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Meerut: क्रांतिकारियों पर गोलियां बरसा रहे थे अंग्रेज, बारिश हुई तो खून से लाल हो गईं भामौरी गांव की गलियां
Sun, 18 Aug 2024 01:00 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम
शाह आलम त्यागी
शाह आलम त्यागी
Published by: मोहम्मद मुस्तकीम
Updated Sun, 18 Aug 2024 01:00 PM IST
सार
गांव भामौरी में चौपाल पर एकत्र हुए क्रांतिकारियों पर अंग्रेजी फौज ने घात लगाकर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं। बारिश हुई तो पूरे गांव की गलियां खून से लाल हो गईं।
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भामौरी गांव के शहीद क्रांतिकारी।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सरधना के क्रांतिकारी गांव भामौरी में अंग्रेजों के खिलाफ रणनीति बनाने के लिए चौपाल पर एकत्र हुए ग्रामीणों पर अचानक अंग्रेजी फौज ने घात लगाकर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं। शहीदों के कत्लेआम को देख आसमान भी रो पड़ा और बारिश हो गई, जिस कारण क्रांतिकारियों और घायलों का खून बारिश के पानी के साथ गांव की नालियों में बहने लगा। पूरे गांव की गलियां क्रांतिकारियों के लहू से लाल होने पर लोगों का खून खौल उठा। 18 अगस्त 1942 की इस बर्बरतापूर्ण घटना को अंग्रेजों ने भामौरी में मिनी जलियावाला कांड का नाम दिया।
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गांव का शहीद स्मारक।
- फोटो : अमर उजाला
यह क्रांतिकारी पवित्र मिट्टी आज भी देश के लिए शहादत की गवाही देती है। बता दें कि 18 अगस्त, 1942 को सरधना ब्लॉक के गांव भामौरी में अंग्रेजों के खिलाफ रणनीति बनाने के लिए ग्रामीण चौपाल पर एकत्र हुए थे। अचानक अंग्रेजी फौज ने ग्रामीणों पर घात लगाकर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं। रामस्वरूप शर्मा, प्रहलाद सिंह, फतेह सिंह, लटूर सिंह व बोबल सिंह शहीद हो गए। इसक बाद भी क्रांतिकारी आजादी के लिए अंग्रेजों के सामने सीना ठोक कर खड़े हो गए। जबकि घायल ठा. देवी सिंह, रणधीर, जमादार सिंह, बलजीत सिंह, बाबूराम शर्मा, शिवचरण सिंह, चेतनलाल जैन समेत अनेक क्रांतिकारियों को गिरफ्तार करके मुकदमा चलाया गया। 18 क्रांतिकारियों को 12-12 वर्ष कैद की सजा दी गयी।
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निर्माणाधीन मोटो की चौपाल।
- फोटो : अमर उजाला
ग्राम प्रधान ठा. दिनेश, आनंद सिंह, चंद्रपाल सिंह, महिपाल नंबरदार, उदयवीर सिंह, राजसिंह आदि ने बताया कि अंग्रेज सिपाहियों ने पंडित रामस्वरूप के सीने में तीन गोलियां मारीं। इसके बाद पंडित रामस्वरूप शर्मा को मरणासन्न अवस्था में बंदी बनाकर यातनाएं दी गईं। उनके जख्मों को संगीनों से कुरेदा। वांछित जानकारी नहीं मिलने पर अंग्रेजों ने संगीन से उनकी गर्दन पर वार किए और उन्हें बलिदानी बना दिया। यही नहीं अंग्रेजों ने पंडित रामस्वरूप के शव को ही गायब कर दिया। हालांकि बाल जासूस राजनीत रुहेला ने क्रांतिकारियों को इसकी जानकारी दी।
ग्रामीण बताते हैं कि क्रांतिकारियों ने शव की मांग को लेकर थाना घेर लिया। गांधी आश्रम के सचिव लज्जाराम और ग्रामीणों के तीखे विरोध पर उनके शव को गड्ढे से निकाला गया। इसके बाद थाने में ही अंतिम संस्कार किया गया। इन शहीदों की याद में गांव में स्मारक बना हुआ है। इस कांड के बाद अंग्रेज गवर्नर ने भामौरी गांव को ही बागी घोषित कर दिया। गांव को उड़ाने के लिये ट्रक पर लादकर तोप तक रवाना कर दी गईं। देशभक्त ट्रक चालक लियाकत अली ने ट्रक को झिटकरी के तालाब में धंसा दिया। बाद में गांव को तोप से उड़ाने का फैसला वापस लिया गया। इसके बावजूद गांव से 19 हजार रुपये जुर्माना वसूला गया। शांति देवी ने बताया कि उनके ससुर लटूर सिंह भी अंग्रेजों से लड़कर शहीद हो गए थे। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने ग्राम पहुंचकर पवित्र माटी को नमन किया। वर्तमान में मोटो की चौपाल को गांधी आश्रम बनाया जा चुका है।
इन शहीदों की याद में गांव में स्मारक बना हुआ है। दिनेश प्रधान ने बताया कि क्रांतिकारी महावीर सिंह बम बनाना जान गए थे। अंग्रेजी सिपाहियों को चकमा देने के लिए वह भेष बदलते रहते थे और पुलिस उनकी तलाश में लगी रहती थी। स्वतंत्रता की इस लड़ाई में रणधीर सिंह भी शामिल रहे। हमले के दौरान उन्हें अंग्रेजी सिपाहियों ने गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया। देश की आजादी के बाद तत्कालीन भारत सरकार ने जेल से रिहा करने के आदेश दिए।
ग्रामीण बताते हैं कि क्रांतिकारियों ने शव की मांग को लेकर थाना घेर लिया। गांधी आश्रम के सचिव लज्जाराम और ग्रामीणों के तीखे विरोध पर उनके शव को गड्ढे से निकाला गया। इसके बाद थाने में ही अंतिम संस्कार किया गया। इन शहीदों की याद में गांव में स्मारक बना हुआ है। इस कांड के बाद अंग्रेज गवर्नर ने भामौरी गांव को ही बागी घोषित कर दिया। गांव को उड़ाने के लिये ट्रक पर लादकर तोप तक रवाना कर दी गईं। देशभक्त ट्रक चालक लियाकत अली ने ट्रक को झिटकरी के तालाब में धंसा दिया। बाद में गांव को तोप से उड़ाने का फैसला वापस लिया गया। इसके बावजूद गांव से 19 हजार रुपये जुर्माना वसूला गया। शांति देवी ने बताया कि उनके ससुर लटूर सिंह भी अंग्रेजों से लड़कर शहीद हो गए थे। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने ग्राम पहुंचकर पवित्र माटी को नमन किया। वर्तमान में मोटो की चौपाल को गांधी आश्रम बनाया जा चुका है।
इन शहीदों की याद में गांव में स्मारक बना हुआ है। दिनेश प्रधान ने बताया कि क्रांतिकारी महावीर सिंह बम बनाना जान गए थे। अंग्रेजी सिपाहियों को चकमा देने के लिए वह भेष बदलते रहते थे और पुलिस उनकी तलाश में लगी रहती थी। स्वतंत्रता की इस लड़ाई में रणधीर सिंह भी शामिल रहे। हमले के दौरान उन्हें अंग्रेजी सिपाहियों ने गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया। देश की आजादी के बाद तत्कालीन भारत सरकार ने जेल से रिहा करने के आदेश दिए।