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Meerut : खादर में गंगा किनारे पैदा होती है रंजिश की फसल, पानी कम होते ही सक्रिय हो जाते हैं भू माफिया
Fri, 03 Nov 2023 05:02 AM IST
दुष्यंत शर्मा
रविंद्र चौहान, मेरठ
रविंद्र चौहान, मेरठ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 03 Nov 2023 05:02 AM IST
सार
ग्रामीणों के अनुसार, खादर क्षेत्र में सरकारी जमीन पर प्रतिवर्ष अधिकारियों और माफिया की मिलीभगत से रंजिश की फसल तैयार होती है। इसे लेकर गंगा किनारे खूनी खेल खेला जाता है।
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- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हस्तिनापुर के गंगा किनारे खादर क्षेत्र में सरकारी जमीन पर राजस्व विभाग, वन विभाग, स्थानीय पुलिस और माफिया की मिलीभगत से प्रतिवर्ष लाखों का खेल होता है। यहां एक बार नहीं, कई बार मालिकाना हक के लिए खूनी खेल हो चुका है। चार दिन पूर्व बुआ बेला गांव के जंगल में फायरिंग और मारपीट हुई, जिसमें घायल युवक की स्थिति चिंताजनक है। ग्रामीणों के अनुसार, खादर क्षेत्र में सरकारी जमीन पर प्रतिवर्ष अधिकारियों और माफिया की मिलीभगत से रंजिश की फसल तैयार होती है। इसे लेकर गंगा किनारे खूनी खेल खेला जाता है।
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गंगा का पानी कम होते ही अक्तूबर माह से गंगा के आसपास खादर क्षेत्र में सैकड़ों हेक्टेयर सरकारी भूमि पर कब्जे को लेकर भूमाफिया सक्रिय हो जाते हैं। एक-एक माफिया सैकड़ों हेक्टेयर भूमि पर कब्जा कर लेता है। इसके बाद उसे अन्य किसानों को ठेके पर दे दिया जाता है। इसके बदले उन्हें घर बैठे मोटी वसूली होती है। सरकारी जमीन पर कब्जे के लिए वर्चस्व की यह लड़ाई गंगा किनारे पर आम है।
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गंगा के किनारे की सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर कई लोगों की जान भी जा चुकी है। गोली चलना तो यहां आम बात है। खादर क्षेत्र से होकर गुजरने वाली गंगा के दोनों ओर मवाना तहसील की सरकारी भूमि है। पिछले कई वर्षों से विवादों के चलते शासन-प्रशासन और वन विभाग के अधिकारी पूर्ण रूप से अभी तक सरकारी भूमि खाली नहीं करा सके हैं।
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स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि राजस्व अधिकारी-कर्मचारी मोटी रकम वसूल कर भूमाफिया काे सरकारी जमीन पर कब्जा कराते हैं। साठगांठ हो जाने पर भूमाफिया आसपास के किसानों की भूमि पर भी कब्जा कर फसलों की बुवाई करते हैं। जिसका खेत मालिकों द्वारा विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की जाती है। दहशत फैलाने के लिए गोली चलाई जाती हैं। कई बार आपस में जमीन को लेकर हुए विवाद में गंगा की रेती फायरिंग से दहल उठती है।
चार जिलों से लगती है हस्तिनापुर की सीमा
हस्तिनापुर के खादर क्षेत्र में गंगा के आसपास करीब 25 किलोमीटर के क्षेत्रफल में दोनों ओर मवाना तहसील के राजस्व गांव हैं। मेरठ यहां तीन जिलों की सीमाओं को छूता है। यहां मेरठ, मुजफ्फरनगर, अमरोहा और बिजनौर जिले की सीमाएं हैं। इसके चलते यहां भूमाफिया का कब्जा रहता है। गंगा की जल धारा का रुख हर साल बदलता रहता है। कभी इधर तो कभी उधर हो जाती है। जिस कारण जमीन पर कब्जे के लिए यहां हर साल खूनी खेल खेला जाता है।
कब्जामुक्त कराई 200 हेक्टेयर भूमि
गत वर्ष प्रशासनिक अधिकारियों ने वन विभाग की मदद से गंगा किनारे पर सरकारी भूमि को कब्जा मुक्त करने के लिए अभियान चलाया था, जिसमें करीब 200 हेक्टेयर भूमि कब्जा मुक्त कराई गई। इससे भूमाफिया में दहशत बन गई, परंतु अभियान कुछ दिन चलकर ठंडा बस्ते में चला गया।
बड़े पैमाने पर सरकारी भूमि खाली करा दी गई है, जो भूमि बची है उसके लिए टीम लगाई गई है। जल्द ही अभियान चलाकर सरकारी भूमि खाली कराई जाएगी।
-अखिलेश यादव, एसडीएम, मवाना