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Meerut: शहर की भागदौड़ और प्रदूषण ने थकाया, तो शिवालिक पहाड़ियों की गोद में आशियाना बनाया
Mon, 30 Sep 2024 12:20 AM IST
मोहम्मद मुस्तकीम
राजेन्द्र मौर्य, मेरठ
राजेन्द्र मौर्य, मेरठ
Published by: मोहम्मद मुस्तकीम
Updated Mon, 30 Sep 2024 12:20 AM IST
सार
सहारनपुर में मां शाकंभरी देवी के मंदिर से कुछ दूर शिवालिक पहाड़ियों की गोद में बसे कोठरी गांव का बाहरी क्षेत्र नदियों से घिरा है। यहीं पर्यावरणविद् और पुरातत्व वैज्ञानिक डॉ. उमर सैफ ने एक एकड़ में आशियाना बनाया है।
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शिवालिक के पहाड़ पर बनाया आशियाना।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
शहरों में बढ़ती आबादी के बीच बहुमंजिली इमारतों के लिए पेड़-पौधे काटे जा रहे हैं। इससे न तो सबको ताजी हवा मिल रही है और न ही प्राकृतिक शुद्ध जल। इसके विपरीत गांवों में न केवल आबादी घट रही है, प्रदूषण मुक्त पर्यावरण के बीच ताजी हवा और पीने के लिए शुद्ध प्राकृतिक जल भी भरपूर है।
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डा. उमर सैफ
- फोटो : अमर उजाला
सहारनपुर जनपद में मां शाकंभरी देवी के मंदिर से कुछ दूर शिवालिक पहाड़ियों की गोद में बसे कोठरी गांव का बाहरी क्षेत्र नदियों से घिरा है। नदियों में कभी अचानक पानी बहने लगता है और अक्सर सूखी दिखती है। इसी कारण वहां दूर-दूर तक दुर्गम रास्तों के बीच नदियों की तलहटी में पत्थर ही दिखते हैं। इन्हीं पत्थरों के बीच पर्यावरणविद् और पुरातत्व वैज्ञानिक डॉ. उमर सैफ ने एक एकड़ में आशियाना बनाया है।
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पर्यावरण अनुकूल तकनीक
आशियाने का 80 प्रतिशत हिस्सा हरा-भरा है। 150 से अधिक स्थानीय पेड़-पौधे लगाए गए हैं। फिश पॉन्ड में प्राकृतिक अल्गी और प्लैंकटन का उपयोग कर मछलियों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई है। दो साल से पॉन्ड सेल्फ-सस्टेन है और अब इसमें 22 मछलियां हैं।
सुकून की जिंदगी
आशियाना जिंदगी में शांतिपूर्ण और सुकून भरे वातावरण से पूर्ण है। यहां की ताजी हवा, हरियाली और शुद्ध पानी शहर के प्रदूषित वातावरण वाली अशांत जिंदगी से मुक्ति दिलाता है। यहां उपलब्ध संसाधनों को देखकर इसे ईको फ्रेंडली कहा जाता है।
सौर ऊर्जा
आशियाना ऑफ-ग्रिड और सौर ऊर्जा से पूर्ण है। इसका निर्माण न्यूनतम लाल ईंटों के साथ कंक्रीट सामग्री से ब्लॉक्स बनाकर किया गया है, ताकि प्रदूषण कम हो। ऊर्जा प्रबंधन के लिए एआई का उपयोग इसे स्मार्ट और कुशल बनाता है। घर एलेक्सा और गूगल होम माना जाता है।
आशियाने का 80 प्रतिशत हिस्सा हरा-भरा है। 150 से अधिक स्थानीय पेड़-पौधे लगाए गए हैं। फिश पॉन्ड में प्राकृतिक अल्गी और प्लैंकटन का उपयोग कर मछलियों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई है। दो साल से पॉन्ड सेल्फ-सस्टेन है और अब इसमें 22 मछलियां हैं।
सुकून की जिंदगी
आशियाना जिंदगी में शांतिपूर्ण और सुकून भरे वातावरण से पूर्ण है। यहां की ताजी हवा, हरियाली और शुद्ध पानी शहर के प्रदूषित वातावरण वाली अशांत जिंदगी से मुक्ति दिलाता है। यहां उपलब्ध संसाधनों को देखकर इसे ईको फ्रेंडली कहा जाता है।
सौर ऊर्जा
आशियाना ऑफ-ग्रिड और सौर ऊर्जा से पूर्ण है। इसका निर्माण न्यूनतम लाल ईंटों के साथ कंक्रीट सामग्री से ब्लॉक्स बनाकर किया गया है, ताकि प्रदूषण कम हो। ऊर्जा प्रबंधन के लिए एआई का उपयोग इसे स्मार्ट और कुशल बनाता है। घर एलेक्सा और गूगल होम माना जाता है।
शहर ने थकाया तो गांव ने बुलाया
शहर में रहकर उपलब्धियां हासिल कीं, लेकिन वहां की भीड़, प्रदूषण, और भाग-दौड़ ने मानसिक और शारीरिक रूप से थका दिया था। खेतों में खेलने, नदी किनारे बैठकर मछलियां पकड़ने और रात को तारे गिनने की बचपन की यादें गांव ले आईं और सपनों का घर बना लिया।
- डॉ. उमर सैफ
शहर में रहकर उपलब्धियां हासिल कीं, लेकिन वहां की भीड़, प्रदूषण, और भाग-दौड़ ने मानसिक और शारीरिक रूप से थका दिया था। खेतों में खेलने, नदी किनारे बैठकर मछलियां पकड़ने और रात को तारे गिनने की बचपन की यादें गांव ले आईं और सपनों का घर बना लिया।
- डॉ. उमर सैफ
कचरा प्रबंधन
ठोस कचरे के प्रबंधन के लिए कंपोस्टिंग और रीसाइक्लिंग जैसी तकनीकों का उपयोग किया है। जैविक कचरे को कंपोस्ट में बदलकर इसे बागवानी में उपयोग किया जाता है। तरल कचरे के लिए रीड बेड तकनीक का उपयोग किया है, जो एक प्राकृतिक और स्थायी विधि है। इस तकनीक से पानी को शुद्ध करके पुनः बागवानी में उपयोग किया जाता है।
स्मार्ट होम तकनीक
इस आशियाने में स्मार्ट होम तकनीक का उपयोग किया है, जिससे ऊर्जा की बचत होती है और जीवन आसान बनता है। बागवानी के लिए ड्रिप इरिगेशन सिस्टम का उपयोग किया गया है, जिससे पानी की भी बचत होती है। आशियाने को पूरी तरह आत्मनिर्भर और पर्यावरण अनुकूल बनाया गया है।
ठोस कचरे के प्रबंधन के लिए कंपोस्टिंग और रीसाइक्लिंग जैसी तकनीकों का उपयोग किया है। जैविक कचरे को कंपोस्ट में बदलकर इसे बागवानी में उपयोग किया जाता है। तरल कचरे के लिए रीड बेड तकनीक का उपयोग किया है, जो एक प्राकृतिक और स्थायी विधि है। इस तकनीक से पानी को शुद्ध करके पुनः बागवानी में उपयोग किया जाता है।
स्मार्ट होम तकनीक
इस आशियाने में स्मार्ट होम तकनीक का उपयोग किया है, जिससे ऊर्जा की बचत होती है और जीवन आसान बनता है। बागवानी के लिए ड्रिप इरिगेशन सिस्टम का उपयोग किया गया है, जिससे पानी की भी बचत होती है। आशियाने को पूरी तरह आत्मनिर्भर और पर्यावरण अनुकूल बनाया गया है।
तितली संरक्षण
हर साल लगभग 1000 तितली के कैटरपिलर को पालकर छोड़ दिया जाता है, जिससे सहंसरा वैली में कॉमन लाइम, मॉरमोन, व्हाइट कैबेज, कॉमन टाइगर, ग्रास येलो, अरंडी तितली और कई मोथ की प्रजातियों की संख्या बढ़ गई है। जगह-जगह इनके होस्ट और नेक्टर प्लांट लगाए हैं। पूरे साल हजारों तितलियां खुले में रहती हैं, जिनके लिए स्वस्थ परिस्थिति तंत्र बनाया गया है।
ऑनलाइन व्यवसाय
डा. उमर की बेटी सारा ने पर्यावरण विज्ञान में स्नातक उपाधि प्राप्त की है और अब वह इसी आशियाने से अपना ऑनलाइन नर्सरी और सीड स्टोर चला रही हैं। सारा ने एक छोटे खेत में स्थानीय किसानों की मदद से बीज उगाने शुरू किए और लगभग 2 लाख रुपये कमा लेती हैं। वह इस तरह से बीज उगाती हैं कि घर और आसपास फूलों से भरा रहे और अंत में उसके कुछ बीज दोबारा रोप देती है और बाकी ऑनलाइन बेच देती हैं। सीड बॉल बनाकर वैल्यू एडिशन का काम भी शुरू किया है।
हर साल लगभग 1000 तितली के कैटरपिलर को पालकर छोड़ दिया जाता है, जिससे सहंसरा वैली में कॉमन लाइम, मॉरमोन, व्हाइट कैबेज, कॉमन टाइगर, ग्रास येलो, अरंडी तितली और कई मोथ की प्रजातियों की संख्या बढ़ गई है। जगह-जगह इनके होस्ट और नेक्टर प्लांट लगाए हैं। पूरे साल हजारों तितलियां खुले में रहती हैं, जिनके लिए स्वस्थ परिस्थिति तंत्र बनाया गया है।
ऑनलाइन व्यवसाय
डा. उमर की बेटी सारा ने पर्यावरण विज्ञान में स्नातक उपाधि प्राप्त की है और अब वह इसी आशियाने से अपना ऑनलाइन नर्सरी और सीड स्टोर चला रही हैं। सारा ने एक छोटे खेत में स्थानीय किसानों की मदद से बीज उगाने शुरू किए और लगभग 2 लाख रुपये कमा लेती हैं। वह इस तरह से बीज उगाती हैं कि घर और आसपास फूलों से भरा रहे और अंत में उसके कुछ बीज दोबारा रोप देती है और बाकी ऑनलाइन बेच देती हैं। सीड बॉल बनाकर वैल्यू एडिशन का काम भी शुरू किया है।