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मेरठ: उल्देपुर में 100 कालॉनियों को ध्वस्त करने की तैयारी, जोन-ए में 16,726 भवनों का किया जाएगा री-सर्वे

Mon, 28 Sep 2026 10:07 PM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: Mohd Mustakim Updated Mon, 28 Sep 2026 10:07 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ विकास प्राधिकरण को अब उल्देपुर में ध्वस्तीकरण का आदेश दिया है। इसे लेकर कार्ययोजना बनाई जा रही है। वहीं उल्देपुर के लोग मेडा कार्यालय में आकर पूछ रहे हैं कि उनका भवन वैध है या अवैध।

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Meerut: Preparations underway to demolish 100 colonies in Uldepur; re-survey of 16,726 buildings to be conduct
उल्देपुर में अवैध कॉलोनियां - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट का आदेश जारी होने पर मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) ने उल्देपुर में ध्वस्तीकरण और जोन-ए में चिह्नित 16,726 भवन का री-सर्वे करने की तैयारी शुरू कर दी है। जोन-ए के बाद जोन-बी, सी और डी का भी सर्वे कराया जाएगा। आशंका जताई जा रही है कि री-सर्वे में 16,726 भवनों में 80 प्रतिशत भवन मेरठ में प्राधिकरण की स्थापना से पहले के हैं। इन्हें राहत मिल सकती है। मेरठ में न्यायिक आयोग का गठन होने पर इसे लेकर मंथन हो सकता है। सोमवार को आंदोलन करने वाले किसानों ने भी न्यायिक आयोग के सदस्यों से मुलाकात करने की मांग मेडा के उपाध्यक्ष संजय कुमार मीना से की है।
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किठौर विधानसभा की सीमा के अंतिम गांव उल्देपुर में 100 से अधिक अवैध कॉलोनियों के साथ अवैध निर्माण कार्य भी ध्वस्त करने के आदेश 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने किए हैं। इसके अलावा मेडा ने जोन-ए में चिह्नित किए गए भवनों को जब्त करने के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट से आदेश जारी होने पर मेरठ के लोगों में खलबली मची है। एक सप्ताह से जोन-ए, बी, सी और डी में रहने वाले लोग प्राधिकरण में जाकर पूछ रहे हैं कि उनका मकान अवैध है या वैध। लोगों में बेचैनी है कि कहीं उनके मकान पर बुलडोजर या फिर जब्त होने की कार्रवाई न हो जाए।
 
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वहीं, प्राधिकरण के अधिकारी समझा रहे हैं कि उनके विभाग के हाथ में कुछ नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश ही सर्वोपरि है। उल्देपुर में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने की योजना बन रही है। प्राधिकरण ने जो 16,726 भवनों की सूची सुप्रीम कोर्ट ने दी है, वह सभी भवनों की है। 
 
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अभी यह नहीं बताया कि प्राधिकरण की स्थापना से पहले वाले भवन कौन से हैं और कौन सा भवन कितना पुराना है, इसके लिए प्राधिकरण री-सर्वे करने की तैयारी में लग गया है। जोन-ए में मेरठ शहर का पुराना हिस्सा ज्यादा है। इससे अंदेशा है कि 80 प्रतिशत भवन 1975 से पहले के बने हैं। इसकी समीक्षा करने करने के लिए प्राधिकरण टीम का गठन करेगी।
 

भवन स्वामी को देना होगा रिकॉर्ड
साल 1976 से पहले वाले भवन स्वामियों को अपने भवन, दुकान या फिर मकान का रिकॉर्ड देना होगा। वह निगम या नगर पालिका में कब से हाउस टैक्स दे रहे हैं। बैनामा या अन्य दस्तावेज देकर प्रमाणित करेंगे कि उनका मकान कितना पुराना है। री-सर्वे से पहले प्राधिकरण उक्त 16,726 भवन स्वामियों को नोटिस देगा। नोटिस के बाद भवनों की जांच करेंगे व फिर उनके द्वारा दस्तावेज की समीक्षा की जाएगी।

ये बोले मेडा वीसी
किसानों ने अपनी मांगे रखी हैं। अवैध कॉलोनी, ध्वस्तीकरण, शताब्दीनगर सहित 10 सूत्रीय मांग करते हुए किसानों ने ज्ञापन दिया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा। इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी मंथन होगा। 
- संजय कुमार मीना, उपाध्यक्ष, मेडा

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