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Meerut: गृहकर के जाल में उलझे शहरवासी, सुविधा शून्य लेकिन टैक्स दोगुना, पार्षदों ने दी आंदोलन की चेतावनी

Fri, 19 Dec 2025 02:14 PM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: डिंपल सिरोही Updated Fri, 19 Dec 2025 02:14 PM IST
सार

नगर निगम द्वारा जारी नए गृहकर बिलों ने शहर में हड़कंप मचा दिया है। बिना सीवर और पानी की सुविधा वाले इलाकों में भी टैक्स दोगुना वसूला जा रहा है। त्रुटिपूर्ण बिलों के खिलाफ पार्षद और जनता आमने-सामने हैं।

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Meerut: Property Tax Controversy Escalates: Citizens Protest Double Tax Without Civic Facilities
हाउस टैक्स। - फोटो : amar ujala

विस्तार

मेरठ नगर निगम में गृहकर को लेकर मचा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। जनता भारी-भरकम और त्रुटिपूर्ण बिलों से त्रस्त है दूसरी तरफ पार्षदों ने निगम प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। स्थिति यह है कि जिन इलाकों में न सीवर लाइन है और न ही नगर निगम के पानी की सप्लाई, वहां भी धड़ल्ले से सीवर और जल कर वसूला जा रहा है। 

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नगर निगम ने जीआईएस सर्वे के आधार पर शहर के करीब 3.50 लाख भवन स्वामियों को बिल जारी किए हैं। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी एसके गौतम के अनुसार, सर्वे में 4.49 लाख भवन चिह्नित थे, जिनमें से भौतिक सत्यापन में एक लाख भवन मिले ही नहीं। अब जो बिल बांटे गए हैं, उनमें भारी विसंगतियां हैं। कई इलाकों में टैक्स पांच से दस गुना तक बढ़कर आया है, जिससे भवन स्वामियों में खलबली मची है।
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सुविधा शुल्क लेकर कम हो रहे बिल 
पार्षदों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि निगम के कर्मचारी और कुछ बिचौलिए भवन स्वामियों से रिश्वत लेकर टैक्स कम करने का खेल खेल रहे हैं। भाजपा पार्षद अनुज वशिष्ठ, रंजन शर्मा और दीपक वर्मा ने बताया कि कर्मचारियों द्वारा पैसा लेकर बिल कम करने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं, लेकिन सिस्टम में कोई स्थाई सुधार नहीं हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इस 'वसूली' और मनमाने टैक्स पर लगाम नहीं लगी, तो पार्षद सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। 

शहर की इस ज्वलंत समस्या पर महापौर हरिकांत अहलूवालिया भी अफसरों से नाराजगी जता चुके हैं। फिलहाल शास्त्रीनगर, कंकरखेड़ा और मुख्यालय जोन में आपत्तियों के निस्तारण के लिए कैंप लगाने की बात कही जा रही है लेकिन धरातल पर लोग अभी भी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। 

बिना ट्रेनिंग के मैदान में कर्मचारी
गृहकर बिलों के वितरण और समाधान के लिए निगम ने 90 अस्थायी कर्मचारियों की भर्ती तो की लेकिन उन्हें उचित प्रशिक्षण नहीं दिया गया। नतीजा यह है कि जब लोग बिलों में सुधार के लिए जाते हैं, तो ये कर्मचारी समाधान करने में असमर्थ नजर आते हैं। पार्षद पंकज गोयल का कहना है कि यदि निगम केवल आपत्तियों का सही ढंग से निस्तारण कर दे तो निगम की आय 60 करोड़ से बढ़कर 200 करोड़ तक पहुंच सकती है लेकिन अधिकारी केवल खानापूर्ति में जुटे हैं।

गृहकर संबंधी आपत्तियों के निस्तारण के लिए मुख्य कर निर्धारण अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई है। सभी अधिकारियों को निर्देश हैं कि भवन स्वामियों की समस्याओं का तुरंत निराकरण करें। लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। - लवी त्रिपाठी, अपर नगर आयुक्त।

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