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UP: सीसीएसयू की फर्जी डिग्री से सरकारी नौकरी करते मिले सात शिक्षक, ऐसे सामने आई फर्जीवाड़े की हकीकत

Fri, 25 Aug 2023 06:49 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Fri, 25 Aug 2023 06:49 PM IST
सार

Meerut News : सीसीएसयू की फर्जी डिग्री से सात लोगों ने छत्तीसगढ़ में शिक्षक की नौकरी पा ली। वहीं, जांच में पूरे मामले की पोल खुली तो हड़कंप मच गया।

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Meerut: Seven people got government jobs as teachers in Chhattisgarh with fake CCSU degrees
फर्जी डिग्री मामला। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) की फर्जी डिग्री पर छत्तीसगढ़ में सात लोगों ने सरकारी शिक्षक की नौकरी पा ली। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर के बीएसए को शैक्षिक दस्तावेजों पर संदेह हुआ तो उन्होंने यहां विवि से सत्यापन कराया। इसमें यह फर्जीवाड़ा सामने आया। हैरानी की बात तो यह है कि यहां विवि में डीएड कोर्स है भी नहीं, इसके बावजूद इस कोर्स की डिग्री दिखाते हुए एक महिला ने नौकरी हासिल कर ली। सीसीएसयू ने दस्तावेजों की जांच रिपोर्ट छत्तीसगढ़ भेज दी है।

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जिला सूरजपुर के स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय (अंग्रेजी माध्यम) में व्याख्याता, प्रधान पाठक, शिक्षक, सहायक शिक्षक, सहायक शिक्षक प्रयोगशाला आदि पदों पर नियुक्तियां हुई थीं। भर्ती प्रक्रिया के तहत लोगों को चयन कर ज्वाइनिंग कराई गई। कुछ समय बाद सूरजपुर के बीएसए को तीन महिला समेत सात लोगों की डिग्रियों पर संदेह हुआ। उन्होंने एक कर्मी को डिग्री लेकर जांच करने के लिए भेजा। जांच में स्पष्ट हुआ कि 2020 की एमएससी, 2019 की एमएड, 2022 की एमए, 2014 की डीएड, 2022 की बीसीए और एमए की डिग्री फर्जी हैं। इन पर अंकित अंक विवि के मुख्य रजिस्टर पर अंकित अंकों से मेल नहीं खा रहे। इस पर विवि ने दस्तावेज फर्जी होने के बारे में सूरजपुर में बीएसए को अगवत करा दिया है।

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जांच में सामने आया कि एक महिला ने सरकारी स्कूल में नौकरी पाने के लिए सीसीएसयू से वर्ष 2014 में डीएड (डिप्लोमा इन एजुकेशन) के दस्तावेज लगाए हैं, लेकिन यहां अभी तक डीएड कोर्स शुरू ही नहीं हुआ है। डीएड दो साल का डिप्लोमा कोर्स है। इसमें बच्चों को पढ़ाने का तरीका, साइकोलॉजी समझना, क्लासरूम का मैनेजमेंट आदि पढ़ाया जाता है।

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बंगलुरू में डिग्री बेचने का हो चुका खुलासा
दो माह पहले बंगलुरु में स्नातक, बीएड व पीएचडी की डिग्री बेचने का मामला आया था। इससे पूर्व गुजरात, पंजाब, उत्तराखंड, गुजरात, बिहार, पश्चिमी बंगाल, अरुणाचल से कई मामले आए थे। गोपनीय विभाग के सूत्रों का कहना है कि फर्जी डिग्री बनाकर बेचने वाला गिरोह ठिकाना बदल शिकार तलाशता है। बंगलुरू पुलिस ने बताया था कि पीएचडी की डिग्री आठ-दस लाख, बीएड की चार-पांच लाख व स्नातक की डिग्री 50-60 हजार रुपये में बनाई गई थी।

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