कमांडो को जेल भेजने में पुलिस की गर्दन फंसी, सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर तक पर गिर सकती है गाज
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घटना वाली 21 अगस्त की रात 11.24 बजे डिलीवरी ब्वॉय विवेक की लूट की तहरीर को इंस्पेक्टर मेडिकल ने महज आठ मिनट में पढकर पुलिस की रवानगी कराई। मौके पर जांच पड़ताल कर मोबाइल बरामद कर 11.32 बजे कंप्यूटर पर मुकदमा दर्ज हो गया। दूसरा मुकदमा रात्रि डेढ़ बजे और तीसरा मुकदमा भी उसके बाद दर्ज हुआ। आठ मिनट में पुलिस ने कमांडो के खिलाफ साजिशन मुकदमा दर्ज कर मोबाइल बरामद कर लिया।
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एफआईआर में वादी विवेक का पता गलत लिखा गया है, जबकि वह दरोगा सुनील व जितेंद्र के कमरे पर रहता है। तथाकथित मेडिकल जांच पर कमांडो के हस्ताक्षर व अंगूठे के निशान नहीं हैं। जबकि कोर्ट के आदेश पर सतेंद्र कमांडो का जेल में मेडिकल कराया गया।
जेल के मेडिकल में कमांडो के शरीर पर चोट के निशान आए, जबकि मेडिकल कॉलेज में कोई चोट का निशान नहीं बताया गया। सवाल है कि लूट का मोबाइल जब मिला तो उसके बाद लूट की धारा क्यों लगाई। फिर पुलिस ने दबाव में धारा क्यों हटाई। एक जवान को लॉकअप में क्यों रखा गया, जिसका फोटो भी वायरल हुआ। एसएसपी से आरोपी इंस्पेक्टर, दरोगा व सिपाहियों पर मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर जेल भेजने की मांग की है।