मेरठ: सड़क हादसे रोकने को स्पॉट और स्पीड प्लान पर पुलिस का फोकस
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मेरठ में सड़क दुर्घटनाएं रोकने के लिए अब ट्रैफिक पुलिस ने नया प्लान तैयार किया है। 15 नवंबर से लेकर फरवरी 2019 तक साढ़े तीन माह के लिए ट्रैफिक पुलिस का यह अभियान चलेगा। स्कूल और कॉलेजों में दुर्घटना रोकने के लिए तो ट्रैफिक पुलिस जागरूकता अभियान चला ही रही है, लेकिन अब हाईवे और मुख्य मार्गों के समीप गांवों में भी इसे फैलाया जाएगा। सर्दी के मौसम में रात के समय कोहरे के कारण सबसे अधिक सड़क हादसे होते हैं। पुलिस का प्लान है कि ब्लैक स्पॉट और ओवर स्पीड के कारण हादसों को कम किया जाए।
ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक प्रत्येक दिन तीन से चार सड़क दुघर्टनाएं होती हैं। औसतन दो से तीन व्यक्ति सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होते हैं और एक व्यक्ति की जान चली जाती है। मेरठ में सबसे ज्यादा दिल्ली-मेरठ हाईवे (एनएच- 58) पर हादसों में मौत होती हैं। एनएच-58 के बाद मेरठ-पौड़ी मार्ग, मेरठ- बुलंदशहर हाईवे और गढ़ रोड पर दुर्घटनाएं होती हैं। ट्रैफिक पुलिस इन्हें रोकने या कम करने के प्लान पर काम कर रही है, जिसमें कुछ संस्थाओं के साथ मिलकर जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।
ओवर स्पीडिंग है बड़ा कारण
तेज गति में सबसे ज्यादा व्यक्तियों की जान जाती हैं। ट्रैफिक पुलिस ने साल 2017 में ओवर स्पीड वाहन चलाने वाले 70 चालकों पर ही कार्रवाई की। जबकि इस साल एक जनवरी से 15 अक्तूबर तक 48 वाहनों पर कार्रवाई की गई। ट्रैफिक पुलिस के पास इंटरसेप्टर गाड़ी है, जिसमें कैमरा रडार से वाहन की स्पीड का पता चलता है। तेज गति वाहन चलाने पर पुलिस हाईवे और मुख्य मार्गों पर प्लान के तहत अभियान चलाकर कार्रवाई में तेजी लाएगी।
कम होंगे ब्लैक स्पॉट के खतरे
ट्रैफिक पुलिस के रिकार्ड में एनएच- 58, दिल्ली-मेरठ हाईवे, मेरठ-पौड़ी मार्ग, मेरठ-हापुड़ मार्ग, गढ़ रोड पर 25 ब्लैक स्पॉट चिन्हित हैं। नगर निगम, विकास प्राधिकरण, एनएचएआई और पीडब्लूडी के साथ मिलकर इन ब्लैक स्पॉट के दुर्घटना कारणों को कम किया जाएगा। यहां वाहनों की स्पीड कम हो सके, इसके लिए सड़कों पर चेतावनी बोर्ड और स्पीड ब्रेकर्स बनाने की योजना है। इन स्थलों का भौतिक सर्वेक्षण कर निर्णय लिया जाना है।
दो पहिया पर हेलमेट जरूरी
दो पहिया वाहनों के लिए हेलमेट अभियान को प्रभावी ढंग से चलाया जाएगा। जिनमें ट्रैफिक पुलिस के साथ थाना पुलिस भी अभियान चलाएगी। दो पहिया वाहन चलाते समय बिना हेलमेट के वाहन चलाना जोखिम भरा है। 2017 में 23,207 व्यक्तियों पर हेलमेट नहीं पहनने के कारण कार्रवाई की गई थी। इस बार इसे अनिवार्य रूप से लागू कराने की दिशा में फोकस रहेगा।
अभियान के खास बिंदु
-जुगाड़ और ओवरलोड वाहनों पर लगातार कार्रवाई होगी।
-ड्रिंक एंड ड्राइव के खिलाफ मजबूती से अभियान चलेगा।
-सीट बेल्ट न लगाने व रांग साइड ड्राइव पर कार्रवाई होगी।
-दो पहिया पर तीन सवारी का चालान व डीएल निरस्त होगा।
-कोहरे में बचाव के लिए वाहनों के पीछे लाइट व रिफ्लेक्टर।
-रात में सड़क किनारे खड़े वाहनों को क्रेन से उठाया जाएगा।
-स्पीड नियंत्रण के लिए चेतावनी व साइन बोर्ड लगाए जाएंगे।
भयावह है हादसों की स्थिति
वर्ष सड़क दुघर्टनाओं की संख्या मृतकों की संख्या घायलों की संख्या
2013 882 467 848
2014 1047 384 921
2015 952 386 728
2016 977 421 758
2017 1040 417 808
2018 784 329 567
(इस वर्ष की स्थिति एक जनवरी से 15 अक्तूबर तक ट्रैफिक पुलिस के अनुसार है।)
कोट
सड़क दुघर्टनाओं को लेकर ट्रैफिक पुलिस ओवर स्पीड और ब्लैक स्पॉट पर भी काम करेगी। इसके लिए संस्थाओं और संबंधित विभाग के अधिकारियों के साथ अभियान चलेगा। सीओ, टीआई और टीएसआई की भूमिका अलग अलग निर्धारित की गई है। -संजीव बाजपेयी, एसपी ट्रैफिक
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