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UP:मेरठ पुलिस का डिजिटल सुरक्षा मॉडल, कांवड़ के बाद अब स्वतंत्रता दिवस पर भी तकनीक से साजिश पर नजर

Fri, 14 Aug 2026 03:14 PM IST
Dimple Sirohi जेपी शर्मा, अमर उजाला, मेरठ
जेपी शर्मा, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Fri, 14 Aug 2026 03:14 PM IST
सार

मेरठ पुलिस ने कांवड़ यात्रा के दौरान डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया। सोशल मीडिया निगरानी, अत्याधुनिक कैमरों, ड्रोन, गूगल मैप और संदिग्धों के डिजिटल सत्यापन जैसे संसाधनों के इस्तेमाल के बाद अब स्वतंत्रता दिवस की सुरक्षा भी इसी मॉडल पर तैयार की जा रही है।

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Meerut Police Expands Digital Surveillance Model for Independence Day Security
पुलिस के नए हथियार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कांवड़ यात्रा के दौरान पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और उसके गुर्गों के खलल पैदा करने की साजिश मेरठ पुलिस ने डिजिटल तकनीक के जरिए नाकाम करने में सफलता हासिल की है। सोशल मीडिया से लेकर अत्याधुनिक कैमरों, ड्रोन, गूगल मैप और एआई आधारित सॉफ्टवेयर तक का इस्तेमाल कर पुलिस ने न केवल कांवड़ मार्ग और शिवालयों की चुस्त-दुरुस्त निगरानी की, बल्कि हर साजिश को नाकाम किया। अब स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर भी इसी डिजिटल मॉडल पर सुरक्षा का खाका तैयार किया जा रहा है।

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कांवड़ यात्रा से पहले पुलिस को पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और उसके गुर्गों की सक्रियता के संबंध में खुफिया इनपुट मिले थे। आईएसआई के इशारे पर पाकिस्तानी इंटेलीजेंस ऑपरेटिव (पीआईओ) द्वारा गैंगस्टरों की मदद से सोशल मीडिया के माध्यम से नेटवर्क तैयार करने और युवाओं को स्लीपर सेल से जोड़ने की जानकारी सामने आई थी। पिछले कुछ महीनों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के करीब 25 युवाओं और किशोरों के इस नेटवर्क से जुड़े होने का खुलासा हुआ था। इनमें मेरठ के युवक भी शामिल थे।
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कांवड़ यात्रा में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ और सुरक्षा की चुनौती के बीच पुलिस ने पहली बार डिजिटल तकनीक को अपना हथियार बनाया। एडीजी भानु भास्कर और डीआईजी कलानिधि नैथानी के साथ एसएसपी अविनाश पांडेय ने स्मार्ट पुलिसिंग के तहत तकनीकी संसाधनों का बखूबी इस्तेमाल कर सुरक्षा रणनीति को नई दिशा दी।

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मैट्रिक्स एक्सप्लोरेशन सॉफ्टवेयर - फोटो : अमर उजाला

मैट्रिक्स एक्सप्लोरेशन से सोशल मीडिया पर नजर
पुलिस ने विशेष टीम लगाकर मैट्रिक्स एक्सप्लोरेशन के जरिये दिन-रात सोशल मीडिया की निगरानी की। एआई आधारित यह सॉफ्टवेयर इंस्टाग्राम, एक्स, फेसबुक, यूट्यूब, वेब न्यूज और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर साझा की जा रही भड़काऊ और फर्जी पोस्ट को तलाशने में मदद करता रहा। ताकि, माहौल बिगाड़ने की कोशिशों पर समय रहते रोक लगाई जा सके।

गूगल मैप से जाम पर नजर, डीजे कंप्टीशन पर लगाम
कांवड़ यात्रा के दौरान बड़े डीजे वाले वाहनों और डीजे कंप्टीशन के कारण जाम की स्थिति चुनौती बनी रही। पुलिस अधिकारियों ने गूगल मैप के जरिये यातायात की स्थिति पर लगातार नजर रखी। जहां जाम की सूचना मिली, वहां तत्काल पुलिस बल भेजकर यातायात सुचारू कराया गया।

दूसरे जिलों से बड़े डीजे वाली कांवड़ आने की सूचना मिलते ही पुलिस अलर्ट हो गई और डीजे कंप्टीशन की स्थिति बनने नहीं दी। एक मौके पर इसे रोकने के लिए एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले खुद डीजे पर चढ़ गए थे।

360 डिग्री निगरानी और क्लोजअप दृश्य
कांवड़ मार्ग की निगरानी के लिए पीटीजेड नाइट विजन कैमरों का इस्तेमाल किया गया। ये कैमरे 360 डिग्री घूमकर आसपास के क्षेत्र पर नजर रखने के साथ दूर के दृश्यों को जूम कर करीब से देखने में सक्षम हैं। इनसे कंट्रोल रूम ही नहीं, बल्कि अधिकारी अपने मोबाइल फोन के माध्यम से भी क्षेत्र की निगरानी कर सकते थे।

वहीं, आईपी कैमरों के जरिये इंटरनेट या स्थानीय नेटवर्क के माध्यम से वीडियो और ऑडियो डेटा प्राप्त किया गया। इससे संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की निगरानी और प्रभावी हुई।

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यक्ष एप से संदिग्धों की पहचान
संदिग्ध लोगों की पहचान और चेकिंग के लिए पुलिस ने यक्ष एप का इस्तेमाल किया। इस एप में प्रदेश के अपराधियों से संबंधित डाटा उपलब्ध है। किसी संदिग्ध का फोटो लेकर उसके अपराध रिकॉर्ड से मिलान करने में पुलिस को मदद मिलती है।

इसके अलावा कांवड़ मार्ग और आसपास की इमारतों की छतों पर भी ड्रोन से नजर रखी गई। ड्रोन की मदद से ऐसे स्थानों की निगरानी की गई, जहां से किसी तरह की संदिग्ध गतिविधि या सुरक्षा संबंधी खतरा पैदा हो सकता था।

अब स्वतंत्रता दिवस पर भी डिजिटल पहरा
कांवड़ यात्रा के दौरान तकनीक के इस्तेमाल से मिले अनुभव के बाद पुलिस अब स्वतंत्रता दिवस की सुरक्षा व्यवस्था में भी इसी मॉडल को आगे बढ़ा रही है। सोशल मीडिया मॉनिटरिंग, सीसीटीवी और पीटीजेड कैमरे, ड्रोन तथा संदिग्धों के डिजिटल सत्यापन जैसे संसाधनों के जरिये सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। यानी अब पुलिस की नजर सिर्फ सड़क और चौराहों पर नहीं, बल्कि डिजिटल दौर में शातिरों की हर चाल पर तकनीक का पहरा बिछा दिया गया है।

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