में जाने वाली फुटबॉल, ब्लेडर की क्वालिटी अब भारत में चेक होगी। पीपीडीसी सेंटर से ओके का प्रमाणपत्र मिलने के बाद ही फुटबॉल को फीफा में भेजा जाएगा। यह पहली बार है जब देश में फुटबॉल व खेलों में पहने जाने वाले हेलमेट की गुणवत्ता का परीक्षण होगा।
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अभी तक भारतीय फुटबॉल व हेलमेट निर्माता कंपनियां विदेशों में क्वालिटी चेक कराती हैं, या फिर खरीदार देश स्वयं अपने यहां क्वालिटी चेक कराकर माल खरीदते हैं। अपने देश में ही गुणवत्ता की जांच होने से निर्यातक कंपनियों को फायदा मिलेगा। इसके लिए 10 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भी पास हो चुका है। एडिशनल सेकेट्री एंड डवलपमेंट कमिश्नर एमएसएमई से स्वीकृति मिलते ही इस पर काम शुरू हो जाएगा।
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नौ बिंदुओं पर जांची जाएगी गुणवत्ता
फीफा ने फुटबॉल गुणवत्ता के 9 मानक तय किए हैं। सभी मानकों पर खरी उतरने वाली फुटबॉल ही फीफा में जाती हैं। प्रो मैच से लेकर अंतराष्ट्रीय मैच के अलग मानक हैं। इस लैब में फीफा के सभी 9 मानकों पर जांच होगी। फुटबॉल की परिधि (सरकम्फ्रेंस), गोलाई (स्पेरीसिटी), वजन (वेट), निर्माण सामग्री का भौतिक विश्लेषण (मटेरियल एनालिसिस), पानी सोखने की क्षमता (वॉटर एब्सोरपेशन), उछाल (रीबाउंड), दवाब का नुकसान(लॉस ऑफ प्रेशर),आकार व आकार की माप (शेप एंड साइज़ रीटेंशन), संतुलन (बैलेंस) को जांचा जाएगा।

आउटडोर फुटबॉल, फुटसल (इनडोर गेम है) व बीच सॉकर (समुद्र तट पर खेला जाना वाला फुटबॉल) तीनों की जांच होगी। फीफा क्वालिटी प्रो व फीफा क्वालिटी सहित  फाइनल अंतराष्ट्रीय मैचों व प्रो मैचों के अलग मानक हैं। जिनके लिए फुटबॉल जांची जाएंगी। 

मेरठ में फुटबॉल व स्पोर्ट्स हेलमेट निर्यात का बड़ा कारोबार है। पीपीडीसी पहले से यहां खेल उपकरणों की क्वालिटी जांचता है।  वर्ल्ड बैंक के सहयोग और एमएसएमई दिल्ली द्वारा यह प्रोजेक्ट मिला है। ओखला में प्रोजेक्ट का सेटअप लगेगा। मॉनिटरिंग मेरठ पीपीडीसी की रहेगी। - एसके गुप्ता, डायरेक्टर मेरठ पीपीडीसी 

10 करोड़ की लागत से बनेगी लैब
10 करोड़ रुपए की लागत से पूरी क्वालिटी चैकिंग लैब तैयार होगी। इसमें जर्मनी से फुटबॉल व हेलमेट की गुणवत्ता जांचने के लिए आधुनिक मशीनें आएंगी। मेरठ पीपीडीसी वर्तमान में खेल उपकरणों की गुणवत्ता की जांच कर रहा है इसलिए सरकार ने मेरठ पीपीडीसी को यह जिम्मेदारी सौंपी है।

ओखला में पीपीडीसी मेरठ की 8 हजार स्क्वायर फीट जगह में एक आधुनिक प्रयोगशाला तैयार है, जो खाली पड़ी है। इस प्रोजेक्ट से इस जगह का प्रयोग होगा, वहीं मेरठ में लैब के लिए जमीन मिलने की समस्या है वो भी दूर हो जाएगी। पीपीडीसी 4 हजार स्क्वायर फीट में फुटबॉल क्वालिटी चैकिंग लैब बनाएगा। 

फुटबॉल ब्लेडर और हेलमेट निर्यात हब मेरठ
देश में मेरठ, जालंधर, गुड़गांव में मुख्य रूप से फुटबॉल तैयार होता है। देश में 20 बड़ी कंपनियां हैं जो फुटबॉल बनाकर निर्यात करती हैं। इसमें इंडो रबड़ मेरठ, एचआरएस मेरठ, साकी, निवीया, सेक्स, शर्मा एक्सपोर्ट व कॉस्को कंपनियां फुटबॉल बनाने का काम करती हैं। मेरठ के एचआरएस कंपनी फीफा की फुटबॉल के लिए ब्लेडर सप्लाई करती है। एसजी, एसएस, एसएम, एसएफ, बीडीएम प्रमुख कंपनियां हैं जो स्पोर्ट्स हेलमेट बनाकर निर्यात करती हैं। 

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