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डिजिटल डस्टबिन, जो एक क्लिक पर चलकर आएगा आपके पास

Sat, 28 Dec 2019 01:06 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 28 Dec 2019 01:06 AM IST
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meerut student make digital dustbin
डिजिटल डस्टबिन, जो एक क्लिक पर चलकर आएगा आपके पास
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मोदीपुरम। स्वच्छ भारत मिशन से प्रेरित होकर पल्लवपुरम निवासी एक छात्र ने डिजिटल डस्टबिन बनाने का दावा किया है। इस डस्टबिन में सेंसर लगे हैं। डस्टबिन के कूड़े से पूरा भरने पर ये सेंसर काम करने लगेंगे और उससे जुड़े मोबाइल नंबर पर इसकी सूचना पहुंच जाएगी। इसके अलावा मोबाइल एप के जरिये एक क्लिक पर इस डिजिटल डस्टबिन को अपने पास बुलाया जा सकता है।
इस डस्टबिन को बनाया है पल्लवपुरम फेज वन निवासी आशुतोष देशवाल ने। आशुतोष पटियाला स्थित थापर यूनिवर्सिटी से एमटेक कर रहे हैं। आशुतोष के पिता दुष्यंत देशवाल गुजरात में एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं, जबकि माता मुकेश देशवाल गृहणी हैं। आशुतोष ने बताया कि स्वच्छता मिशन के लिए कुछ नया करने की सोची थी तो डिजिटल डस्टबिन का आइडिया आया। हालांकि शुुरुआत में थोड़ी मुश्किल आई थी, लेकिन हार नहीं मानी। आशुतोष के मुताबिक इस डस्टबिन के जरिये आम लोगों के साथ ही सफाईकर्मियों का काम भी काफी आसान हो जाएगा और गंदगी की समस्या खत्म हो जाएगी। सड़क पर जरा भी कूड़ा बिखरा नहीं मिलेगा।
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर करता है काम
आशुतोष ने बताया कि यह डस्टबिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम पर काम करता है। डस्टबिन में दो सेंसर, डायोड, माइक्रो कंट्रोलर्स के साथ ही एक सिम कार्ड पैनल लगाया हुआ है। डस्टबिन में जब भी कोई व्यक्ति कूड़ा डालने आएगा तो इसमें लगा सेंसर एक्टिव हो जाएगा और डस्टबिन का ढक्कन स्वयं ही खुल जाएगा। 100 सेकंड तक ढक्कन खुला रहेगा और इसके बाद स्वत: ही बंद भी हो जाएगा। जैसे-जैसे डस्टबिन में कचरा भरता जाएगा सेंसर उसका आंकलन करता रहेगा। डस्टबिन के पूरा भरने पर इससे कनेक्ट मोबाइल पर मैसेज चला जाएगा। जब तक डस्टबिन खाली नहीं होगा हर दो घंटे में इसका मैसेज मोबाइल पर मिलता रहेगा। इसके अलावा डस्टबिन पर लगी स्क्रीन में भी पूरी जानकारी मिलती रहेगी। डस्टबिन को चलाने के लिए 12 वोल्ट पावर की जरूरत होगी, जिसके लिए सोलर प्लेट भी लगाई गई है। इसमें बिजली की आवश्यकता नहीं होगी।
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मलेशिया में दे चुके डेमो
आशुतोष ने बताया कि हाल ही में मलेशिया में अविष्कार नवाचार एवं रचनात्मक विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भी वे इस डिजिटल डस्टबिन का डेमो दे चुके हैं। सम्मेलन में भी इस डस्टबिन की खूब सराहना की गई थी। इस डस्टबिन को बनाने में सात हजार रुपये का खर्चा आया है।
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