वेस्ट यूपी में मौसम: दिन में गर्मी रात में ठंडक, मेरठ में एक्यूआई 314, देश के 250 शहरों में सबसे प्रदूषित शहर
दिवाली से पहले मेरठ की हवा खराब हो गई है। शनिवार सुबह 10:30 बजे शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 314 दर्ज हुआ और मेरठ 250 शहरों में सबसे प्रदूषित रहा। गजरौला का AQI 299 रहा।
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दीपावली से पहले ही मेरठ की हवा दमघोंटू होने लगी है। शनिवार सुबह 10:30 बजे शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 314 दर्ज किया गया। इस स्तर के साथ मेरठ उपलब्ध आंकड़ों में देश के 250 शहरों में सबसे प्रदूषित रहा। वहीं, उत्तर प्रदेश के गजरौला में AQI 299 दर्ज हुआ और वह दूसरे स्थान पर रहा। त्योहार से पहले हवा की गुणवत्ता बिगड़ने से प्रदूषण नियंत्रण के इंतजामों पर सवाल उठ रहे हैं। दीपावली पर आतिशबाजी और दूसरे प्रदूषणकारी कारकों के कारण हालात और बिगड़ने की आशंका है।
रात में बढ़ रही नमी, दिन में गर्मी का असर बरकरार
मेरठ और आसपास के इलाकों में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। रात के समय नमी बढ़ने के साथ ठंडक महसूस होने लगी है, जबकि दिन में गर्मी का असर अभी बना हुआ है। दिन और रात के मौसम में इस बदलाव के बीच हवा की गुणवत्ता भी चिंता बढ़ा रही है।
मौसम की स्थिति प्रदूषण के स्तर को प्रभावित कर सकती है। हवा की गति कम होने पर प्रदूषक कणों का फैलाव प्रभावित होता है और वे स्थानीय वातावरण में अधिक समय तक बने रह सकते हैं। हालांकि, प्रदूषण पर मौसम का वास्तविक असर तापमान, हवा की गति, नमी और वातावरण की अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
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एक्यूआई 314 पहुंचने का क्या है मतलब?
वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI हवा में प्रदूषण के स्तर को बताता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की निर्धारित श्रेणियों के अनुसार, 301 से 400 के बीच AQI को बहुत खराब माना जाता है। मेरठ का 314 तक पहुंचना बताता है कि शहर की हवा स्वास्थ्य के लिहाज से चिंता का विषय बन गई है।
ऐसी हवा में लंबे समय तक रहने से सांस लेने में परेशानी, खांसी और गले में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अस्थमा और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के साथ बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। प्रदूषण के स्तर को देखते हुए खुले में लंबे समय तक व्यायाम करने से बचना और स्थानीय वायु गुणवत्ता संबंधी अपडेट पर नजर रखना उपयोगी रहेगा।
त्योहारी सीजन में प्रदूषण बढ़ने की आशंका के कई कारण हैं। आतिशबाजी के अलावा वाहनों से निकलने वाला धुआं, सड़कों की धूल, निर्माण कार्यों से उड़ने वाले कण और कचरा जलाने जैसी गतिविधियां हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं। यदि हवा की गति कम रहती है, तो प्रदूषक कणों का फैलाव भी प्रभावित हो सकता है।
मेरठ का AQI दीपावली से पहले ही 300 के पार पहुंचने से चिंता बढ़ गई है। त्योहार के दौरान प्रदूषण की स्थिति किस स्तर तक पहुंचेगी, यह मौसम और प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों पर निर्भर करेगा। ऐसे में आने वाले दिनों के AQI आंकड़ों पर नजर रखना जरूरी होगा।
प्रदूषण नियंत्रण के इंतजामों पर सवाल
दीपावली से पहले हवा की गुणवत्ता बिगड़ने के बीच प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करना अहम है। सड़कों की धूल नियंत्रित करने, निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन कराने, खुले में कचरा जलाने पर रोक लगाने और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन की निगरानी जैसे कदम प्रदूषण कम करने में मदद कर सकते हैं।
मेरठ में AQI 314 दर्ज होने के बाद प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने चुनौती बढ़ गई है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि प्रदूषण नियंत्रण के उपाय कितनी प्रभावी तरह से लागू होते हैं और दीपावली के आसपास हवा की गुणवत्ता में कितना बदलाव आता है।