फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Meerut, Research Report and pollution is spoiling the lungs

शरीर में इस वजह से लग रही ये खतरनाक बीमारी, नहीं दिया ध्यान तो खराब हो जाएंगे फेफड़े

Wed, 21 Nov 2018 02:23 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Wed, 21 Nov 2018 02:23 PM IST
विज्ञापन
Meerut, Research Report and pollution is spoiling the lungs
फाइल फोटो

विश्व क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीज (सीओपीडी) दिवस हर साल नवंबर के तीसरे बुधवार को मनाया जाता है। सामान्य तौर पर यह फेफड़ों की गंभीर बीमारी है। बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण धूम्रपान न करने वालों को भी यह बीमारी हो रही है। यह उनके फेफड़ों को चपेट में ले रही है। यह बीमारी दुनिया भर में तीसरा सबसे घातक रोग है और करीब 30 मिलियन से अधिक लोगों को प्रभावित कर चुकी है।

विज्ञापन


छाती एवं श्वांस रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरोत्तम तोमर ने बताया कि ‘एक शोध: बर्डन ऑफ ऑब्स्ट्रक्टिव लंग डिसीज’ के अध्ययन में पाया कि धूम्रपान नहीं करने वालों में भी सीओपीडी नामक रोग बढ़ता जा रहा है। विश्व के कुल 30 मिलियन सीओपीडी मरीजों में कम से कम एक चौथाई सीओपीडी से ग्रस्त मरीजों ने कभी धूम्रपान नहीं किया था। उन्होंने बताया कि यह बीमारी हमेशा से धूम्रपान करने वालों का रोग मानी जाती रही है, लेकिन अब यह धूम्रपान नहीं करने वाले विकासशील देशों के नागरिकों के लिए भी गंभीर चुनौती बन चुकी है। यह बीमारी बाहरी वायु प्रदूषण के साथ-साथ घरों में प्रदूषण से सीधा संबंध रखती है। दुनिया भर में अब भी आधी से ज्यादा जनसंख्या खाना बनाने के लिए रसोई में बायोमास ईंधन का प्रयोग करती है। बायोमास ईंधन लकड़ी, पशुओं के गोबर, फसल के अवशेष इत्यादि से पैदा होता है। महिलाओं में यह बीमारी तीन गुना ज्यादा बढ़ी है। इसका मुख्य कारण महिलाओं का रसोई में अधिक समय व्यतीत करना है।
विज्ञापन


डॉ. वीरोत्तम तोमर ने बताया कि बुधवार को विश्व सीओपीडी दिवस पर निशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जाएगा। यह आदर्श नगर स्थित डॉक्टर शिवराज मेमोरियल चेस्ट एंड एलर्जी सेंटर पर पूर्वाह्न 11 एक बजे तक चलेगा। इसमें रजिस्टर्ड 50 मरीजों को निशुल्क परामर्श और जांच की जाएगी। साथ ही मरीजों को उपचार की जानकारी भी जाएगी। इसमें सभी लोग हिस्सा ले सकते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

तीन तरह की होती है सीओपीडी

छाती एवं श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित अग्रवाल ने बताया कि श्वांस मार्ग के आसपास मौजूद छोटी-छोटी मांसपेशियों के कारण श्वास मार्ग दबने लगता है और उसमें बलगम बनने लगता है। वह खांसी के जरिये बाहर आता है। इससे मरीज को फेफड़ों में भारीपन महसूस होता है। उन्होंने बताया कि सीओपीडी तीन तरह की होती है, माइल्ड सीओपीडी, जिसमें खांसी में बलगम आना और सांस फूलना, मोडरेट सीओपीडी में इन दोनों लक्षणों के साथ छाती में इंफेक्शन को ठीक होने में कई सप्ताह लग जाना और सीवियर सीओपीडी इन तीनों लक्षणों के अतिरिक्त बैठे हुए भी सांस फूल जाना है।

कॉइल भी खतरनाक

डॉ. वीरोत्तम तोमर ने बताया कि एक मॉस्किटो कॉइल 100 सिगरेट से ज्यादा धुआं उत्सर्जित करती है। ग्रामीण इलाकों में श्वसन संबंधी रोगों से ग्रस्त अधिकतर मरीजों के विश्लेषण से पता चलता है कि ये उचित इलाज नहीं कराते हैं। इसका आधुनिक इलाज इनहेलर के रूप में उपलब्ध है।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed