राजनीतिक दबाव में पीछे हट रहे खाकी के कदम, इन चार बड़े मामलों ने खोली पुलिस की पोल
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उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में हत्या, जानलेवा हमला व सांप्रदायिक टकराव जैसे संगीन मामलों में राजनीतिक दबाव पड़ने पर पुलिस पीछे हट रही है। इन चार मामलों में पुलिस की खूब किरकिरी हुई है।
केस - 1 (हटानी पड़ी धारा) :-
गंगानगर के सलारपुर गांव में क्राइम ब्रांच ने प्रधान कुंवर साहब भारद्वाज के बेटे नितिन को पकड़ा। क्राइम ब्रांच टीम पर हमले का आराप था। पुलिस ने प्रधान और उसके भतीजे को जानलेवा हमले की धारा में जेल भेजा। इसका विरोध होने पर नतीजा यह निकला कि पुलिस को जानलेवा हमले की धारा हटानी पड़ी।
केस - 2 (हटानी पड़ी धारा) :-
इंचौली के बिसौला गांव में दो पक्षों में बवाल में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बनी। पुलिस ने दोनों पक्ष से केस दर्ज किये। आरोपियों की तलाश शुरू करते ही राजनीतिक हस्तक्षेप हो गया। भाजपा नेताओं का दबाव पड़ते ही पुलिस ने एक पक्ष के मुकदमे में एफआर लगाकर दूसरे पक्ष के पांच लोग जेल भेजे। लोगों ने अधिकारियों के यहां हंगामा किया, जिससे पुलिस की किरकिरी हुई।
केस- 3 (दरोगा पिटाई मामला)
ब्लैक पेपर होटल प्रकरण में दरोगा सुखपाल सिंह को भाजपा पार्षद द्वारा पीटने की वीडियो भी खूब वायरल हुई। पुलिस ने पार्षद को जेल भेजा। लेकिन होटल में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में दरोगा और साथी महिला की गलती भी सामने आई। पुलिस को दरोगा और महिला पर केस दर्ज करना पड़ा। पार्षद पर लगी जानलेवा हमले की धारा हटानी पड़ी।
केस- 4 हत्या में भी किरकिरी :
दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल सरबजीत सिंह हत्याकांछ में क्राइम ब्रांच ने मुंडाली के तीन लोगों को पूछताछ के बाद क्लीनचिट दे दी। जबकि इन्हीं तीनों लोगों पर खरखौदा इंस्पेक्टर ने केस खोल दिया। इस खुलासे के बाद पुलिस की खूब किरकिरी हुई।
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